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Uttarakhand News स्कूलों में श्रीमद् भगवद गीता के श्लोकों का पाठ अनिवार्य, कक्षा 6 से 12 तक हुआ लागू

Uttarakhand News उत्तराखंड के सभी स्कूलों में श्रीमद् भगवद गीता के श्लोकों का पाठ राज्य सरकार ने अनिवार्य कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन से जोड़ना है, ताकि छात्र-छात्राओं का सर्वांगीण विकास हो सके। देवभूमि के संतों ने भी इस पहल का स्वागत किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ऐलान के बाद प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब श्रीमद् भगवद गीता के श्लोकों का पाठ अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्णय कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा। बाकायदा शिक्षा विभाग ने इसका आदेश भी जारी किया है।

Uttarakhand News Recitation verses Shrimad Bhagavad Gita mandatory schools implemented classes 6

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बड़ी घोषणा के बाद राज्य के सभी स्कूलों में श्रीमद् भगवद गीता के श्लोकों का पाठ अब अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री के इस फैसले का असर ज़मीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। देहरादून के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजपुर रोड में छात्राएं पूरे श्रद्धा भाव के साथ श्रीमद् भगवद गीता के श्लोकों का सामूहिक पाठ करती नजर आईं।

श्लोकों के उच्चारण के बाद शिक्षिकाएं उनका सरल अर्थ और जीवन में उपयोगिता छात्राओं को समझा रही हैं। छात्राओं ने कहा गीता के श्लोक हमें सही और गलत का फर्क समझाते हैं। इससे हमें अपने जीवन में सही निर्णय लेने की प्रेरणा मिलती है और पढ़ाई के साथ-साथ जीवन को समझने में भी मदद मिलती है।

विद्यालय की शिक्षिकाओं का मानना है कि गीता के श्लोक किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये जीवन प्रबंधन, तनाव नियंत्रण और सकारात्मक सोच का मजबूत आधार हैं। आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में जब छात्र-छात्राएं मानसिक दबाव से गुजरते हैं, तब गीता के उपदेश उन्हें संतुलित और लक्ष्य केंद्रित बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। शिक्षिकाओं ने कहा गीता के उपदेश छात्राओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और नैतिकता विकसित करते हैं। यह शिक्षा व्यवहारिक जीवन में बहुत उपयोगी है और बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाती है।

विद्यालय की प्रधानाचार्य प्रेमलता बौड़ाई का कहना है कि सरकार का यह निर्णय केवल पाठ्यक्रम से जुड़ा कदम नहीं है, बल्कि यह छात्राओं के चरित्र निर्माण और संस्कारों को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक पहल है। प्रधानाचार्य प्रेमलता बौड़ाई ने कहा गीता का पाठ छात्राओं को कर्तव्य, कर्म और जीवन के उद्देश्य को समझने में मदद करेगा। इससे वे जिम्मेदार, संवेदनशील और आत्मनिर्भर नागरिक बनेंगी। सरकार के इस फैसले को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी समर्थन मिल रहा है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि सावन माह में की गई यह घोषणा अब धरातल पर उतर चुकी है। उन्होंने कहा कि गीता पाठ केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉलेजों में भी इसका पाठ पढ़ता जाना चाहिए। वहीं जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज ने भी इस निर्णय की सराहना की। शंकराचार्य ने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया यह कार्य अत्यंत सराहनीय है और इससे समाज को नैतिक मजबूती मिलेगी।

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