Uttrakhand news: सदन से लेकर सड़क तक प्रीतम ने दिखाई ताकत, हरीश रावत की बढ़ी मुश्किलें

पहली बार सदन में संंभाली नेता प्रतिपक्ष की जिम्‍मेदारी, दिखाई अपनी ताकत

देहरादून, 28 अगस्त। विधानसभा चुनाव से पहले हुए आयोजित मानसून सत्र में सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी कांग्रेस को अपने-अपने मुद्दे रखने का मौका मिला। लेकिन नेता सदन और नेता​ विपक्ष के रुप में भी बीजेपी और कांग्रेस के सामने खुद को साबित करने का चेलेंज खड़ा हुआ था। पहली बार नेता सदन के तौर पर सीएम पुष्कर सिंह धामी और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर प्रीतम सिंह को कमान मिली। जिसे दोनों नेताओं ने बखूबी निभाकर चुनावी साल में पार्टी के सामने खुद को साबित करने का भी काम किया है। बीजेपी के अंदर जहां धामी की धमक बढ़ गई है, वहीं कांग्रेस में प्रीतम सिंह की छवि भी सभी को एकजुट कर साथ चलने की बन गई है। प्रीतम सिंह की यह छवि आने वाले दिनों में कांग्रेस में खुद को सीएम प्रोजेक्ट करने में जुटे हरीश रावत के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

Pritam showed strength from house to road, Harish Rawats problems increased

सदन और सड़क में नजर आए आक्रामक
चुनावी साल में प्रीतम सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की जगह नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। नेता प्रतिपक्ष रहीं डॉ इंदिरा ह्रदयेश के निधन के बाद पार्टी ने प्रीतम सिंह को चुनावी साल में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। जिसमें प्रीतम सिंह ने खुद को साबित किया है। 5 दिन तक चले मानसून सत्र में पहली बार नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे प्रीतम सिंह ने सभी विधायकों को एकजुट कर साथ लेकर चलने में कामयाब हुए हैं। 10 विधायकों का नेतृत्व कर रहे प्रीतम सिंह ने सभी कांग्रेसी विधायकों के मुद्दे पर खुद को भी शामिल करते हुए खुद भी आक्रामक रुख अपनाया तो साथी विधायकों के क्षेत्र के मुद्दों पर जमकर विरोध भी किया। इसके साथ ही सभी साथियों के हक के लिए भी प्रीतम खड़े नजर आए। प्रीतम सिंह ने विधायकों के मुद्दे उठाने के साथ ही जनता के मुद्दों भ्रष्टाचार, शिक्षा,रोजगार,पुलिस ग्रेड पे मामला, किसानों की समस्या, राज्य आंदोलनकारियों के मसले जैसे सभी बिंदुओं पर सरकार का ध्यान खींचा। कांग्रेस के विधायकों ने सदन से लेकर सड़क तक हर मुद्दे पर सरकार को घेरने का काम किया। इसके लिए साइकिल और ट्रैक्टर से सदन तक पहुंचने जैसे तरीके भी प्रीतम सिंह ​के नेतृत्व में अपनाए। जो कि सरकार और ​जनता का ध्यान खींचने में सफल रहे।

हरीश और प्रीतम ही कांग्रेस में बड़े चेहरे
डॉ इंदिरा ह्रदयेश के निधन के बाद कांग्रेस में हरीश रावत और प्रीतम सिंह दो बड़े चेहरे हैं। चुनावी साल में सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस ने पूरा जोर ​लगाया है। इंदिरा के निधन के बाद कांग्रेस में सारे समीकरण बदल गए। जब सत्ता से बेदखल होने के बाद कांग्रेस उत्तराखंड में एक बार नए सिरे से उठने की कोशिश कर रही थी, तब प्रीतम सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कठिन जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रीतम विधायकों और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में काफी हद तक कामयाब रहे। इंदिरा के निधन के बाद अचानक समीकरण बदल गए नेता प्रतिपक्ष के लिए प्रीतम सिंह का नाम तय हुआ। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष से उनको हटना पड़ा। हरीश रावत खेमा सक्रिय हुआ और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल बन गए। लेकिन पार्टी के अंदर अंदरूनी कलह नजर आने लगी, इसके लिए पंजाब के फॉर्मूले को आधार बनाकर प्रीतम और हरीश रावत गुट के लोगों को शामिल कर 4 कार्यकारी अध्यक्ष बना दिए गए। हरीश रावत को चुनाव अभियान की कमान मिलते ही कांग्रेस में सीएम पद का चेहरा घोषित करने की मांग उठने लगी।

हरदा की राह कर सकते हैं मुश्किल
आम आदमी पार्टी के कर्नल अजय कोठियाल को सीएम पद का चेहरा घोषित करने के बाद कांग्रेस के अंदर एक बार फिर सीएम पद को लेकर मांग तेज हो गई।हरीश रावत ने खुद को सीएम प्रोजेक्ट करने के लिए भी दांव पेंच शुरू कर दिए। लेकिन जिस तरह से सदन से लेकर सड़क तक प्रीतम सिंह ने कांग्रेस को एकजुट करने का काम किया। इसके बाद उनकी दावेदारी भी मजबूत नजर आ रही है। प्रीतम सिंह के विधानसभा सत्र में दिखाई गई ताकत के बाद हरीश रावत के लिए आने वाले समय और चेलेंज लेकर आ सकता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+