Chandan Gupta Murder Case: क्या था चन्दन गुप्ता हत्याकांड केस? जिसमें 28 आरोपी दोषी पाए गए, 2 केस से हुए बरी
Chandan Gupta Murder Case: सात साल की कानूनी कार्यवाही के बाद, लखनऊ की एनआईए अदालत ने 2018 में कासगंज से जुड़े चंदन गुप्ता हत्याकांड पर आज 2 जनवरी 2024 को अपना फैसला सुनाया है। एनआईए कोर्ट ने इस मामले में 28 आरोपियों को दोषी पाया है और दो आरोपियों को अपर्याप्त सबूतों के कारण बरी कर दिया गया है। अब शुक्रवार को इस मामले में दोषियों को सजा सुनाई जाएगी।
बता दें आज से सात साल पहले 2018 में उत्तर प्रदेश के कासगंज में हुई इस हत्या और उसके बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा ने खूब सुर्खियां बटोरी थी। कासगंज हिंसा फैल गई थी, कई वाहन और दुकानों को आग लगा दी गई थी। कासगंज में कई दिनों तक कर्फ्यू लगाया गया था। आइए जानते हैं क्या था चंदन गुप्ता हत्या का मामला?

क्या था चंदन गुप्ता हत्याकांड?
दरअसल, 26 जनवरी 2018 की सुबह उत्तर प्रदेश के कासगंज में युवाओं का एक समूह मोटरसाइकिल पर तिरंगा यात्रा पर निकला और देशभक्ति के नारे लगाए। अल्पसंख्यक बहुल बद्दूनगर से गुज़रते हुए उनकी यात्रा के दौरान हिंसक झड़प हुई, जिसमें पत्थरबाज़ी और गोलीबारी हुई, जिसके परिणामस्वरूप चंदन गुप्ता और नौशाद घायल हो गए। चंदन गुप्त ने स्थानीय अस्पताल में दम तोड़ दिया।
हत्या के बाद भड़की साम्प्रदायिक हिंसा, लगाना पड़ा था कर्फ्यू
हत्या के बाद कासगंज में हिंसा भड़क उठी और स्थानीय प्रशासन ने व्यवस्था बहाल करने के लिए कर्फ्यू लगा दिया। इस घटना के बाद भड़की संप्रदायिक हिंसा और तनावपूर्ण माहौल में कानून के शासन को बनाए रखने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। दुखद घटना ने सांप्रदायिक माहौल को और भी ज़्यादा तनावपूर्ण बना दिया और सरकार ने एसआईटी जांच टीम गठित करनी पड़ी थी।
लखनऊ कैसे पहुंचा चंदन हत्याकांड केस?
कासगंज में हुई चंदन गुप्ता की हत्या को लेकन ये कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई जब पुलिस ने मुख्य संदिग्धों को धर-धबोचा। जिसके बाद एसआईटी जांच हुई और उसके बाद कई लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। चंदन गुप्ता के पिता सुशील गुप्ता द्वारा अपने बेटे के लिए न्याय की मांग करने वाली याचिका के बाद मामले की सुनवाई लखनऊ ट्रांसफर कर दी गई।
7 साल बाद कोर्ट ने 28 अरोपियों को दोषी करार दिया
2 फरवरी 2025 के इस केस में आया फैसला वर्षों की कानूनी लड़ाई और जांच के कारण संभव हो सकी है। दोषी ठहराए गए लोगों में आसिफ कुरैशी उर्फ हिटलर, असलम कुरैशी, असीम कुरैशी और कई अन्य शामिल हैं, जिन पर आईपीसी और राष्ट्रीय ध्वज अपमान निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निलंबन के बाद देशद्रोह के आरोपों को आगे नहीं बढ़ाया गया।
दो आरोपियों को क्यों किया गया बरी?
पूरे मुकदमे के दौरान, एक आरोपी अजीजुद्दीन की मृत्यु हो गई और दो - नसरुद्दीन और असीम कुरैशी - को उनके खिलाफ सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया। शुरुआत में, मुख्य आरोपी, वसीम, नसीम और सलीम नाम के तीन भाइयों को 117 अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था। बाद में जांच 24 नामित व्यक्तियों और कई अज्ञात पक्षों तक सीमित हो गई।












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