रुड़की में दलित मर्डर को लेकर ऐसा क्या हुआ कि पुलिस को खदेड़ कर पथराव करने लगे लोग...? क्या है पूरा मामला
उत्तराखंड के रुड़की में 12 जून की शाम एक दलित व्यक्ति की कथित हत्या को लेकर स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई। उसके बाद इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 लगा दी गई है। स्थानीय लोगों ने पुलिस टीमों पर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
रुड़की के बेलरा गांव में एक दलित व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के बाद झड़प शुरू हो गई। उसके बाद से सोशल मीडिया पर ये सवाल उठ रहे हैं कि आखिर रुड़की में दलित मर्डर केस में ऐसा क्या हुआ कि लोग पुलिस पर ही भड़क गए।

सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए, जिसमें स्थानीय लोगों को सड़कों पर पुलिस का दौड़ाकर भगाते हुए और उनपर पथराव करते देखा गया।
पूरे मामले पर अजय सिंह (एसएसपी, हरिद्वार) ने कहा, ''दो पक्षों के बीच हुई विवाद में एक पक्ष के बेटे की मृत्यु हो गई है। मृतक के परिवार द्वारा हत्या की बात कही गई थी लेकिन जांच में पता चला कि ये सिर्फ ऐक्सीडेंट था।''
क्यों पुलिस पर गांव वालों ने किया पथराव?
अजय सिंह (एसएसपी, हरिद्वार) ने आगे कहा, ''हमने फिर भी कहा कि आप थाने में आकर तहरीर दें। लेकिन भीड़ में शामिल जो कुछ अराजक तत्व थे उनकी कोशिश कुछ बवाल करने की थी। हमारे टीम पर पथराव हुआ जिससे हमारे सब इंस्पेक्टर और कांस्टेबल घायल हो गए। यहां पर 144 लागू कर दिया गया है अभी यहां शांति है। दो से ढाई दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। षड्यंत्र द्वारा ये किया गया है।"
मृतक के परिजनों का आरोप है कि उसी गांव के कुछ लोगों ने उसकी पिटाई की और उसके ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाने का भी प्रयास किया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना से आक्रोशित मृतक के परिजन सोमवार (12 जून) की सुबह थाने पर जमा हो गए।
बाद में दिन में उन्होंने यातायात को बंद करने कोशिश करते हुए मृतक के शरीर को नेशनल हाइवे पर रख दिया। एसएसपी के निर्देश के बाद, जब पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की, तो स्थानीय लोगों ने उन पर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
घायल पुलिस अधिकारियों का फिलहाल सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि गंभीर रूप से घायलों को बड़े अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी धीरज सिंह गबरियाल और एसएसपी अजय सिंह भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में किया। ये मामला बढ़ गया क्योंकि ग्रामीणों ने पथराव जारी रखा, जवाबी कार्रवाई में पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले दागे गए।
'ऐसा लगता है कि गांव में शांति भंग करने की साजिश पहले से ही थी'
एसएसपी अजय सिंह ने कहा, ''दो पक्षों के बीच विवाद का मामला था। इसलिए हमने उन्हें आश्वासन दिया था कि आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी, लेकिन उन्होंने सुनने से इनकार कर दिया। ऐसा लगता है कि गांव में शांति भंग करने की साजिश पहले से ही थी, क्योंकि इलाके में गैर-स्थानीय पंजीकरण संख्या वाली कई मोटरसाइकिलें देखी गई थीं।''
उन्होंने कहा, ''अशांति पैदा करने में शामिल एक दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि अन्य की पहचान की जा रही है और उन्हें हिरासत में लिया गया है।''
इस बीच डीएम हरिद्वार धीरज सिंह गबरियाल ने कहा, ''कल ट्रैक्टर के नीचे कुचल कर एक युवक की मौत हो गई। इसके बाद परिजन धारा 302 के तहत मामला दर्ज करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बताया कि धारा के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। 302 में नहीं लेकिन उचित धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा। इससे नाराज होकर उन्होंने पुलिस पर पथराव किया।''












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