चार धाम यात्रा : केदारनाथ जाने वाले रास्ते पर श्रद्धालुओं ने फैलाया कचरा, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता
उत्तराखंड, 22 मई: चारधाम यात्रा को लेकर इस बार तीर्थ यात्रियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, लेकिन तीर्थ यात्रियों की लापरवाही प्रकृति पर भारी पड़ सकती है। ये लोग अपने साथ प्लास्टिक के सामान ले जा रहे हैं और रास्ते में कहीं पर भी कूड़ा-कचरा फेंक दे रहे हैं। केदारनाथ धाम में प्लास्टिक के कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। वैज्ञानिकों ने इस पर चिंता जाहिर की है। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग के प्रमुख प्रोफेसर एमएस नेगी ने इस मामले में कहा कि केदारनाथ जैसे संवेदनशील जगह पर जिस तरह प्लास्टिक का कचरा जमा हो गया है, वह हमारी पारिस्थितिकी के लिए खतरनाक है। इससे क्षरण होगा, जो भूस्खलन का कारण बन सकता है।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि 16 किलोमीटर लंबे गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर आने वाले समय में आल टेरेन व्हीकल (एटीवी) दौड़ते नजर आएंगे। इसके लिए पहले पैदल मार्ग को एटीवी चलाने योग्य बनाया जाएगा। इस संबंध पर्यटन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। शीघ्र इसकी औपचारिकताएं पूरी कर अग्रिम कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चारधाम में केदारनाथ की यात्रा सबसे कठिन है। इसी को ध्यान में रखकर पर्यटन विभाग पैदल मार्ग पर आल टेरेन व्हीकल चलाने की तैयारी कर रहा है।
बता दें, इस बार 3 मई को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चार धाम यात्रा का आगाज हुआ, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट 6 मई और बदरीनाथ धाम के कपाट 8 मई को भक्तों के लिए खुले। चार धाम यात्रा में अब तक 8 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। केदारनाथ धाम में 2.70 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना की। इस बार यात्रा में आने वाले तीर्थयात्रियों में चारों धाम के दर्शन करने के लिए भारी उत्साह है, जिससे धामों की वहन क्षमता के अनुसार यात्रियों का पंजीकरण फुल है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि मंदिर समिति की ओर से तीर्थयात्रियों को धामों में सरलता व सुगमता से दर्शन कराए जा रहे हैं।












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