पतियों को बचाने के लिए हिंदू, मुस्लिम महिलाएं आईं साथ, एक दूसरे के पति को डोनेट की किडनी
देहरादून, 24 सितम्बर। ऐसे समय में जब मजबह के नाम पर लोगों के बीच खाईं बढ़ती जा रही है और अक्सर इससे जुड़ी हिंसा की घटनाएं रिपोर्ट की जा रही हैं दो अलग-अलग धर्मों को मानने वाली महिलाएं अपने पतियों को बचाने के लिए साथ आई हैं। दोनों ने एक दूसरे के पतियों की जिंदगी को बचाने के लिए अपनी किडनी देने पर अपनी सहमति दी। दोनों महिलाओं की किडनी को एक दूसरे के पतियों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया है।

दो साल से चल रहा था डायलिसिस
50 वर्षीय विकास उनियाल पिछले दो साल से किडनी फेल होने के बाद डायलिसिस पर चल रहे थे। यही हाल 51 वर्षीय अशरफ अली था। डॉक्टर ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट के लिए बोल दिया था लेकिन दोनों का डोनर नहीं मैच हो पा रहा था।
विकास और अशरफ दोनों का इलाज देहरादून के हिमालयन अस्पताल में चल रहा था। डॉक्टरों ने सबसे पहले दोनों की पत्नियों को डोनर के लिए टेस्ट करने की योजना बनाई। इसके लिए विकास की पत्नी सुषमा उनियाल और अशरफ की पत्नी सुल्ताना का टेस्ट किया गया। दोनों महिलाएं किडनी देने के लिए तो योग्य तो थीं लेकिन उनकी किडनी उनके पति को प्रत्यर्पित करने के लिए मैच नहीं हो रही थी।
इसके बाद भी उन्होंने प्रयास जारी रखा। रिश्तेदारों का भी टेस्ट किया गया लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। किडनी डोनेट करने से पहले ब्लड टेस्ट, क्रॉसमैच टेस्ट (क्या लेने वाले का शरीर किडनी को स्वीकार करेगा), एचएलए एंटीजेन टेस्ट (इम्यून सिस्टम की जांच) जैसे टेस्ट किए जाते हैं जिसके बाद प्रत्यर्पण को मंजूरी दी जाती है।
तस्वीर- वीडियो स्क्रीनशॉट से साभार

बार-बार टेस्ट के बाद नहीं मिल रही थी सफलता
दोनों परिवार लंबे समय से अस्पताल में इलाज कर रहे थे और इलाज में काफी पैसा भी खर्च कर रहे थे लेकिन आखिरकार सफलता नहीं मिल रही थी। आखिर में डॉक्टरों ने एक दूसरे प्लान को आजमाने का फैसला किया।
दोनों मरीजों की पत्नियां अपने पति को किडनी देने के लिए तैयार थीं लेकिन उनका ब्लड ग्रुप मैच नहीं कर रहा था जिस पर डॉक्टरों ने रिपोर्ट देखी तो सुषमा का ब्लड ग्रुप अशरफ के लिए मैच कर रहा था वहीं आश्चर्यजनक रूप से सुल्ताना का ब्लड ग्रुप विकास के ब्लड ग्रुप से मैच कर रहा था।
इसके बाद दोनों के टेस्ट किए गए जिसमें डॉक्टरों ने पाया कि दोनों एक दूसरे के पतियों को किडनी डोनेट कर सकती हैं। बस फिर क्या था दोनों की मंजूरी मिलने के बाद डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू और प्रत्यारोपण सफल रहा। फिलहाल दोनों मरीज स्वस्थ हैं और डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे हैं।

मानवता का रिश्ता हर रिश्ते से बढ़कर
प्रत्यर्पण सफल होने के बाद दोनों परिवार बहुत खुश हैं। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद सुषमा उनियाल ने कहा "मैं अपनी भावना को शब्दों में बयां नहीं कर सकती। मैं सुल्ताना खातून और उनके परिवार की शुक्रगुजार हूं। हमने एक दूसरे की मदद करने का फैसला किया और अब हम दो खुशहाल परिवार के रूप में हैं।
वहीं सुल्ताना खातून, जिनके पति अशरफ को सुषमा उनियाल की किडनी ट्रांसप्लांट की गई, का कहना है "सुषमा जी मेरी बहन बन गई हैं। मानवता का रिश्ता दुनिया के किसी भी रिश्ते से बढ़कर और मजबूत होता है। मैं अपने पति की जान बचाने के लिए सुषमा जी और उनके परिवार को धन्यवाद करती हूं।"












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