जोशीमठ ही नहीं उत्तराखंड के इन इलाकों में भी हो रहा भू धंसाव, किसी आपदा ही आहट तो नहीं ?

बद्रीनाथ हाईवे पर ही कर्णप्रयाग में भू धंसाव की सोशल मीडिया में तस्वीरें वायरल होने से लोग दहशत में आ गए हैं। इस बीच उत्तरकाशी जिले के मस्ताड़ी गांव का मामला भी गरमा गया है। जो कि 31 वर्षों से भू-धंसाव की चपेट में है।

Landslide not only in Joshimath but also in karnaprayag uttarkashi areas sign of disaster

उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ नगर पालिका क्षेत्र में 500 से ज्यादा घरों और जगहों पर दरारें आने के बाद अब पहाड़ों में जगह-जगह भू धंसाव की जानकारी मिलते ही लोग दहशत में आ रहे हैं। ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि केदारनाथ जैसी प्रलय और आपदा का कई बार दंश झेल चुके उत्तराखंड राज्य में एक बार फिर आपदा की आहट सुनाई दे रही है। इस बीच बद्रीनाथ हाईवे पर ही कर्णप्रयाग में भू धंसाव की सोशल मीडिया में तस्वीरें वायरल होने से लोग दहशत में आ गए हैं। इस बीच उत्तरकाशी जिले के मस्ताड़ी गांव का मामला भी गरमा गया है। जो कि 31 वर्षों से भू-धंसाव की चपेट में है।

कर्णप्रयाग में 50 से अधिक परिवार भी दहशत में
जोशीमठ में भू-धंसाव की घटना सामने आने के बाद कर्णप्रयाग में 50 से अधिक परिवार भी दहशत में हैं। कर्णप्रयाग के बहुगुणानगर, सीएमपी बैंड और सब्जी मंडी के ऊपरी भाग के मकानों में दरारें डराने लगी है। बरसात के दौरान तेजी से भू-धंसाव हुआ था लेकिन अभी तक ट्रीटमेंट नहीं हुआ है। कई लोग अपने मकान छोड़ चुके हैं। जबकि अधिकांश परिवार खौफ के साये में टूटे मकानों में ही रहने के लिए मजबूर हैं। कर्णप्रयाग में 12 साल पहले सब्जी मंडी बनने के बाद भू-धंसाव होने के बाद दरारें आईं शुरू हुईं। इसके बाद कटिंग ने भी हालात और ज्यादा बिगाड़ दिए। पिछले साल जुलाई और अगस्त में वहां भू-धंसाव में तेजी आई जो अभी भी जारी है। हालत यह है कि लोगों के मकानों और आंगन में दरारें पड़ी हैं। जिनका ट्रीटमेंट नहीं हो सका है।

उत्तरकाशी जिले का मस्ताड़ी गांव 31 वर्षों से भू-धंसाव की चपेट में

उत्तरकाशी जिले का मस्ताड़ी गांव 31 वर्षों से भू-धंसाव की चपेट में है। घरों में दरारें और रास्ते व खेत लगातार धंस रहे हैं। ग्रामीण लंबे समय से विस्थापन की मांग कर रहे हैं लेकिन अभी तक विस्थापन नहीं हो पाया है। उत्तरकाशी जिले मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर दूर है मस्ताड़ी गांव। जहां वर्ष 1991 में आए भूकंप के बाद से भू-धंसाव शुरू हो गया था। भूकंप में गांव के लगभग सभी मकान ध्वस्त हो गए थे। 1997 में प्रशासन ने गांव का भूगर्भीय सर्वेक्षण भी कराया था। भूवैज्ञानिक ने गांव में तत्काल सुरक्षात्मक कार्य का सुझाव दिया था लेकिन 31 साल बाद भी गांव का विस्थापन नहीं हो पाया है और न ही सुरक्षात्मक कार्य हुए हैं।

बद्रीनाथ मंदिर के सिंह द्वार पर दरार पड़ने की खबरों से भी हड़कंप मच चुका

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    बता दें कि विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम मंदिर के सिंह द्वार पर दरार पड़ने की खबरों से भी हड़कंप मच चुका है। जिसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सर्वे भी किया। बीते अक्टूबर में बताया गया कि एएसआई की ओर से विशेष प्रकार के ग्लास टाइल्स लगा कर दरारों की निगरानी की जाएगी। इसके अलावा द्वार के बीच में पानी की रिसाव के कारणों का पता लगाया जाएगा। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) एएसआई के (संरक्षण व वर्ल्ड हेरिटेज) के साथ बैठक कर बदरीनाथ मंदिर के सिंहद्वार में पड़ी दरारों को लेकर विस्तृत चर्चा कर चुकी है। इस दौरान बताया गया कि हल्की दरारों को मोर्टार से भरा गया है। विशेष प्रकार के ग्लास टाइल्स को निगरानी के लिए दरार पर रखा गया है। यह टाइल्स दीवार में किसी प्रकार का हल्का मूवमेंट होने पर चटक जाएंगी। सिंहद्वार के केंद्रीय भाग के पानी रिसाव का भी आंकलन किया जा रहा है। इसके साथ ही नींव से पानी के रिसाव की प्रणाली को समझने का भी प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मंदिर के सिंहद्वार के जीर्णोद्वार को लेकर भी कई सुझाव दिए।

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