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साइबर ठगी का अनोखा तरीका, पुलिस बनकर ऑनलाइन अरेस्‍ट कर लाखों की ठगी, तरीका ऐसा की रह जाएंगे दंग

साइबर ठग ​इस तरह से लोगों को अपने झांसे में ले रहे हैं कि हर कोई डरकर या उनकी बातों में आकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। इतना ही नहीं साइबर ठग अब लोगों को घर बैठे पुलिस का डर दिखाकर ऑनलाइन अरेस्‍ट भी कर रहे हैं।

इसके बाद लाखों रुपए लेकर गायब हो जाते हैं। ऐसा ही एक अनोखा मामला उत्तराखंड के हल्द्वानी से सामने आया है। यहां मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर ठगों ने एक व्यक्ति को 24 घंटे ऑनलाइन अरेस्‍ट रखा।

Unique method cyber fraud of lakhs by posing as police and arresting online method stunned

इतना ही नहीं 4 लाख रुपए भी अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए। उन्होंने पी​ड़ित को ये कहकर डराया कि ड्रग्स के साथ उनका आधार व पैन कार्ड बरामद हुआ। जिसके बाद पीड़ित को मुंबई थाने में बुलाया।

जब पीड़ित ने आने में असमर्थता जताई तो ऑनलाइन अरेस्‍ट का ड्रामा भी रच डाला। इसके बाद चार लाख रुपए लेकर गायब हो गए। पीड़ित ने ये पूरी शिकायत अब पुलिस से की। जिसके बाद मुकदमा दर्ज किया गया है।

हल्द्वानी में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हरिहर प्रसाद शुक्ला को साइबर ठगों ने ऑनलाइन अरेस्ट कर लिया। बताया कि मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर ठगों ने ताइवान जा रहे कोरियर में ड्रग्स संग उनका आधार व पैन कार्ड मिलने की बात कहते हुए धमकाया।

इसके बाद 24 घंटे तक कमरे में बंद कर वीडियो काल पर बैठाए रखा और बैंक खाते में चार लाख रुपये डलवा लिए। हरिहर प्रसाद शुक्ला ने पुलिस को बताया कि 25 अप्रैल को उनके पास अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि उनके आधार आइडी से फेड एक्स कोरियर से एक पार्सल ताइवान भेजा गया है, जिसे मुंबई कस्टम पुलिस ने पकड़ा है।

कोरियर से ड्रग्स, पासपोर्ट, क्रेडिट कार्ड व गैरकानूनी सामग्री मिली है। इसलिए उन्हें तत्काल मुंबई क्राइम ब्रांच में रिपोर्ट करनी होगी। इस पर शिकायतकर्ता ने हल्द्वानी से मुंबई पहुंचने में असमर्थता जताई तो व्यक्ति ने कहा कि वह फोन को ऑनलाइन मुंबई क्राइम ब्रांच से कनेक्ट कर रहा है।

डीसीपी और इंस्पेक्टर बने व्यक्ति ने प्राथमिक जांच के बाद कहा कि उनके आधार, पहचान पत्र से चार बैंक अकाउंट अलग-अलग शहरों में खोले गए हैं और उनसे करोड़ों रुपये का गैर कानूनी लेनदेन हुआ है। इस कारनामे में कई अपराधी शामिल हैं। जांच में सहयोग करने के लिए उन्हें 24 घंटे स्काइप से वीडियो काल कर फर्जी मुंबई क्राइम ब्रांच की निगरानी में रहने की हिदायत दी और उन्हें घर में ही वर्चुअल बंधक बनाए रखा।

फाइनेंसियल वेरीफिकेशन के लिए उनके बताए गए खाते में चार लाख रुपये जमा करवा लिए। हरिहर ने बताया कि वीडियो काल के दौरान एक पूछताछ कक्ष में सभी ठग पुलिस की वर्दी में थे। डीपी में मुंबई क्राइम ब्रांच का लोगो लगा था। ठगों ने उन्हें सीबीआइ और आरबीआइ के पत्र दिखाए और अपराध में लिप्त होने की पुष्टि की।

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