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Success story: पहाड़ में प्राकृतिक खेती के मिशन में रमेश मिनान का कमाल,आइडिया ऐसे की हर कोई हो जाए हैरान

Success story farmer news: उत्तरकाशी का सैंज गांव आज प्राकृतिक खेती के लिए दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहा है। यहां के किसान रमेश मिनान ने पांच साल में प्राकृतिक खेती के जरिए ऐसा उदाहरण पेश किया है जो कि पहाड़ों या विपरीत परिस्थितियों में खेती करने के लिए मिसाल बन गया है।

उत्तराखंड में रमेश मिनान किसान ने न केवल अपनी भूमि पर प्राकृतिक खेती को अपनाया है, बल्कि सैकड़ों अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। रमेश मिनान ने प्राकृतिक खेती के लिए बद्री गाय जो कि स्थानीय नस्ल की गाय है, के गोबर और गोमूत्र को ही आधार बनाया है। इन प्राकृतिक संसाधनों से वे तरल और सूखी खाद तैयार करते हैं, जिससे उनकी फसलें पूरी तरह से जैविक और रसायनमुक्त होती हैं।

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​हजारों किसानों को ट्रेनिंग
रमेश ने पहले खुद इसका प्रयोग किया उसके बाद लोगों को भी प्रेरणा दी। आज रमेश मिनान हजारों किसानों को इसकी ट्रेनिंग देकर प्राकृतिक खेती के लिए लोगों को अवेयर कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने जंगली जानवरों से निपटने को इस तरह की खेती पर फोकस किया, जिन्हें जानवर नुकसान नहीं पहुंचा सकते थे। उनका ये मंत्र भी काम कर गया और वे प्राकृतिक खेती में काफी आगे निकल गए।

दूसरों के लिए प्रेरणा
इसके बाद रमेश ने दूसरे लोगों को भी ट्रेनिंग देना शुरू किया जिससे दूसरों को भी इसका फायदा हो। आज रमेश मिनान उत्तराखंड ही नहीं देश भर में लोगों के लिए प्राकृतिक खेती में मिसाल बन गए हैं। कई शोध छात्र से लेकर उद्यान विभाग भी रमेश के काम को लेकर प्रेरित कर रहा है।

एक सोच ने बदल दी जिंदगी
रमेश मिनान ने बताया कि वे कोविड से पहले शहरों में कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में नौकरी कर अच्छा पैसा कमा रहे थे, लेकिन कोविड में नौकरी चली गई तो वह अपने गांव सैंज आ गए। एक ​दिन टीवी पर उन्होंने पद्म श्री डॉ सुभाष पालेकर का कार्यक्रम देखा जिसमें प्राकृतिक खेती के बार में विस्तार से बताया। उस समय उनके पास न तो संसाधन थे और नहीं इतने खेत, लेकिन समय बहुत था। जिसका सदुपयोग कर उन्होंने धीरे धीरे प्राकृतिक खेती पर काम शुरू किया। उस समय लोगों को प्राकृतिक खेती का ज्यादा ज्ञान भी नहीं था।

स्वरोजगार से हो रही कमाई
रमेश ने सबसे पहले बद्री गाय खरीदी और प्राकृतिक खेती का काम शुरू किया। धीरे धीरे उन्हें सफलता मिलने लगी। रमेश को जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक किसान श्री और किसान सम्मान से नवाजा जा चुका है। हर कोई उनकी सक्सेस स्टोरी के बारे में सुनना और पढ़ना चाह रहे हैं। वे आज स्वरोजगार और खेती में मेहनत के बल पर अच्छी खासी कमाई भी कर रहे हैं।

जंगली जानवरों से बचने का निकाला तोड
रमेश मिनान ने सबसे पहले ऐसे उत्पादों को बढ़ावा दिया जिन्हें जंगली जानवर नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं। इसके लिए उन्होंने खेतों में अखरोट अदरक, हल्दी और दालों पर फोकस किया। इसके साथ ही अपने गांव में सेब के पेड़ भी लगाए जो कि आज अच्छा परिणाम दे रहे हैं। रमेश ने गांव की बंजर जमीनों को भी उपजाउ बना दिया। जिससे उनकी आमदनी भी बढ़ती जा रही है।

ऐसे पूरी कर रहे डिमांड
अब रमेश मिनान इन चीजों को सोशल मीडिया के जरिए ही बाजार में बेच रहे हैं। इसके लिए उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल कर रहे हैं। जहां उन्हें प्रोडेक्ट की डिमांड भी आती है। रमेश मिनान बताते हैं कि जैविक खेती को बढ़ावा देने में सरकार की कुछ योजनाओं का भी लाभ उन्हें मिला है। रमेश मिनान ने कहा कि जब पहाड़ के लोग ही रसायन वाली खेती को बढ़ावा देंगे तो सबसे पहले खुद ही ​बीमार होंगे। ऐसे में आज के समय में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर पहाड़ से ही स्वस्थ होने की गंगा चला सकते हैं। जिससे लोगों को पौष्टिक और अच्छा खाना मिल सके। साथ ही लोगों का स्वास्थ भी बेहतर हो सके।

लागत कम,फायदे ज्यादा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ पंकज नौटियाल ने बताया कि आज के समय में पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिहाज से प्राकृतिक खेती सबसे उपयुक्त है। इससे एक तरफ पर्यावरण को बचाने में काफी सहयोग मिलेगा साथ ही कीटनाशक रसायन का इस्तेमाल न करके हम अपने स्वास्थ्य को भी बेहतर कर सकते हैं। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती में लागत भी कम आती है। पहाड़ में इसके प्रयोग आने वाले समय के लिए बेहतर होगा।

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