Tungnath Temple दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर का होगा जीर्णोद्धार,जानिए क्या हैं इसकी पौराणिक मान्यताएं
विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण और सुरक्षात्मक कार्यों के लिए धामी सरकार ने अनुमति दे दी है। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की (सीबीआरआई) की देखरेख में मंदिर के संरक्षण कार्य किए जाएंगे।
बता दें कि बद्री केदार मंदिर समिति ने गत वर्ष भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के महानिदेशक को पत्र लिखकर तुंगनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण व सुरक्षात्मक कार्यों को कराने के लिए तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराने का आग्रह किया था।

जिसके बाद दोनों विभागों के विशेषज्ञों ने मंदिर का अध्ययन कर रिपोर्ट बीकेटीसी को सौंपी थी। रिपोर्ट के बाद बीकेटीसी ने केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की से भी इस संबंध में राय मांगी है। सीबीआरआई के वैज्ञानिक पिछले दिनों तुंगनाथ का भ्रमण कर चुके हैं। इस बीच बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र ने शासन को एएसआई व जीएसआई की रिपोर्ट का हवाला देते तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण कार्यों के लिए सहमति देने का आग्रह किया था।
जिस पर सचिव धर्मस्व व संस्कृति ने बीकेटीसी को पत्र लिखकर इसकी अनुमति प्रदान कर दी है। शासन ने मंदिर की पौराणिकता को देखते हुए इसकी विस्तृत योजना रिपोर्ट और संपूर्ण कार्य सीबीआरआई रुड़की के माध्यम से कराने के निर्देश दिए हैं। शासन ने यह भी निर्देश दिए कि संपूर्ण कार्य एएसआई और जीएसआई के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए किए जाएंगे।
तुंगनाथ मंदिर पंचकेदार (तुंगनाथ, केदारनाथ, मध्य महेश्वर, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर) में सबसे ऊंचाई पर स्थित है। धार्मिक मान्यतों के अनुसार यहां पर शिवजी भुजा के रूप में विद्यमान हैं। इसीलिए तुंगनाथ मंदिर में भगवान शिव की भुजाओं की पूजा होती है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित तुंगनाथ पंच केदारों में सबसे ऊंचा मंदिर है।
बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भी पांडवों ने ही कराया था। मंदिर चोपता से तीन किमी दूर स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को शादी के लिए प्रसन्न करने के लिए माता पार्वती ने यहां पर तपस्या की थी। पौराणिक मान्यता है कि पंच केदार का निर्माण पांडव व उनके वंशजों ने करवाया था।












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