चारधाम यात्रा की तैयारियां शुरू, पुरानी व्यवस्था बहाल, महाशिवरात्रि पर केदारनाथ के कपाट खोलने की तिथि होगी तय
उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन निरसन विधेयक निरस्त
देहरादून, 28 फरवरी। चारधाम देवस्थान प्रबंधन एक्ट निरस्त होने के कारण विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस बार पुरानी व्यवस्था के तहत ही संचालित होगी। सरकार ने शीतकालीन सत्र में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन निरसन विधेयक पारित कर इसे मंजूरी के लिए राजभवन भेजा था। जो कि राजभवन की मुहर लगने के साथ निरस्त हो गया है। सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। ऐसे में अब तीर्थ पुरोहितों के लिए राहत की खबर है। जो कि पुरानी व्यवस्था का ही संचालन करवाना चाह रहे थे।

उत्तराखंड में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ चार धाम हैं। इनमें केदारनाथ और बदरीनाथ में बदरी केदार मंदिर समिति व्यवस्था का संचालन करती आ रही है। जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री की अपनी मंदिर समितियां हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के कार्यकाल में 27 नवंबर 2019 को कैबिनेट ने उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन विधेयक को मंजूरी दी थी। नौ दिसंबर 2019 को यह विधेयक विधान सभा से पारित कराया गया। राजभवन से मंजूरी के बाद यह कानून बन गया था। जिसके बाद चारधाम की व्यवस्था देवस्थानम बोर्ड के हाथ में चली गई थी और बदरी केदार मंदिर समिति भी भंग कर दी गई थी। 25 फरवरी 2020 को इसकी अधिसूचना जारी कर बोर्ड का गठन किया गया। जिसमें मुख्यमंत्री को इसका अध्यक्ष और धर्मस्व व संस्कृति मंत्री को उपाध्यक्ष बनाया गया। तत्कालीन गढ़वाल मंडल आयुक्त रविनाथ रमन को बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद सौंपा गया था लेकिन तीर्थ पुरोहितों के भारी विरोध और लंबे आंदोलन के बाद धामी सरकार ने एक्ट को खत्म करने के लिए विधानसभा में विधेयक लाकर पुरानी व्यवस्था को दोबारा शुरू कर दिया।
बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री में पूर्व व्यवस्था बहाल
शीतकालीन सत्र में देवस्थानम प्रबंधन निरसन विधेयक प्रस्तुत कर इसे मंजूरी के लिए राजभवन भेजा था। जिसे राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद अब बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री में पूर्व व्यवस्था बहाल हो गई है। बदरी केदार मंदिर समिति में सरकार की ओर से पहले ही अजेंद्र अजय भट्ट को बीकेटीसी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही समिति के उपाध्यक्ष, सीईओ और 13 सदस्यों की नियुक्ति भी कर दी गई है। जिसमें किशोर पंवार (चमोली) को उपाध्यक्ष और आईएफएस बीडी सिंह को समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाया गया है। सदस्यों में आशुतोष डिमरी, श्रीनिवासन पोश्ती, कृपाराम सेमवाल, जयप्रकाश उनियाल, बीरेंद्र असवाल, नंदा देवी, रणजीत सिंह राणा, महेंद्र शर्मा, भाष्कर डिमरी, पुष्कर जोशी व राजपाल सिंह जड़धारी शामिल हैं। ऋषि प्रसाद सती व आचार्य रामानंद सरस्वती को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। सभी का कार्यकाल तीन वर्ष होगा।
महाशिवरात्रि पर तय होगी कपाट खुलने की तिथि
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर एक मार्च को केदारनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के छह महीनों को खोलने की तिथि तय की जाएगी। इसके लिए मंदिर समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पंचकेदारों की गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में महाशिवरात्रि पर्व पर केदारनाथ मंदिर के रावल भीमा शंकर लिंग, बदरी-केदार मंदिर समिति के वेदपाठी, आचार्य, हक-हकूकधारी एवं तीर्थपुरोहितों की मौजूदगी में केदारनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथि घोषणा करेंगे। इसके साथ ही केदारनाथ कपाट खुलने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।












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