आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में मुस्लिम वोटरों के बिखराव से बिगड़ेगा समाजवादी पार्टी का खेल ?
लखनऊ, 20 जून: उत्तर प्रदेश में रामपुर और आजमगढ़ में लोकसभा उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। 23 जून को दोनों सीटों पर वोटिंग होनी है जबकि 21 जून यानी मंगलवार को इन सीटों पर चुनाव प्रचार थम जाएगा। आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव चुनाव मैदान में हैं लेकिन उनको कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अखिलेश को इस बात का डर सता रहा है कि जिस मुस्लिम वोटरों के भरोसे वह विधानसभा चुनाव में 111 सीटें हासिल करने में सफल रहे हैं यदि वही उनसे छिटक जाएगा तो फिर जीत कैसे सुनिश्चित होगी। राजनीतिक पंडितों की माने तो बसपा के उम्मीदवार शाहआलम उर्फ गुडुडु जमाली यदि मुस्लिम वोट बैंक को साधने में सफल रहे तो दलितों के सहारे उनकी जीत की नैया पार लग सकती है।

अखिलेश को डर कहीं मुस्लिम वोट बैंक में न हो बिखराव
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव महज तीन महीने पहले ही समाप्त हुए हैं। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी को मुस्लिम बिरादरी का भरपूर साथ मिला था जिसकी वजह से उनकी सीटें दो गुनी से ज्यादा बढ़ गईं थीं। मुसलमानों के समर्थका आलम यह था कि सपा के 111 विधायकों में 34 तो मुस्लिम समुदाय के हैं। विधानसभा चुनाव में सपा को आजमगढ़ लोकसभा की सभी पांच सीटों पर जीत हासिल हुई थी लेकिन इस बार मायावती ने सपा का समीकरण बिगाड़ दिया है। मायावती ने आजमगढ़ में मुस्लिम उम्मीदवार देकर अखिलेश की परेशानी बढ़ा दी है। अब अखिलेश को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं मुस्लिमों में बिखराव हुआ तो आजमगढ़ की सीट हाथ से निकल सकती है।

गुड्डु जमाली की मुस्लिम समुदाय के बीच है काफी लोकप्रियता
आजमगढ़ के लोकसभा उपचुनाव में मायावती ने शाहआलम उर्फ गुड्डु जमाली को टिकट दिया है। जमाली एक तो बहुत बड़े उद्योगपति हैं और पैसेवाले भी हैं। कोरोना माहामारी के दौरान जमाली ने मुस्लिम समुदाय के भीतर काफी काम किया था। मुस्लिमों में उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है। विधानसभा चुनाव में हालांकि गुडुडु जमाली को हार मिली थी लेकिन इससे उनका कद कम नहीं हुआ है। आजमगढ़ की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले अजय मिश्रा कहते हैं कि सपा की जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि मुस्लिम समुदाय जमाली का साथ देता है या नहीं। यदि मुस्लिम जमाली के साथ गया तो सपा की हार निश्चित है।

मुस्लिम समाज उसी को वोट करेगा जो बीजेपी को हराएगा
वरिष्ठ पत्रकार अजय मिश्रा की माने तो आजमगढ़ में मुस्लिम वोटरों के मिजाज को भांपना इतना आसान नहीं है। लेकिन एक बात तो तय है कि मुस्लिम वोट बैंक उसी तरफ करवट लेगा जहां उसे बीजेपी की हार नजर आएगी। यानी अगर गुड्डु जमाली उस पोजिशन में रहेंगे कि वह बीजेपी को हरा पाएं तो ही मुस्लिम उनपर विश्वास जताएगा। हालांकि जमाली के साथ अपनी लोकप्रियता भी है जिसके बूते वो मुस्लिमों को साधने में कामयाब हो सकते हैं। बसपा यहां दलित-मुस्लिम गठजोड़ की मदद से सपा को पटकनी दे सकती है। लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है कि दलित पूरी तरह से जमाली के साथ जाएगा या नहीं इस बात को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है।

यादव वोट बैँक में पहले से ही सेंध लगा रहे दिनेश लाल यादवउर्फ निरहुआ
समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव की मुश्किलें दो तरफा हैं। एक तो उन्हें मुस्लिम वोटरों में बिखराव का डर सता रहा है वही दूसरी ओर बीजेपी ने दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को मैदान में उतारकर उनके सामने दोहरी चुनौती पेश की है क्योंकि यादव वोट बैँक सपा का कोर वोटर माना जाता है। यादव वोट बैंक में यदि निरहुआ ने सेंधमारी की तो भी सपा के लिए राह कठिन हो जाएगी यानी अखिलेश के सामने चुनौती इस बात की है तो वह मुस्लिम ओर यादव वोट बैंक को पूरी तरह से अपने पक्ष में करने में कामयाब हो सकें क्योंकि इन दोनों वोट बैंक में यदि बिखराव हुआ तो धर्मेंद्र यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।












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