उत्तराखंड में कांग्रेस की हार पर जारी है रार, अब हरदा के करीबी रहे सीनियर नेता ने प्रदेश प्रभारी पर लगाए गंभीर

गोविंद सिंह कुंजवाल ने प्रदेश प्रभारी के खिलाफ खोला मोर्चा

देहरादून, 17 मार्च। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस के अंदर मचा सियासी तूफान थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। प्रीतम सिंह, हरीश रावत, रणजीत रावत के बाद अब अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह कुंजवाल ने हार के कारणों पर खुलकर अपनी बात रखी है। कुंजवाल ने प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव पर जबरदस्त हमला बोला है। साथ ही संगठन की कमजोर पर भी सवाल खड़े किए हैं।

 Rar continues over the defeat of Congress in Uttarakhand, now a senior leader govind singh kunjwal close to Harish rawat made serious allegations against the state in-charge

कुंजवाल ने कांग्रेस की हार के लिए प्रदेश संगठन और प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव को बनाया निशाना
प्रदेश में कांग्रेस की हार के बाद से सीनियर नेताओं ने अपने ही नेताओं और संगठन को लेकर मोर्चा खोला हुआ है। पहले प्रीतम सिंह, हरीश रावत और रणजीत रावत एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे। इसमें अब कांग्रेस के सीनियर नेता गोविंद सिंह कुंजवाल भी कूद गए। कुंजवाल हरीश रावत खेमे के सबसे सक्रिय और करीबी माने जाते हैं। ऐसे में कुंजवाल के बयान से एक बार फिर हंगामा होना तय है। गोविंद सिंह कुंजवाल ने कांग्रेस की हार के लिए प्रदेश संगठन पर ही पूरा दोष लगाया है। कुंजवाल का कहना है कि गणेश गोदियाल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी पूरा संगठन अपने तरीके से काम कर रहा था। कुंजवाल ने कहा कि संगठन पूराने लोगों के हिसाब से चलाया जा रहा था। इसके लिए कुंजवाल ने प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव को निशाना बनाया है। कुंजवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में पहले सीएम और फिर टिकटों को लेकर आपसी खींचतान चलती रही। जिस कारण पार्टी की हार हुई है। कुंजवाल ने अब संगठन को मजबूत करने की पैरवी की है।

कांग्रेस में न​हीं थम रही खेमेबाजी और बयानबाजी
कांग्रेस की प्रदेश में हुई हार को लेकर पहले ही चुनाव अभियान की कमान संभालने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत और फिर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हार की जिम्मेदारी ले चुके हैं। इसके बाद सोनिया गांधी के निर्देश पर गो​दियाल इस्तीफा सौंप चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस के अंदर अब भी खींचतान जारी है। अब प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह निशाने पर हैं। जिनकी जिम्मेदारी को लेकर भी दूसरा खेमा एक्टिव होकर इस्तीफे का दबाव बना रहे हैं। जिसका असर आने वाले दिनों में कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के चयन पर भी नजर आ सकता है। कुंजवाल के हार के कारणों को लेकर खुलकर बयानबाजी करना और प्रदेश प्रभारी पर सवाल खड़े करना हरीश रावत खेमे की प्रेशर पॉलिटिक्स मानी जा रही है। कांग्रेस के अंदर पहले भी प्रदेश प्रभारी के खिलाफ हरदा कैंप मोर्चा खोल चुका है। ऐसे में जब सोनिया गांधी ने प्रदेश अध्यक्ष से लेकर प्रदेश प्रभारियों के इस्तीफे मांगने शुरू कर दिए हैं तो इससे कांग्रेस में खुलकर खेमेबाजी भी शुरू हो गई है। कुंजवाल के इस बयान के बाद प्रीतम​ सिंह पर भी अब बड़ी जिम्मेदारी छोड़कर दूसरे नेताओं को मौका देने का दबाव बनाया जा सकता है। कांग्रेस के अंदर अब लड़ाई प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी है। जिसमें हरीश रावत और प्रीतम खेमा अपने-अपने दावेदारों को फिट करवाने में जुट गए हैं। इसके लिए भी दोनों खेमों के सीनियर नेता लॉबिंग में जुटे हुए हैं। जो कि होली के बाद अब चरम पर पहुंचनी तय है।

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