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यूपी चुनाव: गाजीपुर जिले के चुनाव में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का असर

लखनऊ, 14 फरवरी। गाजीपुर जिले की सात सीटों में से तीन पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा ने अपने तीनों विधायकों का टिकट बरकरार रखा है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के सपा गठबंधन में जाने के बाद इस जिले में भाजपा की राजनीति बदल गयी है। अब सबकी नजरें इस बात टिकी हैं कि जहूराबाद सीट पर ओमप्रकाश राजभर और कालीचरण राजभर (भाजपा) की चुनावी जंग क्या रंग लाती ?

uttar pradesh election 2022 Lieutenant Governor Manoj Sinha impact in Ghazipur district

भाजपा ने कालीचरण राजभर को जहूराबाद से उम्मीदवार बना कर विरोधियों के समीकरण को छिन्न-भिन्न कर दिया है। माना जा रहा है कि भाजपा ने गाजीपुर जिले में जो उम्मीदवार उतारे हैं उस पर जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की छाप है। गाजीपुर जिले में 7 मार्च को मतदान है।

गाजीपुर में मनोज सिन्हा का असर

गाजीपुर में मनोज सिन्हा का असर

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा गाजीपुर जिले के मोहनपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे गाजीपुर से तीन बार सांसद रहे। रेलराज्यमंत्री भी रहे। उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सबसे भरोसेमंद नेताओं में एक माना जाता है। वे आइआइटी (बीएचयू) के पासआउट हैं। इसलिए पीएम मोदी को उनके टैलैंट पर बड़ा भरोसा रहा है। नरेन्द्र मोदी जब संघ के प्रचारक थे तब से वे मनोज सिन्हा के गांव आते थे। दोनों की दोस्ती तब से है जब वे संघ के संवयंसेवक थे। मनोज सिन्हा की गिनती भाजपा के मजबूत नेताओं में होती है। 2017 के विधानसभा चुनाव में गाजीपुर जिले में मनोज सिन्हा की पसंद के उम्मीदवार उतारे गये थे। जो तीन विधायक जीते थे उनको 2022 में बरकरार रखा गया है। मुहम्मदाबाद की विधायक अलका राय, गाजीपुर सदर की विधायक संगीता बलवंत बिंद और जमनिया की विधायक सुनीता सिंह फिर मैदान में हैं। इनका टिकट बरकरार रहा। माना जा रहा है कि ऐसा मनोज सिन्हा के प्रभाव से हुआ है। 2017 में भाजपा को तीन और उसकी सहयोगी रही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को दो सीटें (जहूराबाद और जखनियां) मिलीं थी। ओमप्रकाश राजभर जहूराबाद से जीते थे। अब सुहेलदेव पार्टी भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। इसलिए भाजपा ने ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ कालीचरण राजभर को प्रत्याशी बना कर जबर्दस्त दांव खेला है।

ओमप्रकाश राजभर की घेराबंदी

ओमप्रकाश राजभर की घेराबंदी

2017 में कालीचरण राजभर ने जहूराबाद से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। ओमप्रकाश राजभर भाजपा-सुभासप के संयुक्त उम्मीदवार थे। वे आसानी से जीत गये थे। वे योगी सरकार में मंत्री भी थे। लेकिन बाद में बेटे के टिकट के सवाल पर उनका भाजपा से विवाद हुआ और वे एनडीए से अलग हो गये। ओमप्रकाश राजभर ने जब सपा से गठबंधन कर लिया तो कालीचरण को अपने भविष्य की चिंता हुई। उन्हें ये डर लगने लगा कि जब ओमप्रकाश राजभर जहूराबाद से सपा-सुभासपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे तो फिर उनका क्या होगा ? ये सोच कर कालीचरण राजभर भाजपा में आ गये। दिसम्बर 2021 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली थी। 2022 के चुनाव के लिए भाजपा ने गाजीपुर जिले की छह में से पांच सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिये थे। भाजपा ने सैदपुर की सीट निषाद पार्टी को दी है। जहूराबाद सीट पर काफी दिनों तक मंथन चलता रहा। आखिरकार सभी गणित जोड़ कर भाजपा ने कालीचरण को यहां से मैदान में उतार दिया। कालीचरण राजभर बसपा के टिकट पर जहूराबाद से 2002 और 2007 में बिधायक रह चुके हैं। राजभर समुदाय में उनकी भी पैठ है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जहूराबाद में राजभर वोट बंटने से ओमप्रकाश राजभर को बड़ा नुकसान हो सकता है।

गाजीपुर में भाजपा की चुनौती

गाजीपुर में भाजपा की चुनौती

2022 के चुनाव में भाजपा के सामने अपनी तीन सीटों को बरकार रखने की चुनौती है। साथ ही 2017 गठबंधन के लिहाज से कहें तो जहूराबाद और जखनिया सीट पर भी वह अपना प्रभाव दिखाना चाहेगी। जखनिया सीट के मौजूदा विधायक सुरेश पासी जीते तो थे सपा के टिकट पर। लेकिन वे भाजपा के जरिये अब निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। सुभासपा की जखनिया सीट छीनने के लिए भाजपा ने यहां से मुसहर समुदाय के रामराज वनवासी को उम्मीदवार बनाया है। वे विधायक त्रिवेणी राम को चुनौती दे रहे हैं। 2017 में जंगीपुर सीट पर भाजपा हार गयी थी। भाजपा के रामनरेश कुशवाहा को सपा के वीरेन्द्र यादव ने हराया था। 2022 में भी भाजपा ने रामनरेश कुशवाहा पर भरोसा कायम रखा है। भाजपा के लिए मुहम्मदाबाद भी एक महत्वपूर्ण सीट है। इस सीट पर चर्चित नेता कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय विधायक हैं। उन्होंने माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्ला अंसारी (बसपा) को हराया था। मुहम्मदाबाद अंसारी बंधुओं का गढ़ माना जाता है। लेकिन अलका राय ने यहां से कमल खिला कर अपनी ताकत दिखायी थी। 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या हो गयी थी जिसका आरोप मुख्तार अंसारी पर लगा था। 2022 में सिगबतुल्ला अंसारी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। कृष्णानंद राय और मुख्तार अंसारी परिवार की दुश्मनी जागजाहिर है। ऐसे में मुहम्मदाबाद सीट पर जोरदार मुकाबला होता दिख रहा है।

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