Silkyara tunnel accident से 24 साल के पुष्कर को मिला दो बार नया जीवन, पहले रेस्क्यू अब ऑपरेशन से मिली संजीवनी
Silkyara tunnel accident उत्तराखंड के सिलक्यारा में हुआ टनल हादसा देश ही नहीं विदेश में भी सबसे बड़ा रेस्क्यू अभियान बन गया, जब 41 श्रमिक 17 दिन तक एक टनल में फंसे रहे। श्रमिकों को बचाने के लिए पूरे देश और विदेश के एक्सपर्ट् रात दिन एक कर श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब हुए। इस सुरंग के अंदर 17 दिन तक उत्तराखंड के पुष्कर को सुरंग के बाहर आने के बाद एक नहीं दो बार नया जीवन मिला है।

ये सुनकर शायद हर कोई हैरान होगा, कि आखिर ऐसे कैसे हो सकता है। लेकिन ये सच है। 24 साल के पुष्कर को जब एम्स ऋषिकेश में हेल्थ चेकअप के लिए लाया गया तो मेडिकल जांच में इस बात की जानकारी मिली कि उनके दिल में पहले से ही छेद था।
जिसका एम्स ऋषिकेश की टीम ने अब इलाज कर लिया है। इस तरह पुष्कर को फिर से नया जीवन मिल गया है। 24 साल का पुष्कर अपने परिवार के पालन पोषण के लिए रोजगार की तलाश में सिलक्यारा टनल में काम करने लगा। लेकिन उसे नहीं पता था कि ये हादसा उसको फिर से नया जीवन देगा। माना जा रहा है कि अगर ये हादसा न होता तो पुष्कर को इस बात की जानकारी न होती कि उसको दिल में जन्मजात बीमारी है।
उत्तरकाशी के सिलक्यारा में निर्माणाधीन टनल में दिवाली की सुबह 41 श्रमिक फंस गए। जिन्हें बाहर निकालने के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर सबसे बड़ा रेस्क्यू अभियान चलाया। इसके बाद 17 दिन तक अंदर जिदंगी की जंग लड़ रहे श्रमिकों को सुकुशल बाहर निकाल लिया गया।
इन 41 श्रमिकों में चम्पावत जिले का पुष्कर सिंह भी शामिल था। श्रमिकों को टनल से बाहर निकालने के बाद पहले चिन्यालीसौड़ अस्पताल में रखा गया। इसके बाद 29 नवम्बर को सभी श्रमिकों को रेस्क्यू कर जब एम्स ऋषिकेश पंहुचाया गया, जहां सबकी सघन जांच हुई।
इसी दौरान इको कार्डियोग्राफी करते समय मौके पर मौजूद कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅ. वरूण कुमार ने पाया कि पुष्कर के दिल में छेद है। यह समस्या जन्मजात रोग के रूप में थी। पुष्कर के दिल में छेद होने का पता चलने पर एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ओपन हार्ट सर्जरी करने का निर्णय लिया।
एक सप्ताह पूर्व उसकी सर्जरी कर दी गई। पुष्कर अब स्वस्थ है और शुक्रवार को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है। डाॅ. वरूण ने इस जानकारी को सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ सर्जन डाॅ. अंशुमान दरबारी को बताया। साथ ही संस्थान की निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने भी पुष्कर के स्वास्थ्य को लेकर गंभीरता से काम किया और अब पुष्कर के दिल की ओपन हार्ट सर्जरी पूर्ण तौर से सफल रही।
एम्स से मिली जानकारी के अनुसार जब सभी श्रमिकों को एम्स से डिस्चार्ज किया जा रहा था तो उस समय पुष्कर शारीरिक और मानसिक तौर से सर्जरी करवाने के लिए सक्षम नहीं था। इसलिए सर्जरी के लिए उसे दोबारा एम्स बुलाया गया। यह सर्जरी पिछले सप्ताह 28 दिसम्बर को की गई। अब वह स्वस्थ्य होकर घर लौट गया है।












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