देहरादून में स्विटजरलैंड की तर्ज पर ऐलिवेटेड कॉरीडोर पर हवा में सफर का लेंगे आनंद, जानिए क्या है प्लानिंग
Dehradun news: देहरादून में ट्रैफिक को सुधारने और जाम से पब्लिक को छुटकारा दिलाने के लिए नए नए प्रयोग किए गए। लेकिन अब तक कुछ खास फायदा नहीं मिल पाया। इस बीच मेट्रो और नियो प्रोजेक्ट पर भी काम हुआ। लेकिन धरातल पर कोई प्लान सफल नहीं हो पाया है।
अब धामी सरकार ने मास रैपिड ट्रांसिट सिस्टम टैक्नोजलॉजी को लाने की पहल की है। इसके जरिए स्विटजरलैंड की तर्ज पर दून सिटी में भी लोग ऐलिवेटेड कारीडोर पर हवा में सफर का आनंद ले सकेंगे। प्रोजेक्ट के फस्ट फेज में देहरादून में इसके 22.5 किलोमीटर लंबे दो कारीडोर आईएसबीटी से गांधी पार्क और एफआरआई से रायपुर होंगे। इनमें 25 स्टेशन प्रस्तावित हैं।

बताया गया कि मैसर्स हेस एजी द्वारा लाइट ट्रॉम विकसित किया गया है, जो फ्लैश चार्जिंग तकनीक का उपयोग करते हुए एक उच्च क्षमता वाला जन परिवहन समाधान है, जिसे पूरी तरह से एलिवेटेड कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (ई-आरटी) के रूप में उत्तराखंड की शहरी परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसके प्रथम चरण में देहरादून शहर के 2 कॉरिडोर्स में आई.एस.बी.टी से गांधी पार्क एवं एफ.आर.आई से रायपुर तक कुल 22.5 कि.मी, जिसमें 25 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मैसर्स हेस ग्रीन मोबिलिटी द्वारा उत्तराखण्ड में मास रैपिड ट्रांसिट सिस्टम तकनीक पर आधारित प्रस्तुतिकरण दिया गया। मास रैपिड ट्रांसिट सिस्टम टैक्नोजलॉजी को उत्तराखण्ड में बढ़ावा देने के मकसद से उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कारपोरेशन एवं हेस ग्रीन मोबिलिटी, कैरोसेरी हेस एजी व एसएसबी सॉरवीन एंड शेफ़र बाउ एजी के बीच एक एम.ओ.यू हस्ताक्षर किया गया।
देहरादून में मेट्रो को लेकर वर्ष 2017 में तत्कालीन हरीश रावत सरकार में प्लानिंग की गई थी। उसके बाद त्रिवेंद्र सरकार के कार्यकाल में दून, हरिद्वार व ऋषिकेश के मध्य मेट्रो ट्रेन की योजना बनी थी। जिसके लिए उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन अस्तित्व में आया। बाद में देहरादून शहर के लिए नियो मेट्रो पर जोर दिया गया। जो कि लंबे समय से ठंडे बस्ते में है। अब देहरादून में नियो मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के आगे बढऩे की उम्मीद जगी है।












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