विकास दुबे की बीवी के सपा की सदस्य होने की रसीद वायरल, अखिलेश की पार्टी ने कही यह बात
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कराकर भागने वाला गैंगस्टर विकास दुबे कई दिनों बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा है। वह आज सुबह उज्जैन के महाकाल मंदिर में पकड़ा गया। मध्य प्रदेश में पकड़े जाने की वजह से सत्ताधारी पार्टी भाजपा पर विपक्षी दलों के नेता सवाल उठा रहे हैं। वहीं, भाजपा से जुड़े लोग पल्ला झाड़ रहे हैं। इन सब घटनाओं के बीच विकास दुबे की पत्नी की सपा सदस्यता से संबंधित एक रसीद वायरल हो गई है।

विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे क्या सपा से जुड़ी थी?
सोशल मीडिया पर विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे के समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्य होने की एक रसीद वायरल होने लगी। जिसका कैप्शन दिया गया कि, विकास की पत्नी ने साल 2015 में गांव में ही समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली थी। इसी साल उसने समाजवादी पार्टी के समर्थन से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ा। उसने अधिकृत प्रत्याशी के रूप में फॉर्म भरा था। इतना ही नहीं, उसने फॉर्म में समाजवादी पार्टी की सदस्यता का नंबर भी भरा था। इसके अलावा उसके पार्टी के सभी कार्यक्रमों में शामिल होने का जिक्र है।

अखिलेश यादव की पार्टी पर सवाल उठा रहे लोग
ऐसे में कई लोग अब अखिलेश यादव की पार्टी पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह कहा जा रहा है कि, रिचा दुबे ने साल 2015 में समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखपत्र 'समाजवादी बुलेटिन' के आजीवन सदस्यता शुल्क के तौर पर 20 हजार रुपये दिए थे। मगर, सपा से रिचा के राजनीतिक रिश्ते के बारे में सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी का कहना है, "हमारी पार्टी का गैंगस्टर विकास दुबे या उसकी पत्नी को कोई लेना-देना नहीं है।"

सपा ने कहा- 20 हजार में कोई सदस्य नहीं बनता
राजेंद्र चौधरी आगे बोले, "हमारी पार्टी (सपा) में 20 हजार में कोई सदस्य नहीं बनता है। यहां तो खुली मेम्बरशिप है। समाजवादी बुलेटिन एक मैग्जीन है, जिसका कोई भी मेंबर बन सकता है। मैं कहूंगा कि ये सब हमारी पार्टी को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया में तमाशा हो रहा है। जबकि, असल में विकास की पत्नी का हमसे कोई लेना-देना नहीं है।"

समाजवादी बुलेटिन पत्रिका की मेंबरशिप तो कोई भी ले सकता है
राजेंद्र ने यह भी कहा कि, "समाजवादी पार्टी में कोई आजीवन मेंबर नहीं बनता है। सिर्फ 3 साल के लिए मेंबर बनता है। और, जिस समाजवादी बुलेटिन पत्रिका की बात हो रही है, उसका तो कोई भी सदस्य बन सकता है।"












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