ट्रैकिंग और रोमांच के सफर के शौकीन, शुरू होने जा रहा ऋषिकेश-केदारनाथ पौराणिक मार्ग पर गंगा पदयात्रा
ऋषिकेश-केदारनाथ पौराणिक मार्ग पर ट्रैकिंग शुरू होने जा रही है। ऋषिकेश से देवप्रयाग तक की सड़क मार्ग से दूरी 73.4 है। लेकिन इस पदयात्रा से 67.6 किमी पैदल ट्रैक होगा।

अगर आप ट्रैकिंग और रोमांच के सफर के शौकीन हैं तो जल्द ही ऋषिकेश-केदारनाथ पौराणिक मार्ग पर ट्रैकिंग कर सकते हैं। इसके लिए गंगा पदयात्रा शुरू होने जा रही है। ये रुट ऋषिकेश से केदारनाथ के बीच पौराणिक और तीर्थाटन का गवाह भी है। इस पर ट्रैकिंग के जरिए पौराणिक इतिहास और महत्व को भी जीवंत करने का प्रयास किया जा रहा है।
चारधाम यात्रा शुरू होते ही कर दी जाएगी ट्रैकिंग
पौड़ी जिले के डीएम डॉ आशीष चौहान की पहल पर ये ट्रैकिंग चारधाम यात्रा शुरू होते ही कर दी जाएगी। डीएम ने खुद इस पौराणिक मार्ग पर 22 किमी चलकर पैदल ट्रैक के बारे में जानकारी ली और पौराणिक मार्ग को शुरू करने की पहल की। राज्य सरकार चारों धामों के पौराणिक मार्गों को फिर से ट्रैकिंग के जरिए शुरू कर इनके पौराणिक महत्व को भी जीवत करने में जुटी है। इसके लिए उत्तराखंड के पर्यटन और तीर्थाटन को एक बार फिर नए सिरे से काम किया जा रहा है। जिसमें स्थानीय प्रशासन की सबसे अहम भूमिका रहेगी।
पहल पौड़ी के डीएम डॉ आशीष चौहान ने उठाई
इसके लिए सबसे पहले पहल पौड़ी के डीएम डॉ आशीष चौहान ने उठाई है। पौराणिक मार्ग पर ऋषिकेश से देवप्रयाग के बीच पहले चरण में 16 किमी का सुधारीकरण होगा। ये गंगा पदयात्रा के नाम से जाना जाएगा जिसमें 6 फीट चौड़ा पदयात्रा मार्ग तैयार किया जाएगा। ऋषिकेश से देवप्रयाग तक की सड़क मार्ग से दूरी 73.4 है। लेकिन इस पदयात्रा से 67.6 किमी पैदल ट्रैक होगा।
गंगा पद यात्रा का रुट
गंगा पद यात्रा का रुट ऋषिकेश से लक्ष्मणझूला, गरुड़चट्टी, फूल चट्टी, मोहन चट्टी, बिजनी, नौंठखाल, बंदर चट्टी, महादेव चट्टी, सिमालू, नांद गांव, व्यासचट्टी, उमरासू सौड़ से देवप्रयाग पहुंचेगी। इसके बाद गंगा आरती में शामिल होंगे। इस ट्रैकिंग की सबसे खास बात ये है कि इस पूरे ट्रैक पर गंगा के दर्शन होंगे। 1928 में ऋषिकेश से कीर्तिनगर तक मोटर मार्ग बनने से इस रुट पर पर्यटक कम ही नजर आते हैं। बताया जाता है कि स्वामी विवेकानंद ने दो बार इस रुट पर पदयात्रा की थी।












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