Nanda Devi Rajjat yatra विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा को लेकर विवाद, महापंचायत का ऐलान, जानिए कब होगी
Nanda Devi Rajjat yatra विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा नंदा देवी राजजात को लेकर नया विवाद हो गया है। महापंचायत में मां नंदा की बड़ी जात कराने का निर्णय हुआ है। 23 जनवरी को वसंत पंचमी पर्व पर कुरुड़ में मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में बड़ी जात के शुभारंभ का मुहुर्त निकाला जाएगा।
बता दें कि श्रीनंदा देवी राजजात समिति ने इस साल यात्रा स्थगित करते हुए 2027 में कराने का फैसला लिया। इसके बाद कुरुड़ मंदिर समिति ने महापंचायत कर मां नंदा की बड़ी जात को 2026 में ही कराने का ऐलान कर दिया।

महापंचायत में तय हुआ कि आगामी 23 जनवरी को वसंत पंचमी पर्व पर कुरुड़ में मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में बड़ी जात के शुभारंभ का मुहुर्त निकाला जाएगा। इस बीच मां नंदा की जात को लेकर बहस शुरू हो गई है। नंदा की लोकजात प्रतिवर्ष आयोजित होती है, जबकि पंरपरा और आदिकाल से चली आ रही जात (यात्रा) को राजजात के नाम से जाना जाता है।
Nanda Devi Rajjat yatra
सिद्धपीठ कुरुड़ और नंदा राजजात समिति में एकराय न बनने के बाद इस बार नंदा की राजजात को बड़ी जात का नाम दे दिया गया है। बड़ी जात का नेतृत्व कुरुड़ मंदिर समिति कर रही है। इस जात में बधाण, दशोली, लाता, बंड क्षेत्र के हक-हकूकधारी शामिल हो रहे हैं।
Nanda Devi Rajjat Yatra Controversy
इससे पहले बीते कुछ दिन पहले श्रीनंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने चमोली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए बताया था कि हिमालयी क्षेत्र में यात्रा से जुड़े आवश्यक कार्य अब तक पूरे न होने और सुविधाओं के अधूरे रहने के कारण इस वर्ष राजजात का आयोजन संभव नहीं है। समिति का कहना था कि नंदा देवी राजजात का आयोजन वर्ष 2027 में किया जाएगा। 23 जनवरी को मनौती के दिन 2027 की घोषणा करने का निर्णय लिया गया था।
गौर हो कि इस यात्रा का भक्तों को 12 सालों से इंतजार रहता है। जिसे हिमालयी महाकुंभ के नाम से भी जाना जाता है। हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाली विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा नंदा देवी राजजात करीब 280 किलोमीटर लंबी यात्रा लगभग 20 दिनों तक चलती है, जिसे हिमालयी महाकुंभ के नाम से भी जाना जाता है। जिसकी अगुवाई चौसिंगा यानी चार सींग वाला खाडू करता है।
मान्यता है कि खाडू के जन्म के साथ ही राजजात का समय तय हो जाता है। यही खाडू यात्रा का अग्रदूत होता है, इसे मां नंदा का प्रतिनिधि माना जाता है। यह यात्रा चमोली के नौटी गांव से शुरू होकर होमकुंड तक जाती है। जो कि हिमालय की सबसे कठिन और पैदल यात्रा मानी जाती है। लेकिन इस यात्रा को लेकर दो पक्ष आमने सामने आ गए हैं।
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