2024 चुनाव से पहले "मिशन 75" पर काम करेगी योगी सरकार, जानिए क्या है इसकी प्लानिंग

लखनऊ, 20 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का हर कदम अगले आम चुनाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। उसी कड़ी में अब यूपी के सांस्कृतिक विभाग को एक नई जिम्मेदारी मिली है जिसने इस काम के लिए अयोध्या शोध संस्थान को चुना है। इसके तहत अब यूपी के सभी 75 जिलों की सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत को समेटने वाली और अनछुए ऐतिहासिक पहलुओं को उजागर करने वाली 75 किताबें तैयार की जाएंगी। इन किताबों को तैयार करने का लक्ष्य अगस्त 2023 रखा गया है। इसी दिन ये सभी पुस्तकें रीलीज की जाएंगी। इस कवायद के जरिए योगी सरकार एक बार फिर हर जिले में अपनी पैठ बनाने की कवायद में जुट गई है।

75 जिलों की ऐतिहासिक विरासत को समेटने की कवायद

75 जिलों की ऐतिहासिक विरासत को समेटने की कवायद

योगी सरकार का यह कदम ठीक उसी तरह है जिस तरह पिछली सरकार में वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट को लाँच किया गया था। इसके तहत हर जिले के नामचीन उत्पाद की ब्रांडिंग का जिम्मा खुद सरकार ने उठाया था ठीक उसी तरह अब सरकार ने ऐतिहासिक विरासत को समेटने के लिए यह कवाद शुरू की है। इसके लिए अब अलग अलग जिलों की पहचान के हिसाब से वहां की ऐतिहासिकता को समेटते हुए यह किताबें तैयार की जाएंगी। इन किताबों में खासतौर से जिले में कारगिल शहीदों को भी शामिल किया जाएगा।

हर जिले की इनसाइक्लोपीडिया की तरह होगी ये किताबें

हर जिले की इनसाइक्लोपीडिया की तरह होगी ये किताबें

अयोध्या शोध संस्थान की ओर से तैयार की जाने वाली यह किताबें एक तरह से हर जिले की इनसाइक्लोपीडिया का भी काम करेंगी। इसमें जिले की हर वह जानकारी मौजूद होगी जो लिखने लायक और पढ़ने लायक होगी। इसमें जिले की रोचक कहानियों, स्वतंत्रता संग्राम और कारगिल युद्ध के नायकों और ऐतिहासिक तथ्यों और जिले के प्रमुख नायकों के कहानियों को समेटा जाएगा। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ लवकुश द्विवेदी के मुताबिक 15 अगस्त 2023 तक यह काम पूरा हो जाएगा। प्रदेशवासियों को जश्न ए आजादी का तोहफा होगा। जिसे पाकर लोग अपने आपको गौरवानिवत महसूस करेंगे।

'75 वर्ष-75 जनपद- 75 पुस्तक' थीम पर पूरा होगा यह काम

'75 वर्ष-75 जनपद- 75 पुस्तक' थीम पर पूरा होगा यह काम

शोध संस्थान के निदेशक की माने तो यूपी सांस्कृतिक विभाग की ओर से यह एक अनूठा प्रयास है और इसको एक '75 वर्ष-75 जनपद- 75 पुस्तक' नाम दिया गया है। इस थीम को लेकर विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए हैं। प्रमुख सचिव की माने तो आजादी के बहुत सारे नायकों और उनकी गौरवगाथाओं को लिपिबद्ध नहीं किया गया है इसलिए इस तरह का प्रयास शुरू किया गया है ताकि छोटे बड़े सभी नायकों को उनकी पहचान मिल सके। सबसे रोचक यह है कि इस इतिहास को आने वाली पीढ़ीयों के लिए तैयार किया जा रहा है जो पढ़कर गौरव का अनुभव करेंगी।

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    कारगिल के शहीदों को भी मिलेगी जगह

    कारगिल के शहीदों को भी मिलेगी जगह

    अयोध्या शोध संस्थान के मुताबिक ऐतहासिक नायकों के अलावा कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए नायकों को भी इन पुस्तकों में जगह मिलेगी और उनकी गौरवगाथा को भी पढ़ने का मौका आने वाली पीढ़ीयों को मिलेगा। इन सभी पुस्तकों को डिजिटल भी किया जाएगा ताकि लोग ऑनलाइन भी इसे पढ़ सकें। इसके लिए एक राज्य स्तरीय कमेटी का गठन भी किया गया है जिसमें कई नामचीन हस्तियां शामिल हैं। अलग अलग क्षेत्र के सदस्यों को इसमें पदेन सदस्य भी बनाया गया है जो अपने अनुभव साझा करेंगे।

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