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IAS Saumya Agarwal कौन हैं? माघ मेले में बदसलूकी झेलने वाले शंकराचार्य ने कहा- ये हमारी आंखों से गिर गईं

Who Is IAS Saumya Agarwal: प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई बदसलूकी ने पूरे देश में विवाद खड़ा कर दिया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के दौरान पुलिस ने उन्हें रोका, उनके अनुयायियों के साथ धक्का-मुक्की की और बालों से घसीट-घसीटकर पुलिस ने पीटा।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में प्रयागराज की मंडलायुक्त आईएएस सौम्या अग्रवाल की फोटो दिखाते हुए कहा, 'ये हमारी आंखों से गिर गईं। ये प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल हैं। इनके सामने ही सारी घटना हुई। अगर ये चाहतीं तो स्थिति कंट्रोल कर सकती थीं, लेकिन इन्होंने तमाशा देखा।' आखिर कौन हैं ये IAS? क्या थी घटना? आइए जानते हैं...

IAS Saumya Agarwal

शंकराचार्य ने अब तक स्नान नहीं किया और कहा है कि बदसलूकी करने वाले अफसर ससम्मान उन्हें ले जाएंगे तभी वे संगम जाएंगे। प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शंकराचार्य ने पूर्व अनुमति नहीं ली और सुरक्षा कारणों से रथ प्रवेश रोका गया।

घटना क्या है: मौनी अमावस्या पर विवाद की पूरी कहानी

माघ मेला 2026 (Magh Mela 2026) के दौरान मौनी अमावस्या पर लाखों श्रद्धालु संगम स्नान के लिए पहुंचे। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati) अपने रथ और करीब 200 अनुयायियों के साथ संगम पहुंचे। सुबह 1 बजे से 10 बजे के बीच भारी भीड़ और कोहरे के कारण रथ प्रवेश सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक माना गया। प्रशासन ने उन्हें पालकी से उतरकर पैदल जाने को कहा।

इससे नाराज उनके अनुयायियों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई, धक्का-मुक्की हुई और बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचा। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की, बिना वर्दी वाले पुलिसकर्मी उन्हें ले गए और भगदड़ मचाकर जान से मारने की साजिश रची। उन्होंने पुलिसकर्मियों की फोटो दिखाकर नाराजगी जताई।

IAS Saumya Agarwal ने बताया असल में क्या हुआ था?

IAS Saumya Agarwal

प्रयागराज मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल (Prayagraj Divisional Commissioner IAS Saumya Agarwal) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि किसी को स्नान से नहीं रोका गया। शंकराचार्य ने पूर्व अनुमति नहीं ली, संगम क्षेत्र नो-व्हीकल जोन है और रथ/पालकी प्रवेश परंपरा के खिलाफ है। उनके अनुयायियों ने बैरिकेड्स तोड़े और तीन घंटे तक रास्ता ब्लॉक किया, जिससे आम श्रद्धालुओं को असुविधा हुई। पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने मारपीट के आरोपों को झूठा बताया। प्रशासन ने कहा कि 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहले ही स्नान कर चुके थे। शंकराचार्य अब अनशन पर बैठे हैं और धरने पर हैं। मेला प्रशासन उन्हें शंकराचार्य नहीं मानता और नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

Who Is IAS Saumya Agarwal: आईएएस सौम्या अग्रवाल कौन हैं? सॉफ्टवेयर इंजीनियर से मंडलायुक्त तक का सफर

सौम्या अग्रवाल 2008 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 12 नवंबर 1982 को हुआ। बचपन लखनऊ में बीता, जहां पिता ज्ञानचंद अग्रवाल रेलवे में सिविल इंजीनियर थे। परिवार आलमबाग रेलवे कॉलोनी में रहता था। उन्होंने सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की। दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन किया। 2004 में पुणे की प्राइवेट कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनीं। कंपनी ने उन्हें प्रोजेक्ट के लिए लंदन भेजा, जहां दो साल नौकरी की।

लंदन में रहते हुए देश की याद और समाज सेवा की इच्छा ने उन्हें प्रभावित किया। पिता से बात कर आईएएस बनने का फैसला किया। 2006 में नौकरी छोड़ भारत लौटीं। लखनऊ में तैयारी शुरू की, तीन महीने दिल्ली की बाजीराव कोचिंग ली। एक साल की मेहनत से पहली ही बार में यूपीएससी में एआईआर 24 हासिल किया। 2008 में आईएएस बनकर कानपुर में एसडीएम से करियर शुरू किया।

करियर में महाराजगंज में सीडीओ और डीएम, उन्नाव में डीएम, कानपुर में केस्को एमडी, फिर डीवीवीएनएल एमडी रहीं। बरेली मंडलायुक्त रह चुकी हैं। सितंबर 2025 से प्रयागराज मंडलायुक्त हैं। उन्होंने दादाजी की ख्वाहिश पूरी की, जो पीडब्ल्यूडी में थे और यूपीएससी देने की सलाह देते थे। सौम्या ने कहा कि वतन की मोहब्बत ने उन्हें पहला इम्तिहान दिया और पिता-दादा का भरोसा जीता।

राजनीतिक बयानबाजी: अखिलेश यादव ने क्या कहा?

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने ट्वीट कर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि भाजपा के महाभ्रष्ट राज में मेले के नाम पर कमीशन का खेल चल रहा है। इसलिए साधु-संतों को सम्मान नहीं मिल रहा, जिनका दर्शन आशीर्वाद होता है। उनके साथ अपमानजनक व्यवहार हो रहा है क्योंकि 'मेला महाभ्रष्टाचार' में भाजपा गुट की मिलीभगत है। जो दुर्व्यवस्था पर बोलेगा, वह निशाने पर आएगा। अखिलेश ने मेलाक्षेत्र के संजय को 'धृतराष्ट्र' कहा और भाजपा को 'कमीशनर' की पोस्ट बनाने की सलाह दी।

अब आगे क्या: विवाद का असर और संभावनाएं

शंकराचार्य का अनशन जारी है। वे कहते हैं कि प्रोटोकॉल के साथ स्नान कराएंगे तभी मेले में आएंगे। प्रशासन ने नोटिस जारी किया है और स्पष्टीकरण मांगा है। यह विवाद माघ मेले की व्यवस्था, साधु-संतों के सम्मान और प्रशासन की तैयारी पर सवाल खड़े कर रहा है। सौम्या अग्रवाल जैसे अधिकारी इस तरह के विवादों में अक्सर बीच में आते हैं, लेकिन उनका करियर प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक रहा है। घटना ने धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और राजनीतिक दलों के बीच बहस छेड़ दी है।

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