सीएम से लेकर मंत्री पद तक ये चेहरे हैं रेस में, जानिए भाजपा कैबिनेट—2 की क्या हो सकती है तस्वीर
भाजपा की 47 सीटें आई, जिनमें से दो दर्जन से अधिक दावेदार
देहरादून, 16 मार्च। उत्तराखंड में होली के बाद नई सरकार का गठन होने जा रहा है। भाजपा में मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री बनने के लिए दिल्ली दौड़ जारी है। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के अलावा 11 कैबिनेट मंत्री बनाए जा सकते हैं।भाजपा की 47 सीटें आई हैं। जिनमें से दो दर्जन से अधिक दावेदार इस समय किसी न किसी तरीके से अपनी दावेदारी कर रहे हैं। पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों को साधने की है। ऐसे में जानने की कोशिश करते हैं, कि कौन सा दावदार कितना मजबूत है और क्यों।

देहरादून, पौड़ी और टिहरी जिले से सबसे ज्यादा दावेदार
मंत्री पद की रेस में देहरादून जिले से सबसे ज्यादा 9 में से 6 विधायक मंत्री पद की रेस में हैं। इनमें गणेश जोशी, खजानदास, प्रेमचंद अग्रवाल, मुन्ना सिंह चौहान, विनोद चमोली, उमेश शर्मा काउ शामिल हैं। इसके बाद टिहरी जिले से 3 दावेदार सुबोध उनियाल, किशोर उपाध्याय और प्रीतम पंवार शामिल हैं। वहीं पौड़ी जिले से भी 3 दावेदार धन सिंह रावत, सतपाल महाराज, ऋतु खंडूरी भूषण का दावा मजबूत माना जा रहा है। इस तरह गढ़वाल से 12 दावेदार मंत्री पद की रेस में है। उत्तरकाशी जिले को अब तक मंत्री पद न मिलने के कारण गंगोत्री सीट से भाजपा विधायक सुरेश चौहान को मंत्री बनाने की भी क्षेत्र से मांग उठी है। इसके अलावा कुमाऊं से 4 और तराई से 2 दावेदारी मंत्री पद की रेस में है। महिलाओं में ऋतु खंडूरी, रेखा आर्य, सरिता आर्य अपनी दावेदारी में जुटी है। तो दलित चेहरों में खजानदास, रेखा, सरिता और चंदनराम दास का दावा मजबूत माना जा रहा है।

गढ़वाल से ये हैं दावेदार
सुबोध उनियाल- 2017 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए सुबोध उनियाल 2017 से 2022 की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। जिन्होंने भाजपा सरकार में शासकीय प्रवक्ता की अहम जिम्मेदारी भी निभाई है। सुबोध टिहरी जिले से आते हैं और ब्राह्रमण चेहरा हैं।
किशोर उपाध्याय - कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर तिवारी सरकार में मंत्री रहे। चुनाव से पहले भाजपा में आए और जीत हासिल की। किशोर टिहरी जिले से ब्राह्रमण चेहरा हैं। हालांकि सुबोध के कैबिनेट में जगह मिलने से उनकी दावेदारी थोड़ा सा कमजोर मानी जा रही है।
प्रीतम पंवार- यूकेडी और निर्दलीय विधायक रहने के बाद अब प्रीतम पंवार भाजपा के टिकट से जीतकर आए विधायक हैं। चुनाव में भाजपा का दामन थामने वाले पहले विधायक हैं। टिहरी जिले का ठाकुर चेहरा प्रीतम भगत सिंह कोश्यारी के काफी करीबी माने जाते हैं। लेकिन एक ही जिले से तीन लोगों को कैबिनेट में जगह मिले ऐसा मुश्किल लगता है।
मुन्ना सिंह- विधानसभा में विधायी कार्य हो या फिर तकनीकी ज्ञान मुन्ना सिंह चौहान एक अच्छे प्रवक्ता, वक्ता और सबसे ज्यादा अनुभवी माने जाते हैं। विकासनगर से जीतकर आए मुन्ना सिंह देहरादून जिले से आते हैं। मुन्ना का नाम कैबिनेट और स्पीकर के लिए सबसे आगे चल रहा है।
विनोद चमोली- पहले मेयर और अब विधायक के रूप में विनोद चमोली फिर से देहरादून जिले की धर्मपुर सीट से चुनकर आए हैं। देहरादून से ब्राह्रमण चेहरा लेकिन देहरादून से 9 में 6 कैबिनेट की दौड़ में है। ऐसे में चमोली का नंबर लगना मुश्किल माना जा रहा है।
उमेश शर्मा काऊ - 2017 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन करने वाले उमेश शर्मा काऊ ने दो बार भाजपा के टिकट से चुनाव लड़कर दोनों बार सबसे ज्यादा मतों से जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही काऊ अनिल बलूनी के सबसे करीबी विधायकों में से एक हैं। इसका लाभ काऊ को मिल सकता है।
खजानदास- राजपुर सीट से दोबारा जीतकर आए खजानदास भाजपा का सबसे बड़ा दलित चेहरा माना जा रहा है। इतना ही नहीं सूत्रों का दावा हे कि खजानदास का नाम मुख्यमंत्री के लिए भी भेजा गया है। वे भाजपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में इस बार खजानदास का नंबर लग सकता है।
गणेश जोशी- मसूरी से रिकॉर्ड बनाकर फिर से विधायक बने गणेश जोशी इस बार भी कैबिनेट की रेस में सबसे आगे हैं। इससे पहले सरकार में वे मंत्री रह चुके हैं। जिस वजह से जोशी का नंबर आ सकता है। वे देहरादून जिले का ब्राह्रमण चेहरा हैं।
प्रेमचंद्र अग्रवाल -देहरादून जिले की ऋषिकेश सीट से रिकॉर्ड बनाने वाले प्रेमचंद अग्रवाल पिछली बार स्पीकर रहे। इस बार वे कैबिनेट मंत्री के लिए अपना दावा ठोक रहे हैं।
धन सिंह रावत-श्रीनगर से दोबारा जीतकर आए धन सिंह रावत मुख्यमंत्री की रेस में हैं। वे गढ़वाल के सबसे मजबूत ठाकुर चेहरा माने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री नहीं तो मंत्री बनना उनका तय है।
सतपाल महाराज -सतपाल महाराज मुख्यमंत्री की रेस में गढ़वाल के ठाकुर चेहरों में सबसे आगे हैं। वे पौड़ी जिले से आते हैं। मुख्यमंत्री के बाद मंत्री पर उनका दावा मजबूत है।
ऋतु खंडूरी भूषण -गढ़वाल के ब्राह्रमण चेहरों में ऋतु खंडूरी का नाम सबसे आगे लिया जा रहा है। महिलाओं के प्रतिनिधित्व में वे सबसे पहले नंबर पर है। मुख्यमंत्री के बाद मंत्री पर उनका दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है।

कुमाऊं और तराई से इनका दावा मजबूत
बिशन सिंह चुफाल- 6वीं बार से विधायक चुनकर आए बिशन सिंह चुफाल इस बार मंत्री और स्पीकर दोनों पदों के लिए रेस में है। पिछली सरकार में वे कैबिनेट मंत्री रहे।
चंदनराम दास- कुमाऊं से दलित और सीनियर चेहरों में चंदनराम दास का नाम सबसे तेजी से आगे आया है। वे चौथी बार बागेश्वर सीट से जीतकर आए हैं।
रेखा आर्य -कुमाऊं की महिला, दलित चेहरे में रेखा आर्य कैबिनेट की दौड़ में आगे हैं। वे पिछली सरकार में मंत्री रह चुकी हैं।
सरिता आर्य -नैनीताल सीट से विधायक चुनकर आई सरिता आर्य पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर आई हैं। वे दलित महिला और कुमाऊं से मंत्री बनाने की उम्मीद लगाए हुए हैं। हालांकि भाजपा में आने के कारण वे सीधे मंत्री बन जाए ऐसा कम ही लग रहा है।
बंशीधर भगत- भाजपा के सबसे सीनियर विधायकों में बंशीधर भगत का नाम है। भगत 7वीं बार विधायक चुनकर आए हैं। वे इस बार प्रोटेम स्पीकर भी बनाए गए हैं। ऐसे में भगत को स्पीकर या मंत्री बनाना तय माना जा रहा है।
मदन कौशिक -भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक इस बार मंत्री बनने की कौशिश में लगे हैं। ऐसे में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष से हटाकर मंत्री बनाने की चर्चा तेज है।
अरविंद पांडेय- शिक्षा मंत्री रहकर भी चुनाव जीतने वाले अरविंद पांडेय फिर का फिर से मंत्री बनना तय है। वे तराई से आते हैं। उनकी दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है।












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