Ankita Bhandari case कौन है वीआईपी, पुलिस ने बताया सच, एक्स्ट्रा सर्विस समेत सारे सवालों के मिल गए जबाव
Ankita Bhandari case अंकिता भंडारी केस को लेकर पूरे प्रदेशभर में इस समय बवाल मचा हुआ है। तीन साल बाद वीआईपी को लेकर माहौल गरमा गया है। उत्तराखंड पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में एक बार फिर सामने आकर सारे तथ्यों को सामने रखा है।
पुलिस की ओर से एसआईटी के सदस्य रहे हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) शेखर सुयाल ने पूरे केस को लेकर जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण में किसी भी प्रकार का कोई वीआईपी संलिप्त नहीं है। इस तथ्य को कोर्ट ने भी स्वीकार किया है।

शेखर सुयाल ने जानकारी देते हुए बताया कि अंकिता के मित्र पुष्प से पूछताछ में जिस वीआईपी' का नाम लिया गया था, वह नोएडा का रहने वाला धमेंद्र कुमार उर्फ प्रधान था और वह कोई वीआईपी नहीं था। पुलिस ने जब धमेंद्र कुमार से पूछताछ की तो पता चला कि वह किसी काम से अंकिता की हत्या से दो दिन पहले क्षेत्र में आया था और वनंतरा रिजॉर्ट में खाना खाने के लिए कुछ देर रुका था। सुयाल ने कहा कि रिजॉर्ट के रिकॉर्ड और कर्मचारियों से पूछताछ में इसकी पुष्टि हुई थी।
इसके अतिरिक्त, दो व्यक्तियों की कथित बातचीत से संबंधित वायरल ऑडियो को गंभीरता से लेते हुए पुलिस द्वारा तत्काल एसआईटी का गठन किया गया, जो इस विषय में विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कर रही है। कोर्ट में प्रस्तुत साक्ष्यों,एसआईटी SIT द्वारा की गई गहन विवेचना एवं उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इस प्रकरण में तीनों अभियुक्तों को कोर्ट द्वारा दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई जा चुकी है।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार के साक्ष्य न तो नष्ट किए गए हैं और न ही छिपाए गए हैं। जिस कमरे को लेकर बार-बार यह भ्रम फैलाया गया कि उसे साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से तोड़ा गया, उस कमरे की वीडियोग्राफी सहित समस्त आवश्यक साक्ष्य तीनों न्यायालयों में विधिवत रूप से प्रस्तुत किए गए हैं।
पुलिस द्वारा बताया गया कि प्रारंभिक जांच के दौरान ही कुछ ही घंटों के भीतर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली गई थी, और वे आज भी न्यायिक अभिरक्षा में जेल में निरुद्ध हैं। तथाकथित वीआईपी एंगल सामने आने के पश्चात् पुलिस ने रिसोर्ट/होटल में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की गहन जांच की। विस्तृत विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि जिस प्रकार की अफ़वाहें फैलाई गईं, वैसा कोई वीआईपी इस प्रकरण में शामिल नहीं है।
SIT द्वारा रिसोर्ट में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी से पूछताछ की गई तथा सभी के बयान विधिवत रूप से दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। पुलिस की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं विधिसम्मत जांच का ही परिणाम है कि तीनों अभियुक्त आज भी जेल में हैं।
पुलिस रिमांड के दौरान अभियुक्तों द्वारा यह स्वीकार किया गया कि उन्होंने अंकिता पर "एक्स्ट्रा सर्विस" देने का दबाव बनाया। अंकिता द्वारा इसके लिए सहमति न देने पर आरोपियों द्वारा इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया। कर्मचारियों से पूछताछ में यह भी पुष्टि हुई कि अंकिता मानसिक रूप से परेशान थी तथा वह वहां से जाना चाहती थी, किंतु आरोपियों द्वारा उसे जबरन अपने साथ ले जाया गया। किसी भी कर्मचारी द्वारा अंकिता के सुरक्षित वापस लौटने की पुष्टि नहीं की गई।
उर्मिला सनावर द्वारा फेसबुक लाइव एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ सहित अन्य व्यक्तियों पर लगाए गए आरोपों एवं अंकिता भंडारी प्रकरण से संबंधित कथनों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस द्वारा अलग से SIT का गठन किया गया है। इस संबंध में स्पष्ट किया गया है कि उर्मिला सनावर को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें जांच में सहयोग के लिए नोटिस जारी किया गया है, जिसका अभी तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।
उर्मिला सनावर द्वारा पुलिस से सुरक्षा की मांग की गई है, परंतु उनके द्वारा प्रस्तुत पत्र में कोई स्पष्ट पता अंकित नहीं है। पुलिस ने उनसे अपील की है कि वे जांच में सहयोग हेतु पुलिस के समक्ष उपस्थित हों। यदि उन्हें किसी भी प्रकार के जान-माल के खतरे की आशंका पाई जाती है, तो उन्हें पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाएगी। वर्तमान में उनके विरुद्ध कोई वारंट जारी नहीं किया गया है।












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