तो क्या भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के पास ही रहेगी कमान या फिर बदलाव तय
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को नहीं मिली कैबिनेट में जगह
देहरादून, 24 मार्च। उत्तराखंड में धामी सरकार का गठन हो चुका है। धामी मंत्रिमंडल में 8 चेहरे शामिल हुए हैं। इस बार मंत्रिमंडल में जिस चेहरे के न होने की सबसे ज्यादा चर्चा है उसमें प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। मंत्रिमंडल के गठन से पहले मदन कौशिक को धामी की टीम में शामिल करने का दावा किया जा रहा था, साथ ही प्रदेश संगठन में भी बड़े स्तर से फेरबदल की चर्चा होने लगी थी। लेकिन अब मदन कौशिक को धामी की टीम में शामिल न करने के बाद प्रदेश संगठन में फिलहाल परिवर्तन के आसार कम ही लग रहे हैं। हालांकि दूसरा खेमा प्रदेश अध्यक्ष के लिए गढ़वाल से नए चेहरे को शामिल करने का दावा कर रहे हैं।

5 बार के विधायक और भाजपा सरकार में अहम पदों पर रहे कौशिक
धामी सरकार-2 में देहरादून, पौड़ी, टिहरी, बागेश्वर, अल्मोड़ा और उधमसिंह नगर को प्रतिनिधित्व मिला है। लेकिन सबसे बड़ी हैरानी हरिद्वार और नैनीताल जिले को प्रतिनिधित्व न होने से सामने आ रही है। भाजपा की पहली सरकार से हरिद्वार जिले को दो कैबिनेट मिले पहले मदन कौशिक बाद में स्वामी यतीश्वरानंद को कैबिनेट में जगह मिल पाई थी। स्वामी यतीश्वरानंद चुनाव हार गए, लेकिन मदन कौशिक को भी इस बार जगह नहीं मिल पाई। मदन कौशिक 5 बार के विधायक हैं, और भाजपा सरकार में अहम पदों पर रहे हैं। त्रिवेंद्र सरकार में मदन कौशिक शहरी विकास और संसदीय कार्य मंत्री रह चुके हैं। इसके बाद चुनाव से पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी। उनके कद को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में जगह न मिलने के पीछे की सबसे बड़ी वजह इस बार हरिद्वार में चुनाव के दौरान खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। हरिद्वार में 2017 में भाजपा ने 11 में से 8 सीटें जीती थी। लेकिन इस बार 3 ही सीटें जीतकर आई हैं। इस वजह से भी हाईकमान मदन कौशिक से नाराज बताया जा रहा है। इसके अलावा मदन कौशिक पर लक्सर विधायक रहे संजय गुप्ता ने भितरघात का आरोप लगा चुके हैं। जिसके बाद से संगठन में बड़ा फेरबदल होने के संकेत मिल रहे थे।
प्रदेश अध्यक्ष के लिए गढ़वाल सीट से कई दावेदार
पार्टी स्तर पर प्रदेश अध्यक्ष के लिए गढ़वाल सीट से कई दावेदार भी सामने आ रहे हैं। पुष्कर सिंह धामी के सीएम बनने के बाद प्रदेश अध्यक्ष गढ़वाल से बनना तय माना जा रहा है। जिसमें धर्मपुर विधायक विनोद चमोली, बद्रीनाथ के पूर्व विधायक महेन्द्र भट्ट का नाम लिया जा रहा है। लेकिन अब मदन कौशिक को कैबिनेट में जगह न मिलने से ये माना जा रहा है कि कुछ समय के लिए कौशिक को प्रदेश अध्यक्ष से नहीं हटाया जाएगा। हालांकि जिस तरह भितरघात के आरोप और हरिद्वार की खराब परफोर्मेंस चुनाव में हुई है। ऐसे में पार्टी किसी दूसरे चेहरे को कमान सौंप सकती है। सरकार के गठन के बाद अब पार्टी चुनाव की समीक्षा भी करेगी। जिसमें एक बार फिर भितरघात के प्रकरण उठने तय हैं। भाजपा में चुनाव के बाद से ही आधा दर्जन से अधिक पूर्व विधायक हार से पहले ही संगठन को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं। जिसके बाद संगठन में फेरबदल की संभावनाएं बनी हुई हैं। लेकिन पार्टी ने जिस तरह अब तक मदन कौशिक को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है। उसको लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है।












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