जोशीमठ में भू-धंसाव: स्थानीय लोग परेशान, जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने सरकार पर लगाए उपेक्षा के गंभीर आरोप
उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में भू धंसाव की समस्या से स्थानीय लोग परेशान है। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने धामी सरकार पर उपेक्षापूर्ण बर्ताव करने का आरोप लगाया है।

उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में भू धंसाव की समस्या से स्थानीय लोग परेशान है। अब स्थानीय लोगों ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया है। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने धामी सरकार पर उपेक्षापूर्ण बर्ताव करने का आरोप लगाया है।
559 मकानों, भूखंड़ों में गहरी, आंशिक दरारें, दर्ज
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20 हजार से भी ज्यादा आबादी वाले जोशीमठ शहर में करीब 2 हजार से ज्यादा लोग इस भू धूसांव से प्रभावित हो रहे हैं। नगर पालिका जोशीमठ नगर में भूधंसाव व दारारों को लेकर सर्वे कराया गया जिसमें सर्वे में 559 मकानों, भूखंड़ों में गहरी, आंशिक दरारें, दर्ज की गई है। स्थानीय लोगों ने सरकार से पौराणिक शहर को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की मांग तेज कर दी है। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती का कहना है कि जोशीमठ में पिछले एक साल से अधिक से भूस्खलन भू धंसाव की घटना हो रही है जिससे जोशीमठ के सैकड़ों घरों में दरारें आ गयी हैं। जोशीमठ के सैकड़ों घर, असपताल सेना के भवन, मंदिर, सड़कें, प्रतिदिन धंसाव की जद में हैं और यह हर दिन बढ़ रहा है। 20 से 25 हजार की आबादी वाला नगर अनियंत्रित अदूरदर्शी विकास की भेंट चढ़ रहा है । एक तरफ तपोवन विष्णुगाड परियोजना की एनटीपीसी की सुरंग ने जमीन को भीतर से खोखला कर दिया है दूसरी तरफ बायपास सड़क जोशीमठ की जड़ पर खुदाई करके पूरे शहर को नीचे से हिला रही है। जोशीमठ के स्थानीय प्रशासन ने एक साल में तमाम बार लिखने कहने के बावजूद घरों का सर्वे नहीं किया । दिसम्बर प्रथम सप्ताह में बहुत जोर डालने पर नगर पालिका को प्रभावितों की गिनती करने को कहा गया। माना जा सकता है कि आपदा आने पर मरने वालों की गिनती करने के निर्देश दिए । नगर पालिका ने आदेश के क्रम में लगभग 3000 लोगों को चिन्हित किया जो आपदा आने पर प्रभावित होंगे। 24 दिसम्बर को सरकार के इसी उपेक्षा एवं संवेदनहीन रवैय्ये के खिलाफ हजारों की संख्या में जनता सड़कों पर उतरी ।लोगों ने तत्काल पुनर्वास की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।लोग इस सर्दी के मौसम में दरारों से पटे घरों में बल्लियों के सहारे घर टिकाए रहने को मजबूर हैं।
हमें बैठने तक को नहीं कहा-जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति
उन्होंने आरोप लगाया कि जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने विधायक बद्रीनाथ के साथ मुख्यमंत्री से समय लिया था। इस अपेक्षा से कि मुख्यमंत्री जोशीमठ की जनता के इन हालात को जानेंगे सुनेंगे, व तत्काल निर्णय लेंगे। लेकिन मुख्यमंत्री ने पूर्व कैबिनेट मंत्री वर्तमान विधायक व संघर्ष समिति के लोगों, अध्यक्ष नगर पालिका जोशीमठ व अन्य लोगों को जो सुदूर जोशीमठ से बड़ी आशा से आए थे, लेकिन हमें बैठने तक को नहीं कहा। सती ने आरोप लगाया कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी आपदा से ग्रस्त लोगों के इस क्षण को भी राजनीति के अवसर लाभ उठाने का मौका बना लिया यह घोर आपत्तिजनक है यह असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है। उन्होंने कहा कि हम प्रदेश की जनता से भी अपील करते हैं कि एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक पर्यटन नगर जो कि सीमा का अंतिम नगर होने से सामरिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है, को बचाने के लिये सरकार पर दबाब बनाने में हमारी मदद करें। समिति का कहना है कि जोशीमठ की जनता को न्याय मिलने उनके पुनर्वास की व्यवस्था होने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।












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