UP News: यूपी में अब दूर होगी डॉक्टरों की कमी, योगी सरकार लेने जा रही ये बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में सरकार ने डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए अब नई कवायद शुरू कर दी है। जल्द ही कुछ शर्तों के साथ चिकित्सकों को निजी प्रेक्टिस करने की छूट दी जा सकती है।

Chief Minister Yogi: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने डॉक्टरों की कमी को देखते हुए अब कुछ शर्तों के साथ राज्य संचालित स्वास्थ्य सुविधाओं में निजी प्रैक्टिस करने की अनुमति दे सकती है। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल लखनऊ के कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड हॉस्पिटल (KSSSCIH) से शुरू हो सकती है।

योगी आदित्यनाथ

KSSSCIH में प्रचलित प्रोत्साहन-आधारित प्रणाली की तरह एक मसौदा तैयार कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, KSSSCIH के डॉक्टर अपने प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहन ले सकते हैं और राजस्व में हिस्सा भी प्राप्त कर सकते हैं। एक बार सफल होने पर, मॉडल को यूपी में चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत अन्य संस्थानों में दोहराया जा सकता है।

इन शर्तों के साथ मिल सकती है मंजूरी

मॉडल के तहत, संस्थान की कमाई का एक बड़ा हिस्सा डॉक्टर को, एक हिस्सा संबंधित विभाग में अनुसंधान परियोजनाओं के लिए और कमाई का एक हिस्सा संस्थान के बुनियादी ढांचे में जाएगा। केएसएससीआईएच के निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान ने कहा, "एक बार मसौदा प्रस्ताव स्वीकृत और लागू हो जाने के बाद, प्रोत्साहन-आधारित प्रणाली के अनुसार नई नियुक्तियां की जाएंगी।"

टाटा अस्पताल का अध्ययन कर रही टीम

KSSSCIH की एक टीम वाराणसी में टाटा अस्पताल मॉडल का अध्ययन करने गई थी। इसके आधार पर और यूपी में जरूरत के आधार पर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। मौजूदा संकाय के बारे में पूछे जाने पर धीमान ने कहा, "मौजूदा संकाय के विकल्पों पर निर्णय राज्य सरकार बाद में लेगी।"

सेवा नियमों में बदलाव की गुंजाइश

धीमान ने कहा कि, सेवा नियमों में बदलाव और निजी प्रैक्टिस या प्रोत्साहन-आधारित कमाई के कार्यान्वयन से चिकित्सा संस्थानों में आने वाले मरीजों को लाभ होगा। यूपी में सरकारी डॉक्टरों की संस्था प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ (पीएमएसए) के महासचिव डॉ. अमित सिंह ने कहा, "संस्थानों के डॉक्टरों को अधिक घंटे काम करने और अधिक मरीजों को देखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

प्रतिभा पलायन रोकने की कोशिश

एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल डॉक्टर्स के महासचिव डॉ. अभिषेक शुक्ला ने कहा कि, काम करने और अधिक कमाने का विकल्प ही डॉक्टरों को निजी क्षेत्र की ओर आकर्षित करता है। यदि यह सरकारी संस्थान में उपलब्ध है, तो प्रतिभा पलायन रुक जाएगा।"

डाक्टरों की कमी से जूझ रही है सरकार

डॉक्टरों की कमी के कारण राज्य सरकार को निजी प्रैक्टिस की अनुमति देने के बारे में सोचना पड़ा। उत्तर प्रदेश में डॉक्टरों के 19,000 स्वीकृत पद हैं, लेकिन राज्य के 75 जिलों में 14,000 डॉक्टर हैं। परिणामस्वरूप, लगभग सभी 167 जिला स्तरीय अस्पतालों और कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ओपीडी पर अत्यधिक दबाव है।

दो दर्जन वरिष्ठ सदस्यों ने किया निजी अस्पतालों का रुख

गौरतलब है कि दो दर्जन वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने निजी अस्पतालों में शामिल होने के लिए दो प्रमुख संस्थानों - केजीएमयू और आरएमएलआईएमएस को छोड़ दिया था। यूपी का पहला मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग लोहिया संस्थान में स्थापित किया गया था, लेकिन इसे स्थापित करने वाले डॉक्टर ने संस्थान छोड़ दिया। केजीएमयू में भी एक दर्जन से अधिक डॉक्टर निजी क्षेत्र में चले गए।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+