गैरसेंण में कांग्रेस ने किए 3 प्रस्ताव पारित, देहरादून में खनन को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत का हल्ला बोल
गैरसेंण में कांग्रेस ने किए 3 प्रस्ताव पारित, देहरादून में खनन को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत का हल्ला बोल
देहरादून, 11 दिसंबर। शनिवार को देहरादून में वर्तमान सरकार का के आखिरी विधानसभा सत्र का समापन हो गया। इस दौरान कांग्रेस ने गैरसेंण से पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर विधानसभा भवन को सीडीएस के नाम पर रखने के साथ ही 3 प्रस्ताव पारित किए। इसक बाद देहरादून में राज्य सरकार के खिलाफ खनन को लेकर जमकर हल्ला बोला। पूर्व सीएम हरीश रावत ने विधानसभा के गेट पर धरना देकर सरकार को चेताया, कांग्रेस ने सीएम के कार्यालय से जारी हुए लेटर को लेकर सवाल खडे किए है।

कांग्रेस ने लाए 3 प्रस्ताव
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व सीएम हरीश रावत ने भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन के सामने एक कार्यक्रम में शिरकत की। पहले हरीश रावत ने विधानसभा भवन के सामने गैरसेंण में सत्र न कराने को लेकर उपवास करने की घोषणा की थी लेकिन सीडीएस जनरल बिपिन रावत के आकस्मिक निधन के बाद कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को श्रद्धांजलि सभा के रुप में मनाया। इस मौके पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने विधानसभा भवन के नामकरण को सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम पर करने के साथ ही 3 प्रस्ताव रखे। हरीश रावत ने कहा कि
अपने इस गैरसैंण भराड़ीसैंण विधानसभा भवन के सम्मुख आयोजित श्रद्धांजलि सभा को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं, यहां तीन विलक्षण प्रस्ताव पारित किए हैं। एक तो इस भव्य विधानसभा का नामकरण हमारे गौरव , सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम पर किया जाए और विधानसभा के अपने विधानसभा आवासीय परिसर का नामकरण जो हमारे 17वें जनरल थे बी.टी. जोशी दन्या, अल्मोड़ा के उनके नाम पर किया जाए और भराड़ीसैंण की पूरी टाउनशिप को जो हमारी राजधानी की टाउनशिप है, चंद्रनगर इसका नाम वीरचंद्र सिंह गढ़वाली जी के नाम पर किया जाए।
खनन को लेकर चुनावी मिशन
गैरसेंण से निकलते ही पूर्व सीएम हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल नाटकीय तरीके से देहरादून स्थित विधानसभा के गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। पूर्व सीएम हरीश रावत ने विधानसभा तक आने के लिए पहले पैदल और उसके बाद स्कूटर का सहारा लिया। पुलिसकर्मियों के साथ परमिशन को लेकर हरीश रावत और कांग्रेसियों की जमकर कहासुनी भी हुई। इसके बाद कांग्रेस के विधायक और कार्यकर्ता विधानसभा के बाहर खनन को लेकर धरने पर बैठ गए। हरीश रावत का ये धरना सीएम के पीआरओ के वायरल पत्र के बाद हुआ, जिसमें सीएम के पीआरओ ने चालान निरस्त करने के लिए एक पत्र जारी किया। इस पत्र को लेकर उत्तराखंड की सियासत गर्मा गई है। इस मौके पर हरीश रावत ने कहा कि
मैं उत्तराखंड के नदियों व गाड़-गधेरों में अंधाधुंध, अवैज्ञानिक तरीके से टूट के तौर पर हो रहे बजरी बोल्डर आदि के खनन से बहुत दु:खी हूं, यह खुली लूट हो रही है। मैं जब मुख्यमंत्री को खननप्रिय कहता था तो मुझे भी इतना एहसास नहीं था कि इतनी खुली लूट की इजाजत या खुली लूट करवाने का काम शासन व्यवस्था कर रही है। अभी भराड़ीसैंण से लौटे हैं तो भराड़ीसैंण की भावना से ओतप्रोत हैं, तो मन में अचानक यह संकल्प उभरा है कि चलो विधानसभा के गेट पर उपवास बैठते हैं।












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