क्यों योगी आदित्यनाथ का मथुरा से चुनाव लड़ना भाजपा के लिए मास्टरस्ट्रोक होगा ? जानिए

लखनऊ, 4 जनवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। सवाल सिर्फ ये है कि वह किस सीट से चुनावी किस्मत आजमाएंगे। फिलहाल उनके मथुरा सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें ज्यादा चल रही हैं। इसकी वजह साफ है कि राम जन्मभूमि की तरह श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघ परिवार के एजेंडे में हमेशा से रहा है। लगे हाथ भाजपा का मजबूत गढ़ माने जाने वाला पश्चिमी यूपी का समीकरण भी ठीक हो सकता है, जो कृषि कानूनों की वजह से गड़बड़ बताया जा रहा है। वैसे अयोध्या, गोरखपुर के साथ-साथ गाजियाबाद के भी नाम लिए जा रहे हैं। हालांकि, खुद मुख्यमंत्री योगी ने यह फैसला पार्टी पर छोड़ रखा है।

संघ परिवार के एजेंडे में रहा है मथुरा

संघ परिवार के एजेंडे में रहा है मथुरा

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए मथुरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने की मांग भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने जिस अंदाज में की है, उससे संकेत बहुत ही स्पष्ट मिल रहे हैं। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखे पत्र में न सिर्फ इसे ब्रज क्षेत्र की जनता की इच्छा बताया है, बल्कि उन्होंने खुद भगवान श्रीकृष्ण के भी सपने में आकर उन्हें पार्टी नेतृत्व से यही कहने की बात कही है। हालांकि, खुद सीएम योगी ने अपने लिए सीट तय करने का फैसला पार्टी पर छोड़ा है, लेकिन बीजेपी के एक यादव नेता की ओर से इस संबंध में लिखी गई यह चिट्ठी काफी मायने रखती है। भाजपा और संघ परिवार के लिए मथुरा कितना महत्वपूर्ण है, इसका उदाहरण दिसंबर, 1992 के बाद के इनके उस नारे में दिखता है कि 'अयोध्या की जीत हमारी है, काशी-मथुरा की बारी है।'

सीएम योगी भी देते रहे हैं संकेत

सीएम योगी भी देते रहे हैं संकेत

मतलब, हरनाथ सिंह यादव ने भले ही भगवान श्री कृष्ण का संदेश पार्टी तक पहुंचाने की बात कही हो, लेकिन ब्रज भूमि की पिच तैयार करने में खुद सीएम योगी भी पीछे नहीं हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था, "हमने कहा था अयोध्या में प्रभु राम के भव्य मंदिर का कार्य प्रारंभ कराएंगे, मोदी जी ने कार्य प्रारंभ करा दिया है....अब काशी में भगवान विश्वनाथ का धाम भी भव्य रूप से बन रहा है.....और फिर मथुरा-वृंदावन कैसे छूट जाएगा। वहां पर भी काम भव्यता के साथ आगे बढ़ चुका है।" मथुरा को लेकर तैयारी मुख्यमंत्री आदित्यनाथ पहले से ही शुरू कर चुके हैं। पिछले साल सितंबर में यूपी सरकार ने मथुरा-वृंदावन के 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को 'तीर्थ स्थल' घोषित किया है। इसके तहत मथुरा नगर निगम के 22 वार्ड में मांस और शराब की बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई है। योगी सरकार मथुरा में भगवान कृष्ण और राधारानी से जुड़े सात और स्थानों को पहले ही तीर्थ स्थल घोषित कर चुकी थी।

रालोद-सपा गठबंधन को दी जा सकती है चुनौती

रालोद-सपा गठबंधन को दी जा सकती है चुनौती

पूर्वांचल का गोरखपुर इलाका 1998 से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ रहा है। वह पांच बार यहां से लोकसभा जा चुके हैं। वाराणसी से दो बार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसद चुने जा रहे हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण तो भाजपा के शुरुआती एजेंडे में है और वह अब जमीन पर साकार हो रहा है। ऐसे में जानकार मानते हैं कि मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से योगी आदित्यनाथ का चुनाव लड़ना पार्टी के लिए बहुत बड़ा कदम हो सकता है। क्योंकि, पश्चिमी यूपी का यह इलाका किसान आंदोलन की वजह से बीजेपी के रणनीतिकारों को थोड़ा परेशान कर रहा है। वरिष्ठ पत्रकार और यूपी के चुनावी समीकरणों पर काम करने वाले रंजन कुमार ने वन इंडिया से खास बातचीत में कहा है, "आरएलडी-सपा के पास इलाके में कोई बड़ा चेहरा अब है नहीं। योगी बड़ा चेहरा हैं। मथुरा से योगी के चुनाव लड़ने का मतलब दो बड़ा संदेश है। मांट विधानसभा से आरएलडी जीतती भी थी। यह जाटलैंड है और मथुरा की वजह से यहां से धर्म से जुड़ा एक सांकेतिक संकेत दिया जा सकता है। आप ने राम मंदिर बना ही दिया। काशी में काम करवा ही दिया। तो बचा क्या मथुरा।"

योगी का मथुरा से चुनाव लड़ना क्यों मास्टरस्ट्रोक होगा ?

योगी का मथुरा से चुनाव लड़ना क्यों मास्टरस्ट्रोक होगा ?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 76 सीटें हैं। 2017 में बीजेपी ने इनमें से 66 पर कब्जा कर लिया था। तब इसकी वजह यह मानी गई कि पार्टी को जाट समाज का पूरा समर्थन मिला। लेकिन, किसान आंदोलन के बाद से आरएलडी और समाजवादी पार्टी फिर से चुनावों में जाट और मुसलमानों को एकजुट करने के अभियान में लगी है। जाटलैंड के अबतक के सबसे बड़े नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को इसमें पूरी कामयाबी हासिल हुई थी। हालांकि, केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए हैं। लेकिन, अभी भी भाजपा जाटों के पिछले तीनों चुनावों वाला ही समर्थन मिल पाने को लेकर कहीं ना कहीं आशंकित जरूर दिख रही है। रंजन कुमार कहते हैं, "चरण सिंह के जमाने वाली बात अब नहीं रही, जिन्होंने जाट और मुसलमानों को जोड़ लिया था। अब जाटों को राष्ट्रवाद वाली लाइन ज्यादा पसंद आती है। चरण सिंह में किसान नेता के नाम पर स्वीकार्यता थी।" अगर बीजेपी योगी आदित्यनाथ को पश्चिमी यूपी से चुनाव लड़वाती है और खासकर मथुरा सीट से तो एक तरह से पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक वह अपने उस समीकरण (हिंदुत्व) को मजबूत कर सकती है, जिसको भेद पाना सपा-रालोद गठबंधन को भारी पड़ सकता है।

आरएलडी-सपा के पास इलाके में कोई बड़ा चेहरा अब है नहीं। योगी बड़ा चेहरा हैं।..... यह जाटलैंड है और मथुरा की वजह से यहां से धर्म से जुड़ा एक सांकेतिक संकेत दिया जा सकता है।

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