उत्तराखंड में पंचायत चुनाव: जिस गांव में पहुंचे थे पीएम मोदी, वहां ग्रामीणों ने क्यों कहा-रोड नहीं वोट नहीं

panchyat chunav Boycott Mukhaba village: उत्तराखंड में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पंचायत चुनाव को लेकर प्रत्याशियों ने माहौल बनाना शुरू कर दिया है। लेकिन इस बीच भारत चीन बॉर्डर के पहले गांवों में से एक मां गंगा के शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव के स्थानीय लोगों ने रोड नहीं तो वोट नहीं का ऐलान कर दिया है।

मुखबा गांव के लोगों ने चुनाव के बहिष्कार की बात करते हुए मुखबा -जंगला मोटर मार्ग की मांग तेज कर दी है। गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों ने मुखबा -जांगला मोटर मार्ग की मांग की है। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि मुखबा गांव के ग्रामीण वर्षों से मुखबा-जांगला मोटर मार्ग निर्माण की मांग कर रहे हैं।

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जिसे शासन प्रशासन लगातार अनसुना कर रहा है। लेकिन इस बार ग्रामीणों ने आर पार का ऐलान कर दिया है। मुखबा गांव भारत चीन सीमा से सटा व मां गंगा का शीतकालीन प्रवास है। जहां इस बार शीतकाल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दर्शन किए थे। मुखबा के ग्रामीणों ने डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भी सौंपा। जिसमें उहोंने बताया कि वह कई दशकों से मुखबा -जांगला मोटर मार्गनिर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज भी उनकी तक उनकी मांग पूरी नही हो पाई है।

गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहित डॉ सत्येंद्र सेमवाल ने कहा कि सड़क न होने के कारण वह आज भी राजशाही के समय से बनी पगडंडी पर ही गंगोत्री धाम को आवागमन कर रहे हैं। गंगोत्री धाम के कपाट खुलने व बंद होने पर गंगा जी की उसव डोली इसी मार्ग से होकर गुजरती है। जो कि उबाड़-खाबड़ है। ऐसे में उत्सव डोली को लाते और ले जाते हुए कई बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि छह किमी. लंबे इस मार्ग के निर्माण के लिए कई बार ग्रामीण शासन शासन को अबवत करा चुके हैं। लेकिन किसी ने इसकी सुध नही ली। लेकिन इस बार उन्होंने इसका विरोध शुरू करते हुए पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। डीएम को ज्ञापन देने वालों में मुखबा गांव के कई ग्रामीण शामिल रहे।

हर्षिल-मुखबा-जांगला मोटर मार्ग स्वीकृति के 41 साल बाद भी अधर में लटका हुआ है। किसी तरह 37 साल बाद मुखबा तक तो सड़क पहुंच गई, लेकिन इससे आगे जांगला तक की सड़क ईको सेंसिटिव जोन के पेच में फंस कर रह गई है। वर्ष 1978-79 में हर्षिल से जांगला तक 7.75 किमी सड़क शासन ने स्वीकृत की थी।

कभी बजट तो कभी फॉरेस्ट के अड़ंगे के कारण यह सड़क बड़ी मुश्किल से वर्ष 2015-16 में मुखबा तक ही बन पाई। इससे आगे जांगला तक की सड़क अब ईको सेंसिटिव जोन की बंदिशों के चलते अधर में लटक गई है।
केंद्र सरकार ने मुखबा से जांगला तक स्वीकृत सड़क पर निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी है। इस सड़क के बन जाने से गंगोत्री धाम की यात्रा ही नहीं सेना को भी काफी सहूलियत हो सकती है।

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