UP Politics: जाति सर्वेक्षण-महिला बिल में ओबीसी के मुद्दे को 2024 में चुनावी मुद्दा बनाएगी सपा
UP News: देश में अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (SP) सत्तारूढ़ दल को घेरने के लिए महिला कोटा कानून और जाति सर्वेक्षण पर टारगेट करेगी। बिहार जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट ने इस मुद्दे पर सपा की रणनीति को आगे बढ़ने के लिए एक बैकग्राउंड तैयार कर दिया है। इसके बाद अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 2019 के लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद पीडीए की तैयारी शुरू कर दी थी।

महिला बिल और जातिय सर्वेक्षण बनेगा चुनावी मुद्दा
एक ओर जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला आरक्षण विधेयक को पहले संसद के दोनों सदनों से पारित कराने और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इसके कानून बनने पर अपनी जीत का जश्न मना रही है, वहीं सपा ने इसे अपनी ताकत बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। 'पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (PDA)' और दूसरी तरफ जाति सर्वेक्षण एजेंडा के मुद्दे को लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को घेरने की रणनीति पर सपा फोकस करेगी।
कोटा के भीतर कोटे की मांग कर रही सपा
उत्तर प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल सपा ने इन मुद्दों की हमेशा वकालत की थी। अब यह पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर मुसलमानों की 'पीडीए' महिलाओं के लिए आबादी में उनकी हिस्सेदारी के अनुसार 'कोटा के भीतर कोटा' की मांग कर रही है और धीरे-धीरे इसे अगले साल के आम चुनाव के लिए एक चुनावी मुद्दा बना रही है।
पीडीए की रणनीति पर फोकस कर रहे हैं अखिलेश
पारंपरिक मुस्लिम-यादव समर्थन के साथ, पार्टी गैर-यादव अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) और दलितों को आकर्षित करके आधार बढ़ाने में लगी हुई है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कुछ महीने पहले 'पीडीए' शब्द गढ़ा था। जहां राज्य की आबादी में मुस्लिम-यादवों की हिस्सेदारी करीब 32 फीसदी है, वहीं 'पीडीए' की आबादी 80 फीसदी के करीब है। वहीं दूसरी ओर कुछ दिन पहले वाराणसी में विपक्ष पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, "दशकों तक महिला आरक्षण बिल का विरोध करने वाले अब कांप रहे हैं।"
क्या कहती है सपा
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय ने कहा कि, ''हम कभी भी विधेयक के विरोध में नहीं थे। हम लैंगिक न्याय के अंतर्गत सामाजिक न्याय चाहते हैं। और हम पीडीए महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग जारी रखेंगे। जाति जनगणना के लिए हमारी मांग विभिन्न जातियों की संख्यात्मक ताकत का पता लगाना है ताकि जनसंख्या के उनके हिस्से के अनुसार लाभ दिया जा सके।"












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