UP में अब बंजर जमीन भी उगलेगी सोना! नहीं सूखेगी किसानों की फसल! जल संरक्षण को लेकर की ये बड़ी पहल
उत्तर प्रदेश में जल संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले पौने नौ वर्षों में जो चक्रव्यूह रचा है, उसके परिणाम अब दुनिया देख रही है। योगी सरकार ने पानी को सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि खेती और आने वाली पीढ़ियों की 'जीवन रेखा' मानकर काम किया है।
योगी सरकार ने 'अटल भूजल योजना' के जरिए पाताल के पानी की बूंद-बूंद का हिसाब रखना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश अब उन 7 खास राज्यों में है, जहाँ 26,945 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन को सक्षम जल उपयोग से जोड़ा गया है। सरकार ने 550 डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर लगाकर भूजल के दोहन पर लगाम कसी है। अब प्रशासन के पास रियल-टाइम डेटा है कि जमीन के नीचे कितना पानी बचा है।

आसमान से बरसे अमृत को सहेजने की जंग
'कैच द रेन' और 'जल संचय जन भागीदारी' सिर्फ नारे नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाली हकीकत बन चुके हैं। प्रदेश भर में हजारों तालाबों और कुओं को पुनर्जीवित किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर हुए 39.60 लाख भूजल पुनर्भरण कार्यों का सीधा फायदा यूपी के उन जिलों को मिला है, जो कभी सूखे की मार झेलते थे।
किसानों के लिए बना 'वरदान'
इस जल क्रांति का सबसे बड़ा फायदा राज्य के किसानों को मिला है। बेहतर सिंचाई और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई जान दी है। तालाबों और पारंपरिक स्रोतों के जिंदा होने से खेती अब स्थिर और लाभदायक हुई है। योगी सरकार की इस पारदर्शी और वैज्ञानिक नीति ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि भविष्य में यूपी को दोबारा जल संकट का सामना न करना पड़े।












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