उत्तराखंड में 22 मार्च को होगा नई सरकार का गठन, मोदी, शाह की लगेगी फाइनल मुहर, 5 चेहरों पर टिकी निगाहें
21 तक होगी तस्वीर साफ, दिल्ली से आएगा नाम
देहरादून, 19 मार्च। उत्तराखंड में भाजपा की नई सरकार का स्वरूप क्या होगा। इसके लिए संगठन स्तर पर तो होमवर्क पूरा हो गया है। लेकिन अब मोदी और शाह की फाइनल मुहर का इंतजार है। जो कि आज या कल में दिल्ली में लगनी तय मानी जा रही है। इधर सूत्रों का दावा है कि भाजपा विधानमंडल दल की बैठक अब 21 मार्च को होगी और 22 मार्च को नई सरकार का शपथ ग्रहण होना तय माना जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री कौन होगा इसका फैसला मोेदी और शाह की बैठक में ही साफ होगा।

मोदी और शाह की होगी फाइनल मुहर
प्रदेश में एक बार फिर प्रचंड बहुमत की सरकार आने के बाद भी भाजपा नई सरकार के गठन को लेकर पेशोपेश में है। जानकारों का दावा है कि नई सरकार के गठन को लेकर केन्द्रीय नेतृत्व 2024 को लेकर सभी समीकरणों को ध्यान में रखकर ही किसी निर्णय पर आना चाहती है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राय ही सबसे अहम मानी जा रही है। जो कि ऐसे युवा चेहरे पर दांव खेलना चाहते हैं जो कि लोकसभा चुनाव तक केन्द्र की योजनाओं का सही तरह से क्रियान्वयन कर सके। इसके साथ ही 5 साल तक सभी विधायकों को एकजुट कर सरकार चलाना भी सबसे बड़ी चुनौती होगी। अब तक दो बार भाजपा की सरकार रही और दोनों बार 3 बार सीएम बदलने पड़े। पहली बार चेहरे दो रहे लेकिन दूसरी बार 3 चेहरे आए। जिससे पार्टी को कई बार किरकिरी का भी सामना करना पड़ा।
धामी समेत 5 नाम रेस में
अब जिन नामों पर पार्टी विचार कर रही है, उनमें सबसे पहले कार्यवाहक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नाम ही रेस में सबसे आगे बताया जा रहा है। हालांकि धामी के लिए सीट कौन खाली करेगा, उपचुनाव की स्थिति में क्या होगा। इन सवालों के भी जबाव पार्टी हाईकमान तलाश कर रही है। दूसरा सबसे प्रमुख नाम है अनिल बलनूी, जो कि हमेशा संकटमोचक और केन्द्र, राज्य के बीच समन्वय स्थापित करने में सबसे आगे रहते हैं। गढ़वाल के ब्राह्रमण चेहरे के साथ ही बलूनी का ससुराल कुमांऊ से हैं। ऐसे में वे दोनों समीकरणों में फिट बैठ रहे है। लेकिन बलूनी अब तक कोई चुनाव जीतकर नहीं आए हैं। तीसरा विकल्प है केन्द्रीय रक्षा मंत्री अजय भट्ट। अजय भट्ट हमेशा हाईकमान की नजरों में संतुलित और व्यवहार कुशल नेता माने जाते रहे हैं। अजय भट्ट को निशंक की जगह केन्द्र में जगह मिलना और प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी का अनुभव भी उनके काम आ सकता है। हालांकि लोकसभा और विधानसभा के लिए पार्टी को उपचुनाव करवाना होगा।
गढ़वाल से सीएम बनाने पर भी विचार संभव
महिला और गढ़वाल ब्राह्रमण चेहरे के अलावा विधायकों में सबसे पहला नंबर ऋतु खंडूरी का ही रेस में आगे है। वे तेजतर्रार होने के साथ ही पूर्व सीएम बीसी खंडूरी की बेटी हैं। हालांकि ऋतु के भाई मनीष खंडूरी कांग्रेस के नेता और राहुल गांधी के काफी करीबी माने जाते हैं। विधायकों में हाईकमान की दूसरी पंसद धन सिंह रावत हैं। जो संगठन से लेकर सरकार के लिए सबसे अहम किरदार माने जाते हैं। धन सिंह की भी केन्द्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में गढ़वाल से धन सिंह के भी ठाकुर चेहरे के रूप में ताजपोशी की खबरें हैं। इधर भाजपा में गढ़वाल से ही इस बार मुख्यमंत्री बनने का मांग भी अंदरखाने उठ रही है। इसका कारण गढ़वाल में पार्टी का 87 परसेंट स्ट्राइक रेट बताया जा रहा है। भाजपा ने गढ़वाल में शानदार प्रदर्शन किया है।












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