उत्तराखंड चुनाव:भाजपा का दामन थामा, तो मिली जीत की गारंटी, कांग्रेस में शामिल होने से मिली निराशा, जानिए कैसे
चुनाव से पहले दलबदल से किसे हुआ फायदा, किसे नुकसान
देहरादून, 14 मार्च। उत्तराखंड में 5वीं विधानसभा का गठन हो चुका है। जिसमें 70 नए विधायक चुनकर आए हैं। लेकिन इस बार कई चेहरे नए हैं तो कुछ चेहरों के पाले बदले हुए नजर आएंगे। ऐसे ही कुछ चेहरे चुनाव से ठीक पहले पाला बदलकर नई पार्टी का हिस्सा बने, जिनमें से कुछ ने जीत का स्वाद चखा तो कुछ को हार का मुंह देखना पड़ा है। लेकिन ये बात साफ है कि जिसने भी भाजपा का दामन थामा, उसे जीत की गारंटी ही हाथ लगी है। जबकि कांग्रेस में जाने वालों में से यशपाल आर्य को छोड़कर कोई भी चुनाव नहीं जीत पाए हैं। भाजपा में जाने वाले कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं सरिता आर्य, निर्दलीय विधायक प्रीतम पंवार और राम सिंह कैड़ा और निर्दलीय चुनाव लड़ चुके दुर्गेश्वरलाल के लिए भाजपा में जाना सही निर्णय साबित हुआ। वहीं चुनाव से पहले कांग्रेस में जाने से मालचंद, धन सिंह नेगी, ओमगोपाल रावत को कोई फायदा नहीं हुआ।

भाजपा में जाने से जिनको हुआ फायदा
किशोर उपाध्याय- कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नारायण दत्त तिवारी सरकार में मंत्री रहे किशोर उपाध्याय ने चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन थामा। उन्हें कांग्रेस ने भाजपा के नेताओं से मुलाकात करने के कारण पार्टी ने पहले निष्कासित किया तो वे टिहरी से भाजपा के साथ हो गए। चुनाव में कांटे की टक्कर में किशोर चुनाव जीत गए।
सरिता आर्य- पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और उनके बेटे संजीव आर्य के कांग्रेस में वापसी के बाद कांग्रेस की महिला मोर्चा की अध्यक्ष सरिता आर्य ने नैनीताल से टिकट कटते देख चुनाव से ठीक पहले भाजपा ज्चाइन की तो वे चुनाव जीतकर विधायक बन गई। सरिता आर्य ने नैनीताल से संजीव आर्य को ही हराया है।
प्रीतम पंवार- पहले यूकेडी और फिर निर्दलीय विधायक बन कर प्रीतम पंवार कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहे। लेकिन चुनाव से ठीक पहले प्रीतम पंवार भाजपा में शामिल हो गए। प्रीतम अब धनोल्टी सीट से विधायक चुनकर आए हैं। वे भाजपा में शामिल होने वाले पहले विधायक रहे।
राम सिंह कैड़ा-भीमताल से निर्दलीय विधायक रहे राम सिंह कैड़ा इस बार भाजपा के टिकट से विधायक बनकर आए हैं। कैड़ा ने चुनाव से ठीक पहले भाजपा ज्वाइन की थी। अब वे विधायक चुनकर आए हैं।
दुर्गेश्वरलाल- पहले कांग्रेस और फिर टिकट बंटने से ठीक पहले दुर्गेश्वरलाल भाजपा में शामिल हुए। दुर्गेश्वरलाल पुरोला सुरक्षित सीट से चुनाव जीतकर विधायक बन गए हैं। वे पहले निर्दलीय पुरोला से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए थे। इस बार भाजपा के टिकट से वे जीतकर आए हैं।
यशपाल आर्य को छोड़कर कोई नहीं जीता
यशपाल आर्य- कांग्रेस छोड़कर 2017 में भाजपा ज्वाइन करने वाले यशपाल आर्य ने बेटे संजीव आर्य के साथ 2022 चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में वापसी की। यशपाल आर्य तो चुनाव जीत गए लेकिन बेटा संजीव आर्य चुनाव हार गए।
संजीव आर्य- 2017 में नैनीताल से विधायक चुनकर आए, संजीव आर्य को 2022 में हार का सामना करना पड़ा है। इस बार संजीव कांग्रेस के सिंबल से चुनाव लड़े थे। लेकिन वे हार गए। इस तरह संजीव आर्य का कांग्रेस में जाना गलत साबित हुआ।
मालचंद- पुरोला से पहले भाजपा के विधायक रहे मालचंद इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन वे चुनाव हार गए। मालचंद के लिए कांग्रेस में जाना गलत निर्णय साबित हुआ।
राजकुमार- पुरोला से कांग्रेस के विधायक रहे राजकुमार चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए लेकिन राजकुमार को कहीं से टिकट नहीं मिला। इस तरह उनको पार्टी बदलने से कोई फायदा नहीं हुआ है।
धन सिंह नेगी- टिहरी से भाजपा के विधायक रहे धन सिंह नेगी चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हुए, उन्होंने किशोर उपाध्याय के भाजपा ज्वाइन करने का विरोध किया। लेकिन टिकट मिलने के बाद भी वे कांग्रेस के सिंबल से चुनाव हार गए।
ओमगोपाल रावत- नरेंद्रनगर के पूर्व विधायक रह चुके ओमगोपाल रावत ने इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन इस बार वे भाजपा के प्रत्याशी सुबोध उनियाल को नहीं हरा सके। कांग्रेस में जाना उनके लिए भी घाटे का सौदा हुआ।












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