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देहरादून निगम चुनाव के बीच गरमाया मलिन बस्तियों का मुद्दा,क्या फिर गरजेगा बुलडोजर,कांग्रेस भाजपा आमने-सामने

Dehradun Corporation elections: देहरादून नगर निगम चुनाव के बीच मलिन बस्तियों का मुद्दा गरमाने लगा है। चुनाव के गरमा गरमी माहौल के बीच एनजीटी के एक आदेश से सियासत गरमा गई है। एनजीटी ने अपने आदेश में मलिन बस्तियों के लिए राज्य सरकार के अध्यादेश को मानने से इनकार कर दिया है। जिसके बाद मलिन बस्तियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि मलिन बस्तियों के लिए अपनी नीति और मनसा स्पष्ट करनी चाहिए जिससे मलिन बस्ती निवासियों के मन में जारी संशय समाप्त हो सके। देहरादून में कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट ने कहा है कि सरकार मलिन बस्तियों के नियमितीकरण और पुनर्वास के प्रति गंभीर नहीं है।

Dehradun Corporation elections Issue of slums heated up amid bulldozer roar Congress BJP face 2 face

शीशपाल सिंह बिष्ट ने कहा की 16 दिसंबर को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के आदेश की वजह से मलिन बस्तियों में गरीब परिवारों के घर खतरे में हैं। वही भारतीय जनता पार्टी जिसके हर मंत्री और प्रत्याशी दावा कर रहे हैं कि उनके अध्यादेश की वजह से तीन साल तक मलिन बस्तियों को बचाया गया, वही पार्टी और उनकी सरकार इस आदेश पर चुप बैठी है। जबकि इस आदेश में प्राधिकरण ने साफ कहा है कि वह इस अध्यादेश को मानते ही नहीं।

प्राधिकण के आदेश के अनुसार 13 फरवरी तक रिस्पना नदी पर हजारों परिवारों को हटाने के लिए सरकार को कदम उठाना पड़ेगा। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अगर यह आदेश जारी रहेगा तो, मलिन बस्तियों पर फिर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक गई है इससे मलिन बस्ती वासी अपने भविष्य के प्रति चिंतित हो गए हैं । इसके अलावा सरकार मलिन बस्तियों के पुनर्वास और मुआवजे के बारे में कोई जिक्र ही नहीं कर रही हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि हमारा मानना है कि यह आदेश विधिविरुद्ध एवं गैर संवैधानिक है। आदेश सात जनवरी को सार्वजनिक हुआ था, लेकिन सरकार को तीन सप्ताह से इस आदेश के बारे में पता था। इतना समय बीतने के बावजूद सरकार ने इस आदेश के खिलाफ कोई भी कदम क्यो नहीं उठाया है और उच्चतम न्यायालय में इसके खिलाफ कोई याचिका अभी तक नहीं डाली है।

इसके विपरीत अभी भी निकाय चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी और नेता दावा कर रहे हैं कि किसी भी बस्ती के लिए कोई खतरा नहीं है, जबकि उनको पता है कि यह सरासर झूठ है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट लग रहा है कि चुनाव के बाद इस आदेश के बहाने गरीबों के घरों पर फिर बुलडोजर चलाना सरकार की मंशा है। पहले पहाड़ी क्षेत्रों में भी इस सरकार ने ऐसे ही किया, बार बार कोर्ट के आदेश का बहाना बनाकर के लोगों के मकानों और दुकानों को तोड़ा गया हैं।

भाजपा ने मलिन बस्तियों को उजाड़ने को लेकर कांग्रेस के आरोपों को मिथ्या दुष्प्रचार बताते हुए कहा कि पार्टी मलिन बस्तियों को लेकर गंभीर है और बस्तियों के स्थायी समाधान होने तक किसी की छत नही उजड़ने दी जायेगी। प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस भ्रम फैलाने की असफल कोशिश कर रही है।

मलिन बस्तियों के नियमितीकरण को लेकर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट है कि इस मुद्दे का स्थाई समाधान होना जरूरी है। क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में सबसे पहले प्रभावित लोगों को सुरक्षित किया जाना आवश्यक है। पूर्व में भी भाजपा सरकार ने एक नहीं तीन तीन बार अध्यादेश लाकर बस्तियों को राहत देने का काम किया है।

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