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Holi 2025: उत्तराखंड के इन गांवों में डेढ़ सौ साल से नहीं मनी है होली! क्या है कारण?

Holi : इस वक्त भारत में फागोत्सव की धूम मची हुई है हर जगह रंग-गुलाल उड़ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं हमारे देश में एक ऐसी जगह भी है जहां पर कई सौ सालों से होली नहीं मनाई जाती है। यहां के लोग स्थानीय मान्यताओं और लोक देवताओं के डर से करीब डेढ़ सौ सालों से रंगों का ये त्यौहार नहीं मनाएं है।

समय के साथ कई परंपराएं बदलती हैं लेकिन कुछ इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी हैं कि उन्हें तोड़ना आसान नहीं होता। इन स्थानों पर होली न मनाने के पीछे धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक घटनाएं और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

Holi-2025

उत्तराखंड में भी होली के समय धूम मची रहती है लेकिन वहीं यहां के कई दुरस्थ पहाड़ी गांवों में होली का ये त्यौहार नहीं मनाया जाता है। ऐसी है एक खुबसुरत जगह है मुनस्यारी ...प्रकृति ने इसे बड़े प्यार से नवाजा है लेकिन यहां 125 से अधिक गांवों के लोग होली का त्योहार नहीं मनाते हैं क्योंकि उनका मानना है कि रंगों से खेलने पर उनके कुलदेवता नाराज हो जाते हैं।

Holi: लोक मान्यताएंं

सामा क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में ऐसी मान्यता है कि अगर गांव वाले रंगों से खेलते हैं तो उनके कुलदेवता उन्हें दंड देते हैं। न केवल कुमांउ क्षेत्र में बल्कि गढ़वाल में रुद्रप्रयाग के इन गांवों क्वीली, खुरझांग और करीब 125 से अधिक गांवों के लोग कुलदेवी त्रिपुरा सुंदरी के कहर के डर से पिछले डेढ़ सौ साल से होली नहीं खेली है।

Holi 2025: रंगीन कपड़े पहने की अनुमति नहीं

यहां के लोग लोक आस्थाओं में बहुत यकिन रखते हैं और इसी तरह लोक देवता केदार में आस्था रखने वाले कई गांवों में भी होली नहीं खेली जाती। माना जाता है कि चिपला केदार न केवल रंगों से बल्कि गीतों से भी नाराज हो जाते हैं। 3700 मीटर उंची पहाड़ी पर स्थित चिपला केदार देवता की पूजा और जुलूस यात्रा के दौरान रंगीन कपड़े पहने की भी अनुमति नहीं है। देवता की पूजा के दौरान पुजारियों समेत गांव के सभी लोग केवल सफेद कपड़े पहनते हैं।

Holi 2025:इन जगहों पर भी नहीं खेला जाता रंग

इतना ही नहीं देश में और भी कई जगह है जहां होली नहीं मनाई जाती है। इसमें झारखंड के बोकारो जिले में एक आदिवासी बहुल गांव है दुर्गापुर जहां राजा के आदेश के कारण होली नहीं खेली जाती। ऐसे ही, तमिलनाडु में होली के दिन मासी मगम नामक धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है। गुजरात के रामसन गांव में एक संत के श्राप के कारण पिछले 200 वर्षों से होली नहीं मनाई जाती है।

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