56 माह बाद कुर्सी पर बैठे मेयर, सीएम धामी ने बैठाया तो भावुक हुए, इस वजह से साढ़े चार साल बनाई दूरी
उत्तराखंड के रुद्रपुर नगर निगम के मेयर ने चुनाव से पहले किया वादा पूरा करने के लिए प्रण लिया और अब अपना वादा पूरा करने के बाद ही कुर्सी संभाली। रुद्रपुर के मेयर रामपाल सिंह चुनाव जीतने के 56 माह बाद कुर्सी पर बैठे।
सत्ता में कहते हैं कि सब कुर्सी का खेल है और जिस कुर्सी को पाने के लिए चुनाव में राजनेता सबकुछ दांव पर लगा दे और जितने के बाद उसी कुर्सी से दूरी बना ले तो इस बात पर शायद किसी को विश्वास न हो। लेकिन उत्तराखंड के रुद्रपुर नगर निगम के मेयर ने चुनाव से पहले किया वादा पूरा करने के लिए ये प्रण लिया और अब अपना वादा पूरा करने के बाद ही कुर्सी संभाली।

सत्ताधारी भाजपा के टिकट पर मेयर चुनकर आए रुद्रपुर नगर निगम के मेयर रामपाल सिंह चुनाव जीतने के 56 माह बाद मेयर की कुर्सी पर बैठे। इस दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी, रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट और विधायक शिव अरोरा मौजूद रहे। सीएम धामी ने रुद्रपुर के नगर निगम में मेयर को कुर्सी पर बैठाया। जैसे ही मेयर कुर्सी पर बैठे तो भावुक हो गए। मेयर ने नजूल का मामला हल होने तक कुर्सी में नहीं बैठने का प्रण लिया था। अब नजूल भूमि का मामला हल हुआ तो वह कुर्सी पर बैठे।
2018 में निकाय चुनाव में रुद्रपुर में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर मेयर रामपाल ने नजूल पर मालिकाना हक दिलाने सहित कई वादे जनता से किए थे। उन्होंने घोषणा की थी कि यदि जनता उन पर भरोसा करेगी तो वह वादे पूरे करेंगे, नजूल पर मालिकाना हक लोगों को मिलने से पहले कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने मेयर कक्ष में लगी कुर्सी पर घोषणापत्र रखा और उसके बगल में दूसरी कुर्सी लगाकर साढ़े चार साल तक कार्य करते रहे। इस दौरान सरकार नजूल नीति लाई लेकिन नीति में कई खामियों की वजह से एक भी भवन स्वामी नीति का फायदा नहीं ले सका। मेयर और स्थानीय लोग नजूल भूमि फ्रीहोल्ड कराने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे। इसके बाद धामी सरकार ने संशोधित कर नजूल नीति को लागू कर दिया। मेयर ने सीएम पुष्कर सिंह धामी के आने का इंतजार किया और सीएम के सामने ही मेयर की कुर्सी पर बैठे।












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