सुपरस्टार रजनीकांत को अचानक क्यों आई यूपी की याद, क्या हैं सियासी मायने?
Rajinikanth's UP visit: सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) बीते शनिवार को फिल्म 'जेलर' की स्क्रीनिंग करने के लिए यूपी की राजधानी लखनऊ (Lucknow) पहुंचे थे। फिल्म के प्रमोशन के बाद रजनीकांत तुरंत वापस नहीं लौटे बल्कि यूपी में उन्होंने पूरे तीन दिन बिताए।
फिल्म की स्क्रीनिंग के तुरंत बाद रजनीकांत पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले। हालांकि इसके बाद रजनीकांत सपा मुखिया अखिलेश यादव और जनसत्ता दल के अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया से मिलने उनके घर भी पहुंचे थे। रजनीकांत जिनकी अपनी राजनीतिक पार्टी भी है लोकसभा चुनाव 2024 से पहले उनका यूपी के प्रति अचानक उमड़ा प्रेम और यूपी के दिग्गज नेताओं से मुलाकात के क्या सियासी मायने हैं? आइए जानते हैं....

'थलाइवा' स्टार रजनीकांत जो दक्षिण भारत के सुपरस्टार हैं जो साउथ में भगवान की तरह पूजे जाते हैं, वो लखनऊ में इतने सालों में पहली बाद अपनी किसी फिल्म के प्रमोशन के लिए पहुंचे थे। फिल्म के प्रमोशन से ज्यादा रजनीकांत सुर्खियों में तब आए जब 72 वर्षीय रजनीकांत ने अपने से उम्र में काफी छोटे 52 वर्षीय यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलते ही उनके पैर छुएं। हालांकि रजनीकांत ने सफाई दी है कि वो सभी सन्यासी के पैर छूते हैं इसलिए उन्होंने योगी आदित्यनाथ के पैर छूकर आर्शीवाद लिया।
भले ही रजनीकांत इस यूपी यात्रा को सियासी रंग देने से गुरेज़ कर रहे हैं लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर जमकर चर्चा है कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले अचानक से सुपरस्टार के लिए यूपी क्यों अहम हो गया?
याद रहे रजनीकांत ने लोकसभा चुनाव 2019 से पहले तमिलनाडु की राजनीति में उतरने का मन बनाया था, हालांकि वो चुनाव नहीं लड़े थे। वहीं अब फिर आम चुनाव से ठीक पहले साउथ से नार्थ में आकर क्या वो कोई राजनीतिक गणित लगा रहे हैं? इसके बारे में राजनीति के विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह का क्या कहना है आइए जानते हैं।
वन इंडिया को दिए इंटरव्यू में नवेद शिकोह ने कहा दक्षिण भारत में भगवान की तरह पूजे जाने वाले अभिनेता रजनीकांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पैर छू रहे हैं, इस वायरल तस्वीर के निहितार्थ को समझने के लिए नौ साल पुराने फ्लैशबैक में ले चलते हैं।
गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पूरे देश में सिर चढ़कर बोल रही थी। 2014 में एनडीए ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का दावेदार घोषित कर दिया था तब मोदी सबसे पहले साउथ के सुपरस्टार अभिनेता रजनीकांत से भेंट करने चेन्नई उनके आवास पंहुचे थे।
मुलाकात के बाद रजनीकांत ने कहा था- मोदी एक ग्रेट लीडर और अच्छे प्रशासक हैं। मैं उन्हें सफल होने की शुभकामनाएं देता हूं। जिस हस्ती ने मोदी को प्रधानमंत्री बनने का आर्शीवाद दिया वही हस्ती योगी से आर्शीवाद ले रही है।अंदाजा लगाइए योगी का क़द यूपी के मुख्यमंत्री पद से कहीं ऊपर है।
नवेद शिकोह आगे कहते है कि वहीं अब रजनीकांत अपनी फिल्म जेलर की स्क्रीनिंग के लिए आए और अपने से पच्चीस साल बड़े योगी आदित्यननाथ के रजनीकांत ने पैर छूकर आर्शीवाद लिया। साउथ के सुपरस्टार की ये तस्वीर देखकर यूपी वालों का गर्व से सीना फूल गया। चर्चाएं होने लगीं कि बाबा बुल्डोजर का रुतबा मुख्यमंत्री से कहीं ऊपर है। वो योगी हैं, महंत है, संन्यासी हैं और बेहद लोकप्रिय व भरोसेमंद राष्ट्रीय स्तर के सर्वश्रेष्ठ नेता हैं।
नवेद शिकोह ने कहा देश-दुनिया के लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने से पहले समर्थन और शुभकामनाएं लेने के लिए जिनके आवास जाना पड़ा था वो रजनीकांत योगी आदित्यनाथ से आर्शीवाद लेने फाइव केडी आएं तो मानना पड़ेगा कि यूपी के मुख्यमंत्री के बढ़ते कद के ग्राफ और लोकप्रियता का क्या आलम है। चार दशकों से जिस एक्टर को साउथ के लोग जिसे भगवान मानते है वो खुद योगी आदित्यनाथ का दीवाना है।
नवेद शिकोह कहते हैं रजनीकांत की तीन खासियतें हैं। एक ये कि लोगों में उनकी इतनी दीवानगी है कि दक्षिण भारत में उन्हें भगवान की तरह पूजा जाता हैं। दूसरी खास बात ये कि सियासत में उनका दखल रहा है। जितने बड़े अभिनेता हैं उतने बड़े वो नेता भी बनना चाहते हैं। तीसरी बात ये कि वो भारत के सबसे बड़े एक्शन हीरो हैं। योगी से उनका लगाव शायद इसी लिए है। रजनीकांत पर्दे पर एक्शन दिखाते हैं और योगी हकीकत में। बतौर मुख्यमंत्री इनका त्वरित एक्शन यूपी की गुड गवर्नेंस का कारण है।
नावेद शिकोह कहते हैं साउथ का हर राजनीतिक दल रजनीकांत की एहमियत समझता है और रजनीकांत साउथ की राजनीति में किसी ना किसी रूप से महत्वपूर्ण दखल रखते हैं। नवेद शिकोह ने कहा चर्चाएं ये भी होने लगी हैं कि दक्षिण भारत की सियासत और हुकुमतों को बेहतर चलाने के लिए गुरुमंत्र रूपी आशीर्वाद और वरदान लेने के लिए रजनीकांत योगी से मिलने आए थे। रजनीकांत चाहते हैं कि साउथ की सरकारें चलाने वाले सियासतदां भी यूपी के फार्मूले पर सरकारें चलाएं।
हालांकि रजनीकांत के यूपी भ्रमण को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। दक्षिण की राजनीति में विशेष दखल रखने वाले रजनीकांत उत्तर भारत में भी अपनी पंहुच का राजनीतक विस्तार करना चाहते हैं या फिर वो अपने खुद के राजनीतिक दल को स्थापित करने के इरादे से देशभर की राजनीति की जमीनी हकीकत से रुबरू होना चाहते है। कहा ये भी जा रहा है कि यूपी में बनने जा रही फिल्म सिटी मे कोई बड़ी जिम्मेदारी पाने के ख्वाहिशमंद भी हो सकते हैं।












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