उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022: हरीश रावत और भगत सिंह कोश्यारी के बीच हो सकता है सीधा मुकाबला, कैसे जानिए
बीजेपी के अंदरखाने भगत सिंह कोश्यारी के सक्रिय राजनीति में आने की चर्चाएं
देहरादून, 8 सितंबर। उत्तराखंड विधानसभा चुनावों से पहले सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस में उठापटक शुरू हो गई है। चुनाव आते ही दलबदल के अलावा दिग्गज नेताओं को अपने-अपने पाले में लाने के लिए प्रंपच आजमाए जाने लगे हैं। कांग्रेस की और से पूर्व सीएम हरीश रावत फ्रंटफुट पर बैटिंग करते नजर आ रहे हैं तो बीजेपी फिलहाल केन्द्रीय नेतृत्व के इशारे पर ही चुनावी निर्णय ले रही है। लेकिन बीजेपी के सूत्रों की मानें तो चुनाव से पहले उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर से भगत सिंह कोश्यारी बीजेपी के चुनाव अभियान की कमान संभाल सकते है। जिसकी चर्चांए तेज हो गई है। पार्टी के अंदर भी इस बात को स्वीकार किया जा रहा है, कि हरीश रावत को टक्कर देने के लिए भगत सिंह कोश्यारी को वापस सक्रिय राजनीति में आना चाहिए।

कोश्यारी का उत्तराखंड प्रेम नहीं हुआ कम
उत्तराखंड में 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले त्रिमूर्ति पूर्व सीएम बीसी खंडूडी, भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक का युग था। चुनाव जीतने के बाद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को बनाया गया। खंडूडी स्वास्थ्य कारणों से राजनीति से अलग हो गए। भगत सिंह कोश्यारी को पार्टी ने महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाकर सक्रिय राजनीति से दूर कर दिया। जबकि निशंक को केन्द्र में जिम्मेदारी देकर दिल्ली की राजनीति में भेज दिया। लेकिन इस बीच कोश्यारी का उत्तराखंड प्रेम कम नहीं हुआ। पूर्व सीएम तीरथ को हटाने के बाद जब पुष्कर सिंह धामी को कमान सौंपी गई तो पार्टी में बहस तेज हो गई कि कोश्यारी के आशीर्वाद से धामी को कुर्सी मिली है। धामी सीएम बनने के बाद अपने राजनैतिक गुरू भगत सिंह कोश्यारी का आशीर्वाद लेने दिल्ली भी गए। इसके बाद कोश्यारी को उत्तराखंड भी बुलाया गया। इस बीच कोश्यारी दो बार उत्तराखंड प्रवास पर आ चुके हैं। इससे कोश्यारी की सक्रियता भी खासी चर्चाओं में रही है।
प्रीतम के आने के बाद भी चर्चांए तेज
बुधवार को उत्तराखंड में दो राजनैतिक घटनाक्रम घटे जिसके बाद से भगत सिंह कोश्यारी को लेकर एक बार फिर से राजनैतिक गलियारों में चर्चाएं तेज है। पहली उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य का इस्तीफा देकर यूपी की सक्रिय राजनीति में आने के संकेत और दूसरा निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह का बीजेपी ज्वाइन करना। धनोल्टी से निर्दलीय विधायक प्रीतम पंवार ने दिल्ली में बीजेपी का दामन थाम लिया। प्रीतम भी भगत सिंह कोश्यारी के करीबी माने जाते हैं। लंबे समय से प्रीतम सिंह को बीजेपी में लाने के लिए कोश्यारी कोशिश में जुटे थे। जो कि बुधवार को चुनाव से पहले शामिल करा लिए गए। दोनों घटनाक्रम के बाद भगत सिंह कोश्यारी के भी राज्यपाल पद छोड़कर सक्रिय राजनीति में आने की चर्चाएं तेज हो गई है।
हरदा और भगतदा के बीच रोचक हो सकता है मुकाबला
सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस हर तरह के प्रयोग कर रही है। और इन प्रयोग के पीछे हरीश रावत प्लानिंग में जुटे हैं। हरीश रावत की प्लानिंग के आगे बीजेपी 2016-17 में पटखनी खा चुकी है। जब हरीश रावत के खिलाफ बागियों ने बगावत कर बीजेपी का दामन थामा था। अबकी बार बीजेपी किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती। लेकिन बीजेपी के पास युवा सीएम पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक चेहरे हैं। जो कि हरीश रावत के कद के आगे कम अनुभवी नजर आते हैं। साथ ही दोनों तराई क्षेत्र से भी है। भगत सिंह कोश्यारी भी धामी की धमक वापस लौटाने के लिए चुनावों में अपना अनुभव पार्टी को दे सकते हैं। ऐसे में बीजेपी के रणनीतिकार हरीश रावत के सामने भगत सिंह कोश्यारी को लाकर विधानसभा चुनाव को रोचक बना सकती है।












Click it and Unblock the Notifications