कृष्णा पटेल-नीतीश कुमार की मुलाक़ात के क्या हैं मायने, UP की सियासत पर पड़ेगा असर ?
लखनऊ, 28 सितंबर: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश् कुमार और अपना दल (कामेरावादी) की संस्थापक कृष्णा पटेल के बीच पटना में हुई मुलाकात कई मायने में अहम मानी जा रही है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब नीतीश कुमार के यूपी से लड़ने की चर्चाएं गरम हुईं थीं। अटकलों में कहा गया था कि नीतीश कुमार यूपी की फूलपुर, मिर्जापुर या अंबेडकर नगर से लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि नीतीश ने खुद ही इन अटकलों को खारिज कर दिया था लेकिन उसके कुछ दिन बाद ही कृष्णा पटेल से मिलना एक नए समीकरण की ओर इशारा कर रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो कृष्णा पटेल एक ऐसे चेहरे की तलाश में है जिसके साथ वो अपनी राजनीतिक पारी को आगे बढ़ा सकें। वह नीतीश कुमार को साथ लेकर पटेल बाहुल्य इलाकों में अपनी सियासत को और मजबूत करना चाहती हैं।

नीतीश-कृष्णा पटेल के बीच बनी आगे की रणनीति
सूत्रों की माने तो बिहार के सीएम नीतीश कुमार और कृष्णा पटेल के बीच बातचीत के दौरान उनके यूपी से चुनाव लड़ने का मुद्दा भी उठा। यह वही कृष्णा पटेल हैं जिनकी बेटी पल्लवी पटेल ने यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए यूपी के दिग्गज नेता और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हरा दिया था। पल्लवी पटेल की इस धमाकेदार जीत की गूंज देशभर में सुनाई दी थी। यही वजह है कि अब नीतीश कुमार यूपी के पटेल बाहुल्य इलाकों का समीकरण समझना चाह रहे हैं। हालांकि बैठक में क्या रणनीति बनी इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है।

सोनेलाल पटेल के मित्र रह चुके हैं नीतीश कुमार
हालांकि पटेल ने इस दौरान अपने पति सोनेलाल पटेल के साथ उनके लंबे संबंध को साझा किया। पटेल, जिनकी बेटी पल्लवी ने इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा के दिग्गज और उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हराया था। पटेल ने कुमार से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की। कृष्णा पटेल ने कहा कि , "मेरे पति की नीतीश जी से लंबी दोस्ती थी। विपक्षी एकता बनाने के उनके प्रयास सराहनीय हैं, हालांकि यह हमारी बैठक के एजेंडे में नहीं था।"

अपना दल का एक अलग गुट बीजेपी के साथ
विशेष रूप से, पटेल की अलग हुई बेटी अनुप्रिया एनडीए की सहयोगी और केंद्रीय मंत्री हैं। अपना दल की स्थापना पटेल ने लगभग तीन दशक पहले एक शक्तिशाली ओबीसी समूह कुर्मियों को एक अलग मंच प्रदान करने के उद्देश्य से की थी। उनकी मृत्यु के बाद, अनुप्रिया ने कुछ समय के लिए पार्टी का नेतृत्व किया, लेकिन उपचुनाव में अपने पति को टिकट देने पर मतभेदों के कारण परिवार में दरार आ गई, जिससे अपना दल में विभाजन हो गया।

राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाना चाहते हैं नीतीश
नीतीश के साथ कृष्णा पटेल की मुलाकात इस चर्चा की पृष्ठभूमि में हुई है कि बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री, जो राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाने के लिए उत्सुक हैं, अगला लोकसभा चुनाव पास के राज्य से लड़ सकते हैं। यूपी में जद (यू) के नेताओं का विचार है कि कुमार को फूलपुर और मिर्जापुर जैसी कुर्मी बहुल सीटों से चुनाव लड़ना चाहिए, जिसका प्रतिनिधित्व जवाहरलाल नेहरू ने अपने जीवनकाल में किया था।

आम चुनाव में मोदी की तरह ही दांव खेल सकते हैं नीतीश
उधर, जेडीयू के नेताओं की माने तो नीतीश की नजर यूपी और उसमें भी खासतौर से पूर्वांचल के पटेल समुदाय पर है। पटेलों का नेता बनकर वो यूपी में एंट्री मारने की तैयारी में हैं। जिस तरह मोदी 2014 के लोकसभा चुनाव में दो जगहों से चुनाव लड़े थे उसी तरह नीतीश कुमार भी बिहार के साथ ही यूपी से भी चुनाव लड़ने का दांव खेल सकते हैं। जेडीयू के रणनीतिकारों को लगता है कि पीएम मोदी चूंकि काशी से चुनाव लड़ते हैं तो उससे सटे प्रयागराज के फूलपुर की सीट को चुनकर एक बड़ा संदेश दे सकते हैं।












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