OPINION: यूपी में रिकॉर्ड 7.28 मिट्रिक टन धान खरीद के साथ 1428 करोड़ का त्वरित भुगतान, किसानों के चेहरे खिले
उत्तर प्रदेश में खरीफ खरीद वर्ष 2024-25 के तहत इस साल धान की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिसमें विभिन्न एजेंसियों द्वारा पहले ही 7.28 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीद की जा चुकी है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष धान की खरीद में काफी बढ़ोतरी हुई है।
पिछले वर्ष इस अवधि तक 5.79 लाख मीट्रिक टन की खरीद की गई थी। धान की खरीद में यह वृद्धि स्थानीय किसानों को समर्थन देने के सरकार के प्रयास को दर्शाती है, जिसमें अब तक 1.05 लाख से अधिक किसान इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। राज्य सरकार ने किसानों को 1,464 करोड़ रुपये अबतक वितरित कर दिए हैं, ऐसे में सरकार किसानों के भुगतान में किसी भी तरह की देरी नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खरीद प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने में सबसे आगे रहे हैं। उनके निर्देशों का पालन करते हुए, खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी स्थानीय जिला प्रशासन के साथ मिलकर खरीद प्रक्रिया की अखंडता बनाए रखने के लिए खरीद केंद्रों पर नियमित निरीक्षण कर रहे हैं।
आदित्यनाथ ने खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री इस बात को सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसानों को बिना किसी देरी के उनकी फसल की कीमत मिल सके।
सरकार ने खरीद केंद्रों पर बैठने, छाया और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान केंद्रित किया है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने का समग्र अनुभव बेहतर हो सके। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खरीद अवधि 1 अक्टूबर से शुरू हुई और 31 जनवरी, 2025 तक जारी रहने वाली है, जिसमें कई जिले शामिल हैं।
वहीं प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में 1 नवंबर से खरीद शुरू हुई और फरवरी के अंत तक जारी रहेगी। धान का समर्थन मूल्य 2,300 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिसमें उतराई, छनाई और सफाई लागत के लिए अतिरिक्त 20 रुपये प्रति क्विंटल आवंटित किए गए हैं।
पूरे राज्य में किसानों द्वारा धान की बिक्री को सुविधाजनक बनाने के लिए खाद्य एवं रसद विभाग तथा अन्य एजेंसियों द्वारा संचालित 4,215 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होते हैं, जिससे बटाईदारों को आवश्यक पंजीकरण और नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी करने के बाद अपनी उपज बेचने का अवसर मिलता है।
किसानों के लिए परेशानी मुक्त अनुभव सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयासों में सहायता के लिए एक टोल-फ्री नंबर (18001800150) का प्रावधान शामिल है। इसके साथ ही किसान किसी भी समस्या के लिए खाद्य विपणन अधिकारी, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी या विपणन निरीक्षकों से संपर्क कर सकते हैं।












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