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Joshimath Sinking: जोशीमठ ही नहीं, उत्तराखंड में इन 7 जगहों पर भी डरा रहीं घरों की दरारें

उत्तराखंड़ के कई जिलों के कई शहर भू-धंसाव की चपेट में हैं। इनमें जोशीमठ, पौड़ी, बागेश्वर, उत्तरकाशी,चंबा, मसूरी, टिहरी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग शामिल हैं।

Joshimath Sinking Landslides are also happening in Bageshwar, Uttarkashi, Chamba Uttarakhand

Joshimath Sinking, उत्तराखंड के जोशीमठ में घरों में आई दरारों और भू-धंसाव ने हजारों लोगों को पलायन करने पर मजबूर कर दिया है। 500 से ज्यादा घरों की दीवारों में दरारें पड़ गईं हैं। प्रशासन ऐसे घरों से लोगों को निकालने की कोशिश कर रहा है। वहीं मंगलवार को प्रशासन ने कुछ इमारतों को गिराया भी है। जिसका स्थानीय लोग जमकर विरोध कर रहे हैं। उत्तराखंड में जोशीमठ ही नहीं कई अन्य जिलों में भू-धंसाव की घटनाएं सामने आ रही हैं।

इन आठ जगहों पर है बड़ा खतरा

इन आठ जगहों पर है बड़ा खतरा

उत्तराखंड़ के कई जिलों के कई शहर भू-धंसाव की चपेट में हैं। इनमें जोशीमठ, पौड़ी, बागेश्वर, उत्तरकाशी,चंबा, मसूरी, टिहरी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग शामिल हैं। जोशीमठ के बाद अब चमोली के कर्णप्रयाग के बहुगुणा नगर में मौजूद करीब 50 करीब घरों में दरार पड़ने लगी हैं। इसके अलावा उत्तरकाशी के मस्तदी और भटवाड़ी गांव खतरे के निशान में हैं।

जोशीमठ

जोशीमठ

जोशीमठ में जहां प्रशासन ने अभी तक 82 परिवारों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कुल 678 इमारतों को असुरक्षित चिह्नित किया गया है। कई विशेषज्ञ जोशीमठ हो रही इन घटनाओं पर अध्ययन कर रहे हैं। स्थानीय लोग भू-धंसाव के लिए सरकारी परियोजनाओं को दोष दे रहे हैं। स्थानीय लोग घरों और होटलों के बढ़ते बोझ और तपोवन विष्णुगढ़ एनटीपीसी पनबिजली परियोजना के इसके लिए जिम्मेदार मान रहे हैं।

पौड़ी

पौड़ी

पौड़ी में भी कई घरों और इमारतों में दरारों की घटनाएं सामने आई हैं। यहां पर स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे प्रोजेक्ट की वजह से उनके घरों में दरारें आ गई हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के सुरंग निर्माण कार्य से श्रीनगर के हेदल मोहल्ला, आशीष विहार और नर्सरी रोड सहित अन्य घरों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। लोग सरकार से ब्लास्टिंग की जगह हाथों से काम कराने की मांग कर रहे हैं।

उत्तरकाशी

उत्तरकाशी

उत्तरकाशी जिले का भटवाड़ी कस्बा भी भूस्खलन की जद में है। यहां भी 150 से अधिक भवन और होटलों में दरारें आ चुकी हैं। इसके चलते ग्रामीण न केवल भूधंसाव को लेकर खौफ में हैं। इसके अलावा यमुनोत्री नेशनल हाइवे के ठीक ऊपर बसा बाडिया गांव 35 से ज्यादा मकान और खेतों में मोटी-मोटी दरारें आसानी से देखी जा सकती हैं। डर से किसानों ने दरार पड़े खेतों से खेती करनी छोड़ दी है। यहां 2010 से ये हालात बने हुए हैं। 2013 में करीब 35 मकान भू धसाव से मकानों में दरारें आनी शुरू हो गई। बारिश यहां के लोगों के लिए एक भयावह सपना जैसी होती है।

टिहरी गढ़वाल

टिहरी गढ़वाल

टिहरी जिले के व्यासी और अटाली के ग्रामीणों में दहशत है। दरअसल, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन निर्माण के कारण व्यासी और अटाली गांव में भी खेतों और मकानों में दरारें पड़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रेल विकास निगम और प्रशासन इस मामले में लापरवाही बरत रहा है। अगर यही हाल रहा तो इन दोनों गांवों में भी जोशीमठ जैसे हालात पैदा हो जाएंगे। पिछले महीने अटाली गांव का पेयजल स्रोत भी अचानक सूख गया था। इसके चलते गांव में पेयजल संकट पैदा हो गया है। वहीं कुछ मकानों और खेतों में भी बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने से ग्रामीण चिंतित हैं। इसके अलावा गूलर, कौडियाला,मलेथा, मस्तदी और भटवाड़ी गांव भी खतरे के निशान में हैं।

रुद्रप्रयाग

रुद्रप्रयाग

रुद्रप्रयाग जिले के मरोड़ा गांव में पिछले कुछ माह से लगातार भूस्खलन हो रहा है। कई घरों में दरारें पड़ी हुई हैं। ग्रामीणों ने इसके लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन निर्माण को जिम्मेदार माना है। गांव के नीचे टनल निर्माण से कई घर में दरार पड़ गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि टनल निर्माण के चलते मरोड़ा गांव के घरों में मोटी-मोटी दरारें पड़ गई हैं। कई घर रहने लायक नहीं हैं। कहा कि वर्ष 2021 से गांव में भूस्खलन का सिलसिला जारी है।

चंबा

चंबा

चंबा में विकास कामों के चलते कई घरों में दरारें देखने को मिल रही हैं। जिला चंबा के होली क्षेत्र के तहत आने वाले झड़ौता गांव के 30 परिवारों पर संकट मंडरा रहा है। निजी जलविद्युत परियोजना के टनल में रिसाव से झड़ौता गांव के निचली तरफ करीब 100 मीटर की दूरी पर जमीन में दरारें आ गई हैं। 2021 में दिसंबर महीने से गांव झड़ौता में लगातार रिसाव का क्रम जारी है। वर्ष 2021 में इसी गांव में स्थित छह मकान जमींदोज हो चुके हैं। कई घरों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। गांव से ठीक नीचे 100 मीटर की दूरी पर दरारें आ चुकी हैं।

बागेश्वर

बागेश्वर

बागेश्वर के कपकोट के खरबगड़ गांव पर खतरा मंडरा रहा है। इस गांव के ठीक ऊपर जलविद्युत परियोजना की सुरंग के ऊपर पहाड़ी में गड्ढे बना दिए गए हैं और जगह-जगह से पानी का रिसाव हो रहा है। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कपकोट में भी भूस्खलन की खबरें आई हैं। इस गांव में करीब 60 परिवार रहते हैं। स्थानीय निवासी ने बताया कि, टनल से पानी टपकने की समस्या लंबे समय से है, लेकिन सुरंग जैसा गड्ढा कुछ समय पहले से बनना शुरू हो गया है। खरबाद गांव के ऊपर एक सुरंग है और नीचे रेवती नदी बहती है। इसके अलावा सोराग गांव में जमीन में कई स्थानों पर भारी दरार पड़ गई है।

मसूरी

मसूरी

मसूरी के लंढौर क्षेत्र में कुछ समय से लोगों के घरों व दुकानों में दरारें आ रखी हैं। जोशीमठ के भू-धंसाव के चलते यहां लोगों में भी दहशत का माहौल है। मसूरी का लंढौर बाजार लंढौर चौक से आगे व कोहिनूर बिल्डिंग तक कुचसाल से धंस रहा है। यहां पर जैन मंदिर की टाइलें भी टूटने लगी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंढौर बाजार करीब तीन दशक से धीरे-धीरे धंस रहा है।

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