HOLI 2026 अजब गजब रंग, साधु संतों ने गाय के पंचगव्य से खेली होली, किन्नर अखाड़े की श्मशान घाट पर मसान होली
HOLI 2026 रंगोत्सव यानि होली के कई रंग अब देखने को मिल रहे हैं। हर तरफ होली के रंगों में लोग रंगे हुए नजर आ रहे हैं। होली के कई अजब गजब रंग भी हैं, जो कि आम होली से बिल्कुल अलग है। ऐसे ही कुछ अलग रंग हरिद्वार में देखने को मिले।
जहां एक तरफ साधु संतों ने गाय के पंचगव्य से होली खेली तो किन्नर अखाड़े ने श्मशान घाट पर मसान होली से सबको हैरान कर दिया। धर्मनगरी हरिद्वार में संत समाज ने अनोखे अंदाज में होली मनाई। साधु संतों ने गाय के पंचगव्य से होली खेलकर सनातन परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

साधु संतों ने माया देवी मंदिर प्रांगण में पहले गाय के दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र से पंचगव्य बनाया और फिर उसी से होली खेली। भजन कीर्तन और पारंपरिक जयघोष के बीच संत समाज ने उल्लासपूर्वक होली का उत्सव मनाया। साधु संत पारंपरिक ढोल नगाड़ों की धुन पर झूमते नजर आए। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने कहा कि होली का पर्व संत समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है।
फागुन मास में पड़ने वाली रंग भरी एकादशी भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित होती है। उन्हें प्रसन्न करने के लिए पंचगव्य और रंगों से होली खेली जाती है। प्राचीन काल से साधु संतों के द्वारा गाय माता के पंचगव्य से होली खेलने की परंपरा चली आ रही है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि पंचकव्य गोबर की होली हमारी सनातन संस्कृति का प्रतीक है। गाय को हिंदू धर्म में माता का दर्जा प्राप्त है और उसका गोबर भी पवित्र माना जाता है।
उधर खड़खड़ी श्मशान घाट पर किन्नर अखाड़े के संतों और किन्नर समाज ने पारंपरिक 'मसान होली' खेली। बैंड-बाजों के साथ जुलूस के रूप में पहुंचे किन्नरों ने सबसे पहले चिता की राख की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद उसी राख और रंग-गुलाल से एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं।
महामंडलेश्वर पूनम किन्नर ने कहा कि श्मशान मोक्ष द्वार है और हर व्यक्ति को एक दिन यहां आना है। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी माता ने बताया कि यह पौराणिक परंपरा है, जिसका निर्वहन किन्नर समाज वर्षों से करता आ रहा है।












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