Silkyara Tunnel: जहां टनल में 17 दिन तक 42 मजदूर फंसे रहे, वहां बन रहा बाबा बौखनाग का मंदिर, ये है मान्यता
उत्तरकाशी के सिलक्यारा में निर्माणाधीन टनल के बाहर बाबा बौखनाग देवता के मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है। नवंबर 2023 में सिलक्यारा टनल में भूस्खलन के कारण 42 मजदूर अंदर फंस गए थे।
जिनको सकुशल बाहर निकालने के लिए 17 दिन रेस्क्यू अभियान चला। रेस्क्यू अभियान में देश ही नहीं विदेश की बड़ी बड़ी संस्थाएं जुटी रहीं। जब कई दिनों तक किसी प्रकार की सफलता नहीं मिली तो स्थानीय लोगों ने बाबा बौखनाग का प्रकोप बताया।

इसके बाद सरकार से लेकर एक्सपर्ट्स भी बाबा बौखनाग की शरण में पहुंचे। साथ ही टनल के बाहर मंदिर बनाने का भी प्रस्ताव रखा। जिसके बाद रेस्क्यू आपरेशन के सफल होने पर मंदिर बनाने की घोषणा की गई। अब 6 माह बाद मंदिर का कार्य शुरू हुआ है। सिलक्यारा टनल के बाहर सिलक्यारा मोड़ की ओर से कंपनी ने मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया है।
उत्तरकाशी के नौगांव में बाबा बौख नाग का प्राचीन मंदिर है। जो कि पहाड़ों के बीच बना हुआ है। मान्यता है कि इस मंदिर तक नंगे पैर आकर दर्शन करने से हर इच्छा पूरी होती है। प्राचीन मान्यता के अनुसार विशेष तौर पर नवविवाहित जोड़ा और निसंतान कपल सच्चे मन से यहां पर आता है तो उनकी मनोकामना पूरी होती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां पर बाबा बौखनाग की उत्पत्ति नाग के रूप में हुई थी। यह नागराज मंदिर है। इनकी पूजा-अर्चना करके इलाके की रक्षक की कामना की जाती है। ये भी कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण टिहरी जिले में सेम-मुखेम से पहले यहां आए थे इसलिए हर साल सेम मुखेम और दूसरे साल बौख नाग में भव्य मेला आयोजन होता है।
बौखनाग की उत्पत्ति वासुकी नाग के रूप में हुई। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण टिहरी जनपद के सेम-मुखेम से पहले यहां पहुंचे थे, इसलिए एक वर्ष सेम मुखेम और दूसरे वर्ष बौखनाग में भव्य मेला आयोजित होता है। राडी कफनौल मोटर मार्ग के निकट 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित बौखनाग जाने के लिए चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।












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