सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सजाई फिल्डिंग, भाजपा से आउट नहीं हो पाए हरक सिंह, जानिए कैसे
कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के इस्तीफे प्रकरण में सीएम धामी ने संभाला मोर्चा
देहरादून, 25 दिसंबर। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आया हुआ है। पहले कांग्रेस के अंदर पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व पर उठाए गए सवाल और अब भाजपा के अंदर कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के मंत्री पद से इस्तीफे देने की चर्चाओं ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरक सिंह रावत की नाराजगी सामने आते ही तुरंत एक्शन लेते हुए अपने निर्णय से हरक सिंह की नाराजगी को दूर करने की सफल कोशिश कर ली है। फिलहाल हरक सिंह के मंत्री पद छोड़ने या भाजपा छोड़ने की खबरों पर विराम लग गया है।
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कोटद्वार में मेडिकल कॉलेज प्रकरण से हुआ विवाद
शुक्रवार को सुबह कांग्रेस के अंदर मचे घमासान में कुछ विराम लगा तो देर शाम भाजपा में बवाल हो गया है। धामी सरकार की कैबिनेट बैठक खत्म होने से पहले ही हरक सिंह इस्तीफे देने की खबरें वायरल हो गई। दावा किया गया कि हरक सिंह ने मंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है। जिसमें कोटद्वार में मेडिकल कॉलेज की मंजूरी का प्रकरण कैबिनेट में न आना कारण बताया गया।इसके बाद हरक सिंह अज्ञातवास में चले गए। हरक सिंह की नाराजगी की खबर सामने आते ही रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ के भाजपा छोड़ने की खबरें भी मीडिया की सुर्खियां बन गई। हालांकि देर रात तक इस्तीफे की पुष्टि नहीं हो पाई। भाजपा के अंदर चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद गोपेश्वर में भाजपा के विजय संकल्प यात्रा को लीड कर रहे प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने इस्तीफे की खबरों का खंडन किया। जिसके बाद मदन कौशिक के देहरादून आकर मान मनौव्वल शुरू करने का दावा किया गया। सीएम पुष्कर सिंह धामी की और से कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और धन सिंह रावत को हरक को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन कुछ खास बात नहीं बन पाई। पूरी रात हरक सिंह की नाराजगी और इस्तीफे देने की अटकलें तेजी से सोशल मीडिया में वायरल होती रही।

विधायक काऊ ने सामने आकर इस्तीफे का किया खंडन
शनिवार सुबह सबसे पहले विधायक उमेश शर्मा काऊ मीडिया के सामने आए और इस्तीफे से इनकार कर दिया। उमेश शर्मा काऊ ने दावा किया कि हरक सिंह भाजपा के साथ हैं। उन्होंने ये भी दावा किया कि सीएम पुष्कर सिंह धामी की हरक सिंह के साथ फोन पर बातचीत हुई है। इसके बाद मामला कुछ शांत हो पाया। इन सभी घटनाक्रम के बीच कैबिनेट की मीटिंग खत्म होने के बाद जानकारी दी गई कि कोटद्वार मेडिकल कॉलेज के लिए कैबिनेट ने 5 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट में मेडिकल कॉलेज के लिए धनराशि उपलब्ध कराकर हरक सिंह के उस मंसूबे पर पानी फेर दिया। जिसको ढाल बनाकर वे भाजपा में बगावत करने की तैयारी में थी।

सीएम धामी ने रात में ही चल दिया मास्टरस्ट्रोक
हरक सिंह को करीबी से जानने वाले इस बात का दावा कर रहे हैं कि हरक सिंह को जब भी अपनी बात मनवानी होती है तो वे प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू कर देते हैं। इसके अलावा अगर हरक सिंह रावत और उमेश शर्मा काऊ भाजपा छोड़ने की स्क्रीप्ट लिख रहे थे तो सीएम ने ऐसी फिल्डिंग सजाई जिससे दोनों बाहर नहीं जा पाए। जिस मांग को लेकर हरक सिंह क्षेत्रवासियों का दिल जीतना चाहते थे, उस पर धामी ने मास्टरस्ट्रोक चल दिया। हालांकि जब शनिवार को सीएम से मीडिया ने इस प्रकरण के बारे में जानना चाहा तो वे हंसते हुए परिवार की बात करते हुए जवाब देकर आगे बढ़ गए। साफ है कि सीएम ने जो दांव चलना तो वो देर रात चलकर आगे बढ़ चुके हैं। अब हरक सिंह की नाराजगी की वजह मेडिकल कॉलेज की मांग नहीं हो सकती है।












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