HOLI 2026 जानिए क्यों है राठ की होलियार की चर्चा, होली के रंगों के साथ खास मैसेज भी, भावुक और झूमने का डबल डोज
HOLI 2026 Holiyaras Tripatti of Rath pauri garhwal होली को लेकर इस समय लोगों में जबरदस्त उत्साह है। होली के रंगों में लोग अभी से रंगे हुए नजर आ रहे है। जगह जगह होली के सांस्कृतिक कार्यक्रम मनाए जा रहे हैं। इन सबके बीच एक ऐसी टीम है, जो कि सबका ध्यान अपनी तरफ खींच रहे हैं।
ये युवा टीम सिर्फ होली की संस्कृति को जगाने का काम नहीं कर रही, कुछ खास संदेश लेकर भी पहाड़ से चलकर दिल्ली और देहरादून तक पहुंची है। इस टीम की चर्चा हर जगह हो रही है। जो कि राठ क्षेत्र की त्रिपटी होलियार टीम के नाम से हर जगह चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

अपने गायन के माध्यम से ये टीमें हर किसी को इमोशनल करने के साथ ही होली के रंगों को एक दूसरे तक ले जाने का काम कर रही हैं। पौड़ी के राठ क्षेत्र की त्रिपट्टी के होल्यारों की टीम उत्तराखंंड के पहाड़ी इलाकों से लगातार हो रहे पलायन के बीच पारंपरिक गीतों के साथ-साथ घर वापसी पर आधारित गीत गाकर प्रवासी ग्रामीणों को गांव लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।
टीम के टोलीनायक पंकज रावत ने बताया कि इस वर्ष होली की शुरुआत राहु मंदिर पैठाणी से की गई। इसके बाद पाबौ, पौड़ी और देवप्रयाग होते हुए टीम राजधानी देहरादून पहुंची। टीम द्वारा रचा गया गीत ...घार मा तुम्हारा जाला लगयां छिन, जरा ऐकि अपड़ी देहरी भेंट जावा, इन दिनों लोगों के दिलों को छू रहा है। टीम में राठ त्रिपट्टी की टीम में सहित कई युवा शामिल हैं।
इस टीम ने दिल्ली में गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी के आवास पर जाकर भी होली का कार्यक्रम आयोजित किया। सांसद अनिल बलूनी ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि प्रसन्नता का विषय है कि नई पीढ़ी के युवा अपने पारंपरिक वाद्य यंत्र जैसे ढोल-दमाऊ, तुरही, भंकोरा आदि के साथ अपनी विशिष्ट पहचान को जीवंत कर रहे हैं।
केवल होली के गीत ही नहीं बल्कि इनके गीतों में गढ़वाली संस्कृति, गांव-घर की यादें, प्रकृति, प्रेम, पलायन की पीड़ा और सामाजिक संदेश होते हैं। बचपन में गाँव में सुने गीतों को पुनः मौलिक रूप में सुनना भावुक कर देता है।
वीरान होते गांवों की पीढ़ा व्यक्त करता गीत "पुराणी ड्येली गया तुमरी तख ताला लग्यांन..." बहुत मार्मिक संदेश देता है।
इसके अलावा होलियार टीम ने दिल्ली में इंडिया गेट पर पहुंचकर पारंपरिक पहाड़ी होली गीतों की ऐसी स्वर लहरियाँ बिखेरीं कि वहां उपस्थित लोग झूम उठे। ढोल-दमाऊँ और राग-रंग से सजी उत्तराखंडी होली ने न केवल लोगों को नाचने पर मजबूर किया, बल्कि एक गहरा सांस्कृतिक संदेश भी दिया। आज ये गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बसे उत्तराखंडवासियों के लिए एक ग्लोबल संदेश बन चुके हैं।
पहाड़ की होली के ये रंग हर जगह पहुंच रहे हैं। जिससे हमारे संस्कृृति के साथ ही खास संदेश पहुंचाया जा रहा है। इसके बाद देहरादून में सीएम धामी के होली मिलन कार्यक्रम के साथ ही कई कार्यक्रमों में इस टीम ने अपने संगीत से समा बांधा हुआ है। भावुक करने के साथ ही ये होल्यार टीम लोगों को पहाड़ की संस्कृति और संगीत से रुबरु कराने का काम भी कर रही है।












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