OI EXCLUSIVE: विदेश छोड़ ​हरसिल में होम स्टे से पहाड़ी घर और अपनी नई पहचान बनाने में जुटी मीनाक्षी और स्तुति

Motivational & success story home stay harshil: करियर और रोजगार की बात हो तो युवाओं का टारगेट विदेश की नौकरी और लाखों का पैकेज पहला विकल्प होता है। जिसमें शहरों की लाइफ स्टाइल को भी पसंद किया जाता है। लेकिन समय के साथ अब युवाओं का क्रेज बदलता जा रहा है। विदेश में लाखों का पैकज छोड़कर यूथ पहाड़ों की तरफ आ रहे हैं।

इसमें सिर्फ पहाड़ी ही नहीं शहरों के युवा भी शामिल हैं। वन इंडिया ने पहाड़ों में होम स्टे चला रही यूपी के मेरठ की मीनाक्षी और देहरादून के स्तुति से बात की। जो कि हरसिल घाटी की खूबसूरत वादियों में पुराने ​घरों को सजाने और संवारने का काम कर रही हैं।

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पुराने घर को ​बनाया होम स्टे
खास बात ये है कि दोनों पढ़ी लिखी होने के साथ ही विदेश में लाखों की नौकरी छोड़कर इन पहाड़ों में अपनी अलग पहचान में जुटी है। दोनों हरसिल घाटी के धराली गांव में एक पुराने घर को होम स्टे के रूप में चला रही है। जिन्होंने पहाड़ी कल्चर और रहन सहन के साथ खुद को ढ़ालकर पर्यटकों के लिए एक नया डेस्टिनेशन तैयार किया है।

पुराने मिट्टी, पत्थर और लकड़ी के बने घर
हरसिल घाटी की खूबसूरत वादियों में धराली गांव के इस पुराने मिट्टी, पत्थर और लकड़ी के बने घर को नाम दिया है Apples & Gulaab - by Madogiri (@applesandgulaab)। होम स्टे सेब के बगीचों के बीच में एक जबरदस्त व्यू के साथ पर्यटकों को शांति और सुकून का एहसास कराता है।

मेरठ की मीनाक्षी कैसे पहुंची ह​रसिल
मूल रूप से मेरठ की रहने वाली मीनाक्षी हर्षिल घाटी के धराली गांव में होम स्टे को चला रही हैं। मिनाक्षी 2022 से धराली गांव में एक पहाड़ी पुराने घर को सजाने और संवारने में लगी हैं। उन्होंने बताया कि कोठी बनाल हाउस जो लकड़ी और पत्थर के बने हैं, उसे होम स्टे के रूप में अपनी पार्टनर स्तुति के साथ मिलकर चला रही हैं। स्तुति प्रोफेशनली एक आर्टिटेक्टर हैं। जो कि पहाड़ी शैली में बने मकानों में जान डालकर ऐसे पर्यटकों के लिए तैयार कर रही हैं जो कि इस तरह शुकून और पहाड़ों के बीच समय बिताना चाहते हैं।

पहाड़ों और पहाड़ी घरों को ही बनाया दोस्त
मीनाक्षी का कहना है कि आज पहाड़ों में यूथ पलायन कर रहे हैं। लेकिन होम स्टे के जरिए वह रिवर्स पलायन को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह पैसों के पीछे भागना पसंद नहीं करती हैं। हालांकि फैमिली मेंबर पूछते हैं कि इनता पढ़ लिखकर क्या काम चुना। लेकिन उन्हें यहां सुकून मिल रहा है। पैसा कम है लेकिन संतुष्टि मिल रही हैं और अब इन पहाड़ों और पहाड़ी घरों को ही अपना दोस्त बना लिया है।

कहां जाएं घूमने
उन्होंने कहा कि यूथ को गांव और संस्कृति को नहींं छोड़ना चाहिए। हमें मिलकर पुरानी धरोहर और संस्कृति को बचाना है। मीनाक्षी ने बताया कि वह यहां आने वाले टूरिस्ट को वाइब्रेंट विलेज के 8 गांवों, सातताल, कल्पकेदार मंदिर, मुखबा गांव, हर्षिल, बगोरी गांव में वॉक के साथ पुराने घर और बहुत सारी संस्कृति से परिचय कराती हैं।

पीएम मोदी के आने के बाद बदला माहौल
उन्होंने बताया कि पीएम मोदी के आने के बाद भारत चीन बॉर्डर सीमा पर बसे जादुंग गांव भी लोग जा रहे हैं जो कि यहां से बहुत पास है। मीनाक्षी का कहना है कि होम स्टे में आने और इस जगह को एक्सप्लोर करने के लिए पर्यटकों को कम से कम तीन दिन चाहिए। होम स्टे कान्सेप्ट उन्हें और पर्यटकों को भी काफी पसंद आ रहा है। जहां घर वाली फीलिंग और जो कि पुराने घरों में लोग कैसे रहते थे ये एक्सपीरियंस दे पाते हैं।

अमेरिका से लौटी, हरसिल पहुंची
मीनाक्षी ने बताया कि वह आईटी टेलीकॉम कंपनी में जॉब करती थी, इसके बाद जॉब के लिए अमेरिका गई। कोविडकाल में वापस लौटना पड़ा और फिर पहाड़ पर काम करने का प्लान बनाया। इस बीच उनकी मुलाकात देहरादून की स्तुति पंवार से हुई। जिसने कोटी कनाल घर में होम स्टे के बारे में बताया। फिर वह हर्षिल घाटी आई दोनों को ये कॉन्सेप्ट पसंद आया।

कैसे पहुंचे, कितना आएगा खर्चा
उन्होंने बताया कि यहां आने के लिए हर्षिल से दो किमी और एक किमी पैदल वॉक करते हुए आ सकते हैं। मिट्टी पत्थर और लकड़ी के घर बने हैं, जनवरी में हीटर की आवश्यकता नहीं है। स्तुति ने मड प्लास्टर बनाकर घर को तैयार किया। यहां एक रात रूकने का 1500 रूपए प्रति व्यक्ति चार्ज किया जाता है। जिसमें एक टाइम नाश्ता या खाना भी ​दिया जाता है। मीनाक्षी बताती हैं कि विदेश में वह लाखों में कमाती थी। यहां आने के बाद लाइफ स्टाइल बदल गई। कमाई अच्छा नहीं है लेकिन शांतिपूर्ण माहौल सेब के बगीचों के बीच गंगा का व्यू है। उन्होंने कहा कि लाखों की कमाई तो नहीं है, लेकिन आराम से जिदंगी काट सकती हैं।

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