UPSSSC: यूपी विधानसभा एवं परिषद में समूह ग की भर्तियों के नियम 3 महीने में बदलें, HC ने सरकार को दिया निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार को हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि विधानसभा व परिषद में समूह ग के तहत होने वाली भर्तियां UPSSSC के माध्यम से कराई जाएं। इसके लिए तीन महीने के भीतर नियमावली में संशोधन करने का भी निर्देश दिया है।

यूपी विधानसभा

Uttar Pradesh Subordinate Services Selection Commission: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि भविष्य में उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद में तृतीय श्रेणी के सभी पदों का चयन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के माध्यम से किया जाएगा। इसलिए, पीठ ने राज्य को तीन महीने के भीतर नियमों में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया।

लखनऊ खंडपीठ ने दिया ये निर्णय

न्यायमूर्ति डीके सिंह की पीठ ने सुशील कुमार और अन्य द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया। अपने आदेश में पीठ ने कहा कि जिन याचिकाकर्ताओं को अनुबंध के आधार पर नियुक्ति दी गई थी, उन्हें अनुबंध के आधार पर काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए और तदनुसार पारिश्रमिक का भुगतान किया जाना चाहिए, यदि पद रिक्त हैं, तो वे पदों के कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं।

पूरी चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद का लगा था आरोप

UPSSSC के माध्यम से नियमित रूप से चयनित उम्मीदवारों के शामिल होने तक याचिकाकर्ता काम कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने 11 संवर्ग के 99 पदों पर सितंबर 2020 में जारी विज्ञापन के तहत विधान परिषद में हुए चयन को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि पूरी चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद, पक्षपात और दुर्भावना व्याप्त थी।

प्रतिवादी ने किया याचिका का विरोध

याचिका का विरोध करते हुए प्रतिवादियों के वकील गौरव मेहरोत्रा ​​ने तर्क दिया कि अदालत ने पहले उसी राहत की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया था और याचिकाकर्ता चयन प्रक्रिया में कोई दोष साबित नहीं कर सके थे। असफल उम्मीदवारों के होने के कारण उनकी ओर से याचिका सुनवाई योग्य नहीं थी।

कोर्ट ने कही ये अहम बात

याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने कहा, "यह ध्यान रखना आवश्यक है कि सार्वजनिक निकाय में पदों के लिए नियुक्तियां उचित और सही अवधि में होनी चाहिए। चयन की पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और तार्किकता सुनिश्चित की जानी चाहिए।"

कोर्ट ने कहा कि विधानसभा एवं विधान परिषद् में तृतीय श्रेणी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के दृष्टिगत भर्ती विशिष्ट वैधानिक भर्ती निकाय के हाथों में होनी चाहिए न कि किसी चयन समिति या निजी एजेंसी के हाथों में पीठ ने राज्य से यूपीएसएसएससी के माध्यम से चयन कराया जाए।

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