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गर्मी की छुट्टी में घूमने की कर रहे हैं प्लानिंग तो उत्तराखंड में ये हैं 5 डेस्टिनेशन, जहां मिलेगा आपको सूकून

टूरिस्ट डेस्टिनेशन—कौसानी, औली, चोपता, चकराता, दयारा बुग्याल

देहरादून, 10 मई। मैदानी इलाकों में जहां गर्मी का सितम पूरे चरम पर है। तो वहीं पहाड़ों में इन दिनों मौसम घूमने के लिए पूरी तरह अनूकूल है। ऐसे में अगर आप इस बार गर्मी की छुट्टियों में कहीं घूमने का प्लान कर रहे हैं तो उत्तराखंड किसी जन्नत से कम नहीं है। जहां कई टूरिस्ट डेस्टिनेशन आपका इंतजार कर रहे हैं।

कौसानी

कौसानी

उत्तराखंड में कुमाऊं मण्डल के बागेश्वर जिले का एक गांव है। जो कि अल्मोड़ा से 53 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। कौसानी पिंगनाथ चोटी पर बसा है। यहां से बर्फ से ढ़के नंदा देवी पर्वत की चोटी का नजारा बडा भव्‍य दिखाई देता हैं। कोसी और गोमती नदियों के बीच बसा कौसानी भारत का स्विट्जरलैंड कहलाता है। कोसानी में घूमने के लिए अनासक्त‍ि आश्रम है। इसे गांधी आश्रम भी कहा जाता है। इस आश्रम का निर्माण महात्‍मा गांधी को श्रद्धांजली देने के उद्देश्‍य से किया गया था। इसके साथ ही लक्ष्‍मी आश्रम, यह आश्रम सरला आश्रम के नाम से भी प्रसिद्ध है। हिन्‍दी के प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्‍म कौसानी में हुआ था। बस स्‍टैंड से थोड़ी दूरी पर उन्‍हीं को समर्पित पंत संग्रहालय स्थित है। जिस घर में उन्‍होंने अपना बचपन गुजारा था, उसी घर को संग्रहालय में बदल दिया गया है। इसके साथ ही 208 हेक्‍टेयर में फैले चाय बागान भी यहां सबसे पसंदीदा स्थल है। ये चाय बागान कौसानी के पास ही स्थित हैं। कोसानी पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है। और नजदीकी रेल जंक्‍शन काठगोदाम है। जहां से बस या टैक्‍सी द्वारा कौसानी पहुंचा जा सकता है।

औली

औली

उत्तराखंड के चमोली ज़िले में स्थित एक नगर है। यह औली बुग्याल भी कहलाता है। यह 5-7 किलोमीटर में फैला छोटा सा स्की-रिसोर्ट है। इस रिसोर्ट को 9,500-10,500 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। यहां बर्फ से ढकी चोटियां बहुत ही सुन्दर दिखाई देती हैं। यहां लोग बर्फ देखने जरूर आते हैं। यहां स्कीइंग की जा सकती है। इसके अलावा नंदा देवी के पीछे सूर्योदय देखना एक बहुत ही सुखद अनुभव है। औली में खाने और रहने की कोई परेशानी नहीं हो सकती है। बस यहां ठंड बहुत पड़ती है। ऐसे में साथ गर्म कपड़े रखना जरुरी है। यहां से जोशीमठ भी घूमने जाया जा सकता है। इसके अलावा तपोवन भी घुमा जा सकता है। यह जोशीमठ से 14 किलोमीटर और औली से 32 किलोमीटर दूर है। तपोवन पवित्र बद्रीनाथ यात्रा के रास्ते में पड़ता है। यह ऋषिकेश से उत्तर पूर्व में 268 किलोमीटर और दिल्ली से उत्तर पूर्व में 492 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा औली पहुंचने के लिए 15 घंटो का समय लगता है।

चोपता

चोपता

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक छोटा सा शहर है। चोपता को भारत में मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से भी जाना जाता है। चोपता समुद्र तल से 8556 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित, एक बहुत खूबसूरत हिल स्टेशन है। चोपता में आपको दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर देखने को मिलेगा यह मंदिर तुंगनाथ के नाम से बहुत प्रसिद्ध है। चोपता ट्रैकिंग, हाइकिंग, माउंटेन साइकिल, इन सभी एडवेंचर के लिए फेमस है। चोपता सबसे ज्यादा तुंगनाथ और चंद्रशिला ट्रेक के लिए प्रसिद्ध है, इस ट्रेक के दौरान आप पंचचुली, नंदा देवी, केदारनाथ और त्रिशूल की राजसी चोटियों को देख सकते हैं। अगर आप ट्रेन से आएंगे तो हरिद्वार से चोपता की दूरी 229 किलोमीटर है और ऋषिकेश से चोपता की दूरी 209 किलोमीटर की है। देहरादून हवाई अड्डे से चोपता की दूरी 178 किलोमीटर की है।

चकराता

चकराता

देहरादून ज़िले में स्थित एक नगर है। यह स्थान यह एक पर्वतीय पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ एक छावनी भी है। यह देहरादून से 98 किलोमीटर दूर है। यह सुंदर प्राकृतिक स्थान ​और ट्रैकिंग के लिए फेमस है। चकराता में दूर-दूर फैले घने जंगलों में जौनसारी जनजाति के आकर्षक गांव हैं। यहां के वातावरण को देखते हुए अंग्रेजों ने इस स्थान को समर आर्मी बेस के रूप में इस्तेमाल किया। वर्तमान में यहां सेना के जवानों को कमांडों की ट्रैनिंग दी जाती है। चकराता से 5 किमी पैदल चलने पर 50 मीटर ऊंचा टाइगर फॉल है। समुद्र तल से 1395 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह झरना चकराता के उत्तर पूर्व में है। इसके साथ ही मसूरी-यमुनोत्री रोड़ पर लाखामंडल है। लाखमंडल विशेषरूप से महाभारत काल से संबधित माना जाता है। यहां पुरातत्व विभाग द्वारा करवायी गयी खुदाई में लाखों मूर्तियों के अवशेष मिले है, यह भी एक कारण है की इसका नाम लाखामंडल पड़ा। माना जाता है कि कौरवों ने पाड़ंवों को जलाने के लिए लाक्षागृह बनवाया था, और जहां उन्हें माता कुंती के साथ जिन्दा जलाने का षड़यंत्र रचा था। लाखामंडल में वह गुफा आज भी मौजूद है, जिससे होकर पांडव सकुशल बाहर आये थे, और इसके बाद पांडव द्वारा चक्रनगरी में एक महीने तक निवास किया गया था, जिसे आज चकराता नाम से जाना जाता है। देहरादून एयरपोर्ट से चकराता तकरीबन 123 किलोमीटर दूर है।

दयारा बुग्याल

दयारा बुग्याल

उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल सुमद्र तल से 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। चारों ओर बर्फ से ढके इस बुग्याल तक पहुंचने के लिए उत्तरकाशी गंगोत्री सड़क मार्ग पर स्थित भटवाड़ी तक गाड़ी से पहुंचना होता है। फिर बारसू गांव से दयारा बुग्याल तक पैदल चलना होता है। जो कि करीब 9 किलोमीटर है। लेकिन 9 किमी की दूरी प्रकृति की सुंदरता के आगे कुछ भी नहीं है। जैसे ही आप मलमली घास पर पहुंचेगे तो आपकी थकान दूर हो जाएगी। दयारा बुग्याल में आपको सुंदर जंगल, पहाड़ और खूबसूरत रेशमी घास दिखेगी। सर्दियों में आप यहां स्कींग के लिए भी आ सकते हैं। जहां तक आपकी नजर दौड़ेगी आपको प्राकृतिक छटा ही नजर आएगी। बंदरपूछ, कलानाग, श्रीखंड महादेव, श्रीकांत शिखर और गंगोली चोटी जैसे पर्वत शिखरों का खूबसूरत नजारा यहां से देखने को मिलेगा। देहरादून जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से उत्तरकाशी मुख्यालय लगभग 200 किमी दूर है। दयारा में आपको रुकने के लिए सीमित संसाधन मिलेंगे। यहां रिसोर्ट और स्थानीय लोगों के बनाए अस्थायी साधन आपको मिलेंगे।

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