Joshimath sinking: जोशीमठ में जनआक्रोश, सड़कों पर उतर कर प्रभावित और स्थानीय लोग इस बात का कर रहे विरोध
जोशीमठ में प्रभावित और स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं। एनटीपीसी के साथ अब हेलंग बाईपास का विरोध शुरु हो गया है। इसको लेकर जन आक्रोश रैली भी निकाली गई है।

जोशीमठ में भू धंसाव और दरारों के बीच अब दो नए विवाद खड़े हो गए हैं। जिसको लेकर प्रभावित और स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं। एनटीपीसी के साथ अब हेलंग बाईपास का विरोध शुरु हो गया है। इसको लेकर जन आक्रोश रैली भी निकाली गई है।
जन आक्रोश रैली और प्रदर्शन
जोशीमठ संघर्ष समिति के बैनर तले जोशीमठ में लोगों का आंदोलन तेज हो गया है। आंदोलनकारियों ने एनटीपीसी और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया। भू-धंसाव से प्रभावित और आसपास के गांवों के लोगों समेत व्यापारियों ने हेलंग-मारवाड़ी बाइपास व एनटीपीसी परियोजना के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन किया। उन्होंने जन आक्रोश रैली निकाली और प्रदर्शन किया। लोगों ने एनटीपीसी वापस जाओ, बाईपास निर्माण बंद करो, प्रभावितों को उचित मुआवजा दो... के नारे लगाए। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने कहा कि जोशीमठ की बरबादी के लिए एनटीपीसी की तपोवन विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना जिम्मेदार है। इसको लेकर सभी एकमत हैं। इसे तुरंत बंद करके कंपनी को वापस भेज देना चाहिए। साथ ही मांग की कि एनटीपीसी ने जितना खर्च किया है, उसके दो गुना खर्च करके कंपनी को लोगों का पुनर्वास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 27 दिनों से प्रभावित परिवारों के लोग धरना दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष सरकारों के लिए भविष्य में सही दिशा में त्वरित गति से कार्यवाही के लिए भी दबाब बनाएगी।
बाईपास को सरकार के पास बद्रीनाथ यात्रा का विकल्प मार्ग
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बता दें कि सरकार बद्रीनाथ धाम के लिए विकल्प रास्ते पर काम कर रही है। जिसके लिए जोशीमठ नगर के नीचे निर्माणाधीन हेलंग-मारवाड़ी बाईपास को सरकार के पास बद्रीनाथ यात्रा का विकल्प मार्ग माना जा रहा है। जिस पर जल्दी से निर्माण शीघ्र शुरू हो सकता है। शासन ने इसकी कसरत शुरू कर दी है। जोशीमठ में वाहनों का दबाव कम करने और सेना की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 6.50 किमी हेलंग-मारवाड़ी बाईपास का निर्माण करीब 190 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। लेकिन जोशीमठ में भू-धंवाव की स्थितियां पैदा होने के बाद नगर पालिका क्षेत्र के निर्माणों के साथ ही बाईपास के निर्माण पर 5 जनवरी से रोक लगा दी थी। लोगों को आशंका है कि इस बाईपास के बनने से भी धंसाव की समस्या और बढ़ सकती है। हालांकि सरकार इससे इनकार कर चुकी है। स्थानीय लोग जोशीमठ के बीच से ही बद्रीनाथ का रास्ता निकालना चाहते हैं। जिससे शहर का महत्व भी कायम रहे और लोगों की आजीविका चलते रहे।
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