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2018 में उत्तर प्रदेश की राजनीति, भाजपा की हार, महागठबंधन की उम्मीद और मॉब लिंचिंग

दिल्ली। 2018 में उत्तर प्रदेश की राजनीति ने एक तरफ भाजपा को कई झटके दिए वहीं सपा, बसपा और रालोद जैसे विपक्षी दलों को यह भरोसा दिया कि अगर वे साथ आएं तो 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को धूल चटा सकते हैं। 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में फूलपुर, गोरखपुर और कैराना जैसी अहम लोकसभा सीटें गंवाने के बाद भाजपा को सोचना पड़ गया और राजा भैया व शिवपाल जैसे मोहरों को विपक्षियों के खिलाफ खड़ा करने की चाल पर्दे के पीछे से चलनी पड़ गई। 2018 में यूपी में काफी एनकाउंटर हुए जिसमें अपराधियों को मार गिराने का दावा करनेवाली पुलिस पर कुछ बेगुनाहों के खून के भी आरोप लगे। वहीं दिल दहलाने वाली भीड़ हिंसा भी हुईं। मॉब लिंचिंग में यूपी पुलिस के दो जवानों की जान चली गई। आइए एक नजर डालते हैं यूपी की अहम राजनीतिक घटनाओं पर-

सरकारी भवनों पर भगवा रंग

सरकारी भवनों पर भगवा रंग

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद सरकारी इमारतों का भगवाकरण शुरू हुआ जो 2018 में भी जारी रहा। इस भगवाकरण का सबसे चर्चित मामला हज हाउस का रहा। लखनऊ स्थित हज हाउस पर जब भगवा रंग चढ़ाया गया तो विपक्षी नेताओं और उलेमाओं ने इसका काफी विरोध किया। इस विरोध को देखते हुए हज हाउस से भगवा को हटाकर सफेत रंग से पुतवाया गया। वैसे जिलों के स्कूलों, अस्पतालों सहित अन्य इमारतों पर भगवा रंग चढ़ना 2018 के अंत तक जारी रहा।

तिरंगा यात्रा और कासगंज हिंसा

तिरंगा यात्रा और कासगंज हिंसा

26 जनवरी 2018 को देश में गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था, उधर कासगंज सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गया। वहां कुछ संगठनों ने तिरंगा यात्रा निकाली जिस दौरान दूसरे समुदाय से झड़प और फायरिंग में युवक चंदन गुप्ता की मौत हो गई। इसके बाद हिंसा और ज्यादा बढ़ गई। हलांकि इस मामले में मुख्यारोपी समेत 112 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है लेकिन योगी सरकार को विपक्षी पार्टियों की आलोचना का सामना करना पड़ा।

चार उपचुनाव, सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की जीत

चार उपचुनाव, सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की जीत

2018 में यूपी में तीन अहम लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए जिसमें भाजपा की हार हुई। एक विधानसभा सीट उपचुनाव में भी विपक्षी गठबंधन की जीत हुई। बसपा ने फूलपुर और गोरखपुर में सपा को समर्थन दिया और मुख्यमंत्री योगी व उपमुख्यमंत्री केशव का गढ़ भाजपा से छिन गया। वहीं कैराना में सपा-बसपा-कांग्रेस-रालोद के गठबंधन ने भाजपा को हरा दिया। नूरपुर में भी इसी गठबंधन की ताकत से सपा उम्मीदवार की जीत हुई। इन उपचुनावों ने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में महागठबंधन बनने की संभावना को हवा दे दी लेकिन यह इतना आसान नहीं। बसपा, सपा और कांग्रेस की राजनीति की अपनी-अपनी मजबूरियां हैं जिस वजह से फिलहाल अभी यह साफ नहीं है कि महागठबंधन संभव हो पाएगा या नहीं?

राम मंदिर निर्माण आंदोलन की निकल गई हवा!

राम मंदिर निर्माण आंदोलन की निकल गई हवा!

2018 में सालभर राम मंदिर निर्माण को लेकर हिंदू संगठनों और भाजपा नेताओं की तरफ से बयानबाजी होती रही। 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पांच राज्यों में चुनाव हुए जिसमें से तीन अहम राज्यों, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सत्ता भाजपा से छिन गई। इन राज्यों में चुनावों से पहले अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा गरमाया हुआ था। हिंदू संगठन के नेताओं और संतों की तरफ से धर्मसंसद करने से लेकर आत्मदाह करने तक की चेतावनी सरकार को दी जा रही थी। राम मंदिर पर शीतकालीन सत्र में अध्यादेश लाने का दबाव सरकार पर बनाया जा रहा था। राज्यों में हिंदुत्व के मुद्दे को भुनाने के लिए योगी आदित्यनाथ की कई रैलियां हुईं। लेकिन राज्यों में हार के बाद राम मंदिर निर्माण आंदोलन ठंडा पड़ता नजर आ रहा है। दिसंबर में ही भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राम मंदिर पर अध्यादेश से भाजपा को नुकसान होगा। वहीं राज्यों में हार के बाद राकांपा के मुखिया शरद पवार ने कहा कि भाजपा अगर राम मंदिर का मुद्दा 2019 में भी उठाएगी तो उसको फायदा नहीं होगा, इसे लोग नहीं स्वीकारेंगे। फिलहाल राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

ओमप्रकाश राजभर- सहयोग और विरोध की राजनीति

ओमप्रकाश राजभर- सहयोग और विरोध की राजनीति

भाजपा के गठबंधन सहयोगी सुभासपा के मुखिया और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर 2018 में अपने बगावती और विरोधी बयानों के लिए सुर्खियों में रहे। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार और यूपी में अपनी ही सरकार की नीतियों की काफी आलोचना की। दिसंबर तक आते-आते भाजपा से रिश्तों में खटास इतनी बढ़ी कि उन्होंने न सिर्फ लोकसभा चुनाव में यूपी के सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की बात कह डाली बल्कि गाजीपुर और वाराणसी में पीएम मोदी के दौरे का बहिष्कार किया। पीएम के दौरे के दौरान सुभासपा कार्यकर्ताओं ने गाजीपुर और वाराणसी में विरोध प्रदर्शन भी किया। दिसंबर के दौरे में पीएम मोदी ने महाराज सुहेलदेव पर डाक टिकट जारी कर राजभरों को रिझाने का दांव खेला, सुभासपा के वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश की। ओमप्रकाश राजभर खुद को पूर्वांचल में राजभरों के इकलौते प्रतिनिधि के तौर पर घोषित करते आए हैं। भाजपा उनकी काट तलाशने में लगी हुई है।

उन्नाव गैंगरेप-कुलदीप सिंह सेंगर

उन्नाव गैंगरेप-कुलदीप सिंह सेंगर

2018 के अप्रैल में उन्नाव गैंगरेप की घटना तब सुर्खियों में आई जब पीड़िता ने लखनऊ में सीएम योगी के आवास के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की। उसका आरोप था कि भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके साथ गैंगरेप किया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस हिरासत में पिता की मौत की खबर आई जिसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर के भाई और अन्य पर पिटाई का आरोप लगा। फिलहाल भाजपा विधायक समेत सभी आरोपी जेल में हैं और मामले की जांच सीबीआई कर रही है। इस घटना की वजह से योगी सरकार को विपक्षियों की आलोचना का सामना करना पड़ा।

रेलवे स्टेशन, शहरों के नाम में बदलाव

रेलवे स्टेशन, शहरों के नाम में बदलाव

यूपी में योगी सरकार ने इस साल कुछ शहरों और रेलवे स्टेशन के नाम बदल दिए। जैसे मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया। वहीं इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और फैजाबाद का नाम अयोध्या कर दिया गया। नामों में बदलाव को लेकर काफी विवाद हुआ। इलाहाबाद के नाम परिवर्तन के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई जिसके बाद योगी सरकार को इस पर सफाई देनी पड़ी। वैसे विश्लेषकों को कहना है कि पांच राज्यों में चुनाव से पहले यह सियासी दांव था जिसका लाभ भाजपा को नहीं मिल पाया।

एनकाउंटर पर राजनीति - विवेक तिवारी मर्डर केस

एनकाउंटर पर राजनीति - विवेक तिवारी मर्डर केस

सरकार में आऩे के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपराधियों से कड़ाई से निपटने के लिए एनकाउंटर करने का निर्देश पुलिस को दिया था जिसके बाद यूपी में मुठभेड़ों की बाढ़ आ गई। इस पर सरकार की काफी खिंचाई भी हुई। विरोधी दल सपा का कहना है कि एनकाउंटर की आड़ में सरकार अपनी नाकामी छुपा रही है। एनकाउंटर में आम लोगों के अलावा अल्पसंकख्यंकों, किसानों, दलितों, पिछड़ी जाति के लोगों को निशाना बनाने के आरोप भी विपक्षियों ने लगाए। फर्जी एनकाउंटर के आरोप भी लगे। मथुरा में एनकाउंटर के दौरान पुलिस की गोली से एक बच्चे की मौत की खबर आई। इसके बाद सबसे बड़ा मामला लखनऊ में हुआ जिसमें ऐप्पल के एरिया मैनेजर को पुलिसकर्मी ने इसलिए गोली मार दी क्योंकि उसने एसयूवी नहीं रोकी थी। आरोपी पुलिसकर्मियों के बचाव में अन्य पुलिसवाले आए लेकिन मामला गरमाने के बाद दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया। अखिलेश यादव लगातार अपराधियों को ठोकने की नीति पर तंज कसते रहे हैं।

शिवपाल यादव, राजा भैया की नई पार्टी

शिवपाल यादव, राजा भैया की नई पार्टी

इस साल राजा भैया ने जनसत्ता दल और शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी पार्टी बना ली। यूपी की राजनीति की ये बड़ी घटना है। यूपी में तीन उपचुनावों में तीन लोकसभा सीटों से हाथ धोने वाली भाजपा के लिए राजा भैया और शिवपाल दोनों अहम हैं। बसपा, सपा, रालोद और कांग्रेस जैसी पार्टियों के बीच अगर कोई गठबंधन बनता है तो उससे लड़ना अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। राजा भैया की भाजपा से नजदीकियां तो पहले से चर्चा में है वहीं सियासी गलियारों में यह कहा जा रहा है कि शिवपाल की पार्टी बनवाने में भाजपा का हाथ रहा। राजा भैया और शिवपाल दोनों यूपी में भाजपा के लिए अहम मोहरे हैं क्योंकि इन दोनों का अपने-अपने इलाकों में काफी दबदबा है और ये विरोधियों के खिलाफ चुनाव में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

बंगला पर राजनीति

बंगला पर राजनीति

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लखनऊ में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपना सरकारी बंगला खाली करना पड़ा। इस दौरान खबर आई कि अखिलेश यादव ने जिस बंगले को खाली किया उसमें काफी तोड़-फोड़ की गई। यह राजनीतिक मुद्दा बना और अखिलेश यादव पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे वहीं सपा ने कहा कि उपचुनाव में हार का बदला लेने के लिए खुद सरकार ने तोड़-फोड़ कराई है। इस मामले पर सरकार ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी। बंगला पर दूसरी राजनीति तब दिखी जब मायावती का खाली किया बंगला सरकार ने शिवपाल को आवंटित कर दिया। इससे शिवपाल और भाजपा के बीच सांठगांठ की चर्चा गर्म हो गई। शिवपाल आनेवाले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के लिए काफी अहम हैं क्योंकि वो सपा का वोट काट सकते हैं।

दलित पर राजनीति

दलित पर राजनीति

2018 में उत्तर प्रदेश में दलित को लेकर काफी राजनीति हुई। आखिरी महीनों में हुए राज्यों के चुनाव के दौरान हनुमान को दलित बताने का सीएम योगी का बयान काफी चर्चित रहा। दलित प्रधान के घर सीएम योगी के भोजन करने का मामला भी सुर्खियों में रहा। जेल से रिहा किए जाने पर दलितों के संगठन भीम आर्मी के युवा मुखिया चंद्रशेखर रावण ने इसे भाजपा की साजिश बताया और मायावती को बुआ कहा। वहीं मायावती ने चंद्रशेखर को इस बात के लिए लताड़ा और कहा कि उनका रावण से कोई रिश्ता नहीं है। भीम आर्मी ने महागठबंधन को समर्थन देने का एलान किया है। साल का अंत होते-होते भाजपा का दलित चेहरा रहीं सांसद सावित्री बाई फुले ने पार्टी छोड़ दी और खबर है कि वो सपा ज्वाइन कर रही हैं। यह भाजपा के लिए एक झटका है।

गाय और बुलंदशहर हिंसा

गाय और बुलंदशहर हिंसा

दिसंबर के पहले हफ्ते में बुलंदशहर के स्याना में गाय पर ऐसी हिंसा हुई जिसने देश को झकझोर दिया। गोकशी की अफवाह फैलने पर भड़के लोगों की हिंसक भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और युवक सुमित को मार डाला। इंस्पेक्टर सुबोध अखलाक मॉब लिंचिंग केस की जांच कर रहे थे और वो खुद मॉब लिंचिंग के शिकार हो गए। बुलंदशहर में हुई घटना पर विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर हुआ। सीएम योगी ने इसे राजनीतिक साजिश बताया और गोकशी करनेवालों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए लेकिन इंस्पेक्टर की मौत पर कुछ खास नहीं कहा जिस पर उनकी आलोचना हुई। विपक्षी दलों के नेताओं ने हिंसा के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया। इस मामले पर नसीरुद्दीन शाह का बयान चर्चित हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि आज इंसान की जान से ज्यादा गाय की जान की कीमत हो गई है।

आरक्षण और गाजीपुर हिंसा

आरक्षण और गाजीपुर हिंसा

पिछड़े वर्गों में अपनी पैठ जमाने के लिए उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण में बदलाव करने की कोशिश में है। इसमें ओबीसी के भीतर उपजातियों को यादव और कुर्मी से ज्यादा आरक्षण देने के लिए सरकार ने एक कमेटी का गठन किया है। इस तरह के आरक्षण की मांग ओमप्रकाश राजभर की पार्टी करती रही है। दिसंबर के आखिरी सप्ताह में गाजीपुर में पीएम मोदी की रैली के बाद जो निषाद पार्टी आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही थी, वही शाम होते-होते हिंसक हो गई और एक पुलिसकर्मी को पीट-पीटकर मार डाला। यूपी को 2018 में मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने शर्मसार किया।

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